
भारत में बनी एक और कफ सिरप विवादों में आ गई है. उज्बेकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि भारतीय फार्मा कंपनी मारियन बायोटेक (Marion Biotech) की बनाई कफ सिरप डॉक-1 मैक्स (Doc-1 Max) को पीने के बाद 18 बच्चों की मौत हो गई.
ये मामला सामने आने के बाद मारियन बायोटेक ने मैनुफैक्चरिंग का काम रोक दिया है. सरकार ने भी जांच के आदेश दे दिए हैं. गुरुवार को चार ड्रग इंस्पेक्टर की टीम ने कंपनी के प्लांट का निरीक्षण किया. इस टीम में केंद्र की ओर से भेजे गए दो ड्रग इंस्पेक्टर, एक नोएडा के ड्रग इंस्पेक्टर और एक मेरठ डिविजन के असिस्टेंट ड्रग कमिश्नर शामिल थे.
मारियन बायोटेक का ऑफिस नोएडा के सेक्टर 67 में स्थित है. ड्रग इंस्पेक्टर वैभव बब्बर ने न्यूज एजेंसी को बताया कि दस्तावेजों और साइट पर किए निरीक्षण के बाद कफ सिरप का प्रोडक्शन तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है. उन्होंने बताया कि जब तक सैम्पल के नतीजे नहीं आ जाते, तब तक प्रोडक्शन बंद रहेगा.
उज्बेकिस्तान से पहले गाम्बिया में भी भारत में बनी कफ सिरप पीने से करीब 70 बच्चों की मौत हो गई थी. उस समय गाम्बिया में भारतीय फार्मा कंपनी मेडेन फार्मास्यूटिक (Maiden Pharmaceuticals) ने बनाया था. इस कंपनी की बनी चार कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत होने का दावा किया था.
उज्बेकिस्तान में क्या हुआ?
उज्बेकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि भारतीय फार्मा कंपनी मारियन बायोटेक की कफ सिरप डॉक-1 मैक्स पीने के बाद 18 बच्चों की मौत हो गई.
वहां के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि इन कफ सिरप के एक बैच में इथिलीन ग्लायकोल (Ethylene Glycol) शामिल था जो हानिकारक केमिकल है.
इथिलीन ग्लायकोल खतरनाक होता है और इंसानों के लिए घातक हो सकता है. इसकी वजह से पेट दर्द, उल्टी, दस्त, पेशाब करने में दिक्कत, मानसिक स्थिति में बदलाव और गंभीर किडनी इंजरी हो सकती है, जिस कारण मौत भी हो सकती है.
न्यूज एजेंसी के मुताबिक, स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि सांस की गंभीर बीमारी से जूझ रहे 21 में से 18 बच्चों ने डॉक-1 मैक्स ली थी, जिसके बाद उनकी मौत हो गई. बीमार पड़े सभी बच्चों की उम्र 6 साल से कम थी.
बच्चों की मौत कैसे हुई?
जांच में सामने आया है कि अस्पताल में भर्ती होने से पहले इन बच्चों ने 2 से 7 दिन तक दिन में तीन-चार बार कफ सिरप ली थी. इतना ही नहीं, बच्चों ने 2.5 से 5 मिलीलीटर तक दवा ली थी, जो स्टैंडर्ड डोज से ज्यादा है.
ये भी सामने आया है कि सभी बच्चों ने ये कफ सिरप बिना किसी डॉक्टरी सलाह के ली थी. इस दवा का मेन कंपोनेंट पैरासिटामोल है. इसलिए सर्दी-जुकाम होने पर माता-पिता ने बिना डॉक्टरी सलाह के फार्मेसी से इस दवा को खरीद लिया. और यही मरीजों की हालत बिगड़ने का कारण था.
असल में पैरासिटामोल तभी लेना चाहिए जब शरीर का तापमान 38 से 38.5 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा हो. वो भी दिन में एक या दो बार ही. अगर बच्चे की उम्र एक साल से कम है तो 100 से 125 मिलीग्राम का ही डोज लेना चाहिए. एक से तीन साल बच्चों के लिए स्टैंडर्ड डोज की मात्रा 200 मिलीग्राम और तीन से पांच साल की उम्र के बच्चों के लिए 250 मिलीग्राम है.
लैब में शुरुआती जांच में सामने आया कि डॉक-1 मैक्स सिरप में इथिलीन ग्लायकोल था, जो जहरीला केमिकल है. एक किलोग्राम मात्रा में एक-दो एमएल मिलाने के बाद तैयार सिरप के 95 फ़ीसद कंसंट्रेटेड सॉल्यूशन को पीने से उल्टियां, बेहोशी, कार्डियोवस्क्युलर समस्याओं से लेकर किडनी फ़ेल होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
कंपनी का क्या है कहना?
उज्बेकिस्तान में बच्चों की मौत का मामला सामने आने के बाद मारियन बायोटेक ने दवा का प्रोडक्शन बंद कर दिया है.
कंपनी की ओर से हसन हैरिस ने न्यूज एजेंसी को बताया कि हमारी तरफ से कोई समस्या नहीं है और टेस्टिंग में भी कोई परेशानी नहीं है.
