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देश में लॉकडाउन से सुधरी हवा की 'सेहत', 50 फीसदी तक कम हुआ प्रदूषण

सीपीसीबी की रिपोर्ट के मुताबिक लॉकडाउन के दौरान 2019 की तुलना में पीएम 2.5 में 50 फीसदी की कमी देखी गई.

प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर
ऐश्वर्या पालीवाल
  • नई दिल्ली,
  • 24 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 10:00 AM IST
  • सीपीसीबी के 46वें स्थापना दिवस पर जारी की गई रिपोर्ट
  • केंद्रीय पर्यावरण राज्यमंत्री बाबुल सुप्रियो ने जारी की रिपोर्ट
  • देश के विकास में सीपीसीबी की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण

कोरोना वायरस की महामारी के कारण सरकार ने देश में लॉकडाउन कर दिया था. लॉकडाउन में परिवहन के साधनों पर ब्रेक लग गया था तो कंपनियों की मशीनें भी ठप पड़ गई थीं. देश की अर्थव्यवस्था पर इसका विपरीत प्रभाव विकास दर को लेकर देखने को मिला, लेकिन पर्यावरण की सेहत भी इस अवधि में काफी सुधरी है.

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि लॉकडाउन के दौरान एयर क्वालिटी में काफी सुधार देखा गया. सीपीसीबी की रिपोर्ट के मुताबिक लॉकडाउन के दौरान 2019 की तुलना में पीएम 2.5 में 50 फीसदी की कमी देखी गई. लॉकडाउन के पहले भी इसमें 24 फीसदी की कमी देखी गई थी. यह रिपोर्ट पर्यावरण राज्यमंत्री बाबुल सुप्रियो ने जारी की.

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सीपीसीबी के 46वें स्थापना दिवस पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित कार्यक्रम में बाबुल सुप्रियो ने वायु प्रदूषण को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए संगठन की ओर से किए गए प्रयासों की सराहना की. उन्होंने कहा कि सीपीसीबी पिछले चार दशक से अधिक समय से पूरी लगन के साथ काम कर रहा है. सीपीसीबी ने भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

बाबुल सुप्रियो ने कहा कि सीपीसीबी ने सांस लेने वाली हवा के महत्व को लेकर जागरुकता और विवेक उत्पन्न किया. सीपीसीबी की रिपोर्ट में चरणबद्ध तरीके से अध्ययन किया गया है. सीपीसीबी की रिपोर्ट के मुताबिक लॉकडाउन के पहले की अवधि में भी हवा की गुणवत्ता में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले सुधार रिकॉर्ड किया गया.

 

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