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जमानत और आर्थिक अपराधों से जुड़े केस... CJI चंद्रचूड़ ने अपने कार्यकाल में इन मामलों पर किया फोकस

सीजेआई चंद्रचूड़ ने अपने लास्ट वर्किंग डे (8 नवंबर) पर स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या 82,000 तक पहुंच जाने के पीछे असली कारण ये है कि नवंबर 2022 से पहले, अनरजिस्टर्ड/दोषपूर्ण मामलों को कभी भी सार्वजनिक डोमेन में नहीं रखा गया, लेकिन इन मामलों का लेखा-जोखा उनके कार्यकाल में रखा जाने लगा.

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ (फाइल फोटो) मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ (फाइल फोटो)
कनु सारदा
  • नई दिल्ली,
  • 09 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 8:26 PM IST

भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ का कार्यकाल 10 नवंबर (कल) को समाप्त हो रहा है. हालांकि शुक्रवार (8 नवंबर) को उनका 'लास्ट वर्किंग डे' था. अपने कार्यकाल में उन्होंने पब्लिक लिबर्टी, संवैधानिक व्याख्याओं से संबंधित लंबित मामलों और मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित केसों पर फोकस किया. नवंबर 2022 से नवंबर 2024 तक सुप्रीम कोर्ट ने 1,11, 498 नए केसों की सुनवाई की और 1,07, 403 मामलों का निपटारा किया.

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व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मामलों को प्राथमिकता

सुनवाई के दौरान जमानत एक ऐसा मामला होता है जिस पर बहुत ज्यादा फोकस रहता है. सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ के कार्यकाल के दौरान दायर 21,358 मामलों में से 21,000 केसों में जमानत दी गई थी.

आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों पर फोकस

इसी तरह सीजेआई चंद्रचूड़ के कार्यकाल में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत आर्थिक अपराध के मामलों को प्राथमिकता दी गई, जिसमें 961 मामलों में से 907 मामलों का निपटारा किया गया.

लंबित केसों के लिए अपनाई ये रणनीति

जहां तक ​​पुराने मामलों के निपटारे का सवाल है तो साल 2019 से लंबित 10 मामलों को नियमित केसों के साथ रोजाना सूचीबद्ध किया गया.

संविधान पीठों का गठन

पिछले काफी समय से लंबित संवैधानिक मामलों को प्रयोरिटी देने का सीजेआई चंद्रचूड़ का तरीका उल्लेखनीय रहा है. उन्होंने 2023 में 17 संविधान बेंच और 2024 में 20 संविधान पीठों का गठन किया, ताकि लंबित मामलों का निपटारा किया जा सके. सीजेआई के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान डीवाई चंद्रचूड़ ने खुद 92 फैसले लिखे हैं, जो उनके जैसे समान कार्यकाल वाले किसी भी अन्य मुख्य न्यायाधीश से कहीं ज्यादा हैं.

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लंबित मामलों का डेटा सार्वजनिक डोमेन में डालने का फैसला

सीजेआई चंद्रचूड़ ने अपने लास्ट वर्किंग डे (8 नवंबर) पर स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या 82,000 तक पहुंच जाने के पीछे असली कारण ये है कि नवंबर 2022 से पहले, अनरजिस्टर्ड/दोषपूर्ण मामलों को कभी भी सार्वजनिक डोमेन में नहीं रखा गया, लेकिन इन मामलों का लेखा-जोखा उनके कार्यकाल में रखा जाने लगा. उन्होंने कहा कि जब मैंने नवंबर 2022 में मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाला, तो मैंने पाया कि रजिस्ट्रार की अलमारी में लगभग 1,500 फाइलें रखी हुई थीं, मैंने कहा कि इसमें बदलाव होना चाहिए. सिस्टम में आने वाले हर मामले को एक नंबर के साथ टैग किया जाना चाहिए. हमने सभी लंबित मामलों का डेटा सार्वजनिक डोमेन में डालने का फैसला किया. चाहे वे पंजीकृत हों या अपंजीकृत.

बता दें कि सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ 10 नवंबर को भारत के मुख्य न्यायाधीश का पद छोड़ देंगे. उनके स्थान पर जस्टिस संजीव खन्ना भारत के 51वें मुख्य न्यायाधीश होंगे. वे 11 नवंबर 2024 को शपथ लेंगे. 
 

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