हैरिस ने कहा कि हमारी कंपनी 10 साल से दवा बना रही है. जब सरकार की रिपोर्ट आएगी तब देखेंगे. फिलहाल मैनुफैक्चरिंग रोक दी गई है.
सरकार ने क्या किया?
पहले गाम्बिया और अब उज्बेकिस्तान में भारत में बनी कफ सिरप से बच्चों की मौत के बाद केंद्र सरकार घिर गई है.
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ट्वीट किया, 'भारत में बनी कफ सिरप खतरनाक लगती है. पहले गाम्बिया में 70 बच्चों और अब उज्बेकिस्तान में 18 बच्चे. मोदी सरकार को भारत को दुनिया की फार्मेसी बताने की डींगे हांकनी बंद करना चाहिए और कार्रवाई करना चाहिए.'
इस मामले के सामने आने के बाद विदेश मंत्रालय से लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय तक अलर्ट पर है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बताया कि उज्बेकिस्तान के अधिकारियों ने जानकारी दी है कि ये मौतें दो महीनों में हुई हैं.
बागची ने बताया कि उज्बेकिस्तान के अधिकारियों ने इस मामले को हमारे सामने औपचारिक तौर पर नहीं उठाया है. फिर भी हमारे दूतावास ने उज्बेकिस्तान के अधिकारियों से संपर्क किया है और मामले से जुड़ी डिटेल मांगी हैं.
वहीं, स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसकी जांच शुरू कर दी है. मंत्रालय ने एक बयान जारी कर बताया है कि मारियन बायोटेक के नोएडा मैनुफैक्चरिंग प्लांट की जांच सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) और यूपी ड्रग्स लाइसेंसिंग अथॉरिटी कर रही है.
कंपनी के नोएडा स्थित प्लांट से कफ सिरप के सैम्पल लेकर चंडीगढ़ के रीजनल ड्रग्स टेस्टिंग लैबोरेटरी (RDTL) में भेजा गया है.
इस बयान में बताया गया है कि स्वास्थ्य मंत्री मनसुक मांडविया के निर्देश पर CDSCO की टीम इस मामले को लेकर 27 दिसंबर से उज्बेकिस्तान के ड्रग्स रेगुलेटर के साथ संपर्क में है.
इसमें बताया गया है कि मारियन बायोटेक लाइसेंस्ड मैनुफैक्चरर है और उसके पास डॉक-1 मैक्स सिरप के अलावा टैबलेट का एक्सपोर्ट करने के लिए यूपी के ड्रग्स कंट्रोलर से लाइसेंस मिला है.
कंपनी की क्या है कुंडली?
जानकारी के मुताबिक, डॉक-1 मैक्स सिरप और टैबलेट बनाने वाली कंपनी मारियन बायोटेक 2012 से उज्बेकिस्तान में रजिस्टर्ड है. ये कंपनी उसी साल से इसकी बिक्री करने लगी थी.
ये दवा कंपनी भारत में अपनी दवा नहीं बेचती है. ये विदेशों में ही दवा बेचती है और वो भी उज्बेकिस्तान में ही. उज्बेकिस्तान में डॉक-1 मैक्स को कुरामैक्स मेडिकल कंपनी ने आयात किया था.
डॉक-1 मैक्स लेने से बच्चों की मौत का मामला सामने आने के बाद उज्बेकिस्तान ने इस दवा की बिक्री पर रोक लगा दी है. भारत में भी इसका प्रोडक्शन बंद कर दिया गया है.
गाम्बिया में क्या हुआ था?
अफ्रीकी देश गाम्बिया के मेडिकल अधिकारियों ने जुलाई में तब अलर्ट जारी किया था, जब वहां किडनी की समस्या से दर्जनों बच्चे बीमार पड़ने लगे थे. 70 बच्चों की मौत होने का दावा किया गया था.
इसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मेडेन फार्मास्यूटिक की चार कफ सिरप को लेकर अलर्ट जारी किया था.
WHO ने प्रोमिथैजीन ओरल सॉल्यूशन (Promethazine Oral Solution), कोफेक्समैलिन बेबी कफ सिरप (Kofexmalin Baby Cough Syrup), मेकऑफ बेबी कफ सिरप (Makoff Baby Cough Syrup) और मैगरिप एन कोल्ड सिरप (Magrip N Cold Syrup) को खतरनाक बताया था.
WHO ने दावा किया था कि इन चारों कफ सिरप में डाइथिलीन ग्लायकोल (Diethylene glycol) और इथिलीन ग्लायकोल (Ethylene glycol) की मात्रा जरूरत से ज्यादा पाई गई है.
हालांकि, भारत के ड्रग्स कंट्रोलर (DGCI) का कहना है कि WHO ने समय से पहले ही बच्चों की मौत के तार इन कफ सिरप से जोड़ दिए थे.
DGCI के मुताबिक, गाम्बिया ने जानकारी दी है कि अभी तक बच्चों की मौत और इन कफ सिरप के बीच सीधा संबंध स्थापित नहीं किया गया है. और जिन बच्चों की मौत हुई है, उन्होंने इस कप सिरप को नहीं लिया था.
(इनपुटः मिलन शर्मा)