
किशोरों को कोरोना वैक्सीन का टीका दिए जाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के पहले देश में कई स्तर पर बच्चों पर इसका परीक्षण किया गया है. इस ट्रायल के नतीजे सामने आए हैं.
कोविड टास्क फोर्स वर्किंग ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. एनके अरोड़ा ने कहