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'भारत पर कब्जे की...', चीन पर कुछ यूं भड़कीं तिब्बत की निर्वासित सांसद

तिब्बत की निर्वासित सांसद येशी डोल्मा ने कहा कि चीन ने तिब्बत में नरसंहार किया है. वह 1959 से अक्साई चिन पर अवैध कब्जा करके बैठा है. उसकी नीतियां पूरी तरह से दमनकारी है. तिब्बत पर कब्जे के बाद चीन ने अब भारत पर भी कब्जा करने की कोशिश की है.

येशी डोल्मा और शी जिनपिंग येशी डोल्मा और शी जिनपिंग
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 31 अगस्त 2023,
  • अपडेटेड 4:30 PM IST

चीन के विवादित नक्शे का लगातार विरोध हो रहा है. इस नक्शे में चीन ने अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन को अपने हिस्से में दिखाया है. भारत सरकार इस पर घोर आपत्ति जता चुका है. लेकिन अब तिब्बत की निर्वासित सांसद येशी डोल्मा ने भी इस नक्शे को लेकर चीन पर निशाना साधा है.  

डोल्मा का कहना है कि चीन ने तिब्बत में नरसंहार किया है. वह 1959 से अक्साई चिन पर अवैध कब्जा करके बैठा है. उसकी नीतियां पूरी तरह से दमनकारी है. तिब्बत पर कब्जे के बाद चीन ने अब भारत पर भी कब्जा करने की कोशिश की है. हम चाहते हैं कि पूरे दक्षिण एशियाई देश चीन के खिलाफ एकजुट हों. 

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उन्होंने कहा कि चीन ने तिब्बत में बहने वाली नदियों पर 11 बांध बनाए हैं. अब अगर चीन और बांध बनाएगा तो इससे भारत में पानी की कमी हो जाएगी. हम भारत के लोगों का आभार जताते हैं जिन्होंने हमारा समर्थन किया है. हम 27 अगस्त से यहां हैं, हमारे 11 समूह हैं जो भारत का दौरा कर रहे हैं और वहां प्रमुख नेताओं से मिल रहे हैं. 

डोल्मा ने कहा कि चीन हमारे संसाधनों पर कब्जा किए बैठा है. चीन एक बड़ा बांध बना रहा है और इससे भारत को मिलने वाला पानी रुक जाएगा. अगर चीन जी20 में आता है तो कुछ नहीं होगा. उन्होंने कहा कि हम चीन के इस विवादित नक्शे की निंदा करते हैं.

चीन पर भड़के थे जयशंकर

चीन के विवादित नक्शे पर विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा था कि चीन की आदत है कि वह इस तरह के नक्शे जारी करता रहा है. चीन द्वारा अन्य देशों के क्षेत्रों को अपना बताने से सच्चाई नहीं बदलेगी.

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जयशंकर ने कहा कि चीन अपने नक्शों में उन हिस्सों को भी शामिल करता रहा है, जो उसके नहीं है. यह उसकी पुरानी आदत है. भारत के हिस्सों के अपने नक्शे में शामिल करने से कुछ नहीं बदलेगा. हमारी सरकार हमारी सीमाओं और क्षेत्रों को लेकर बहुत स्पष्ट है. इस तरह के भद्दे दावे करने से अन्य देशों के इलाके उनके नहीं हो जाएंगे.

बता दें कि चीन ने इस साल अपना ऑफिशियल मैप जारी कर उसमें  अरुणाचल प्रदेश, अक्साई चिन, ताइवान और विवादित दक्षिण चीन सागर को अपना हिस्सा बताया है.

क्यों है बवाल?

चीन की कम्युनिस्ट सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स द्वारा पोस्ट किए गए मैप में अरुणाचल प्रदेश, जिसे चीन दक्षिण तिब्बत के रूप में दावा करता है, और 1962 के युद्ध में अक्साई चिन पर कब्जा किया गया था, उसे चीन ने अपना हिस्सा बताया है. वहीं भारत ने चीन से बार-बार कहा है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा.

मैप में ताइवान के अलग द्वीप और दक्षिण चीन सागर के एक बड़े हिस्से पर दावा करने वाली नाइन-डैश लाइन पर चीन के दावों को भी शामिल किया गया है. चीन ताइवान को अपनी मुख्य भूमि का हिस्सा होने का दावा करता है और मुख्य भूमि के साथ इसका एकीकरण चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के संकल्पित उद्देश्य का हिस्सा है. वहीं वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान भी दक्षिण चीन सागर क्षेत्रों पर अपना करते हैं.

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(इनपुट: नीरज कुमार शर्मा)

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