
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के द्वारा बुधवार को संसद में कई क्षेत्रों पर रिपोर्ट साझा की गई हैं. इसी रिपोर्ट में CAG ने भारतीय नेवी एक 16 हजार करोड़ रुपये का समझौता पूरा ना होने पर निंदा की है. जबकि लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक्स को लेकर ये समझौता 2010 में ही हो गया था.
रिपोर्ट में कहा गया है कि नेवी ने चार LPD खरीदने के लिए समझौता किया था, जिनका इस्तेमाल समुद्र में वॉर जोन में हेलिकॉप्टर, टैंक और अन्य सैन्य सामान रखने के लिए किया जाता है.
कैग ने संसद में दी गई इस रिपोर्ट में नेवी पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि जब नेवी के पास LPD की कमी है, तो फिर समय में इस डील को पूरा क्यों नहीं किया गया. CAG ने कहा कि LPD की वर्तमान क्षमता जल-थल अभियानों के लिहाज से अपर्याप्त पाई गई है. भारतीय नौसेना ने इसलिए अक्टूबर, 2010 में 16,000 करोड़ रूपये की कीमत से अहम जंगी जहाज को खरीदने का निर्णय लिया था.
हालांकि, दस साल के बाद भी ये कॉन्ट्रैक्ट पूरा नहीं हुआ है. ये इसलिए हुआ क्योंकि नेवी की ओर से सही टाइम फ्रेम नहीं किया गया. साथ ही ये भी कहा गया है कि नेवी की लड़ाकू ताकत के मुकाबले जहाजों की ताकत नहीं बढ़ पाई है. इसको लेकर भी नेवी के प्रोसेस, टाइमलाइन और लापरवाही पर सवाल खड़े किए गए हैं.
इन कमियों को दूर करने के लिए नेवी ने सामान्य फ्लीट को ही ट्रेनिंग शिप में बदल दिया. लेकिन ऑपरेशंस के वक्त इनकी ताकत काफी कम ही रह गई है.
गौरतलब है कि CAG रिपोर्ट में कई अहम क्षेत्रों, मंत्रालयों के कामकाज को लेकर रिपोर्ट साझा की गई हैं. इसमें राफेल के ऑफसेट पर सवाल खड़े किए गए हैं और साथ ही सरकारी स्कूलों में शौचालय, सेना के हेलिकॉप्टर में अपग्रेडशन पर भी सवाल हुए हैं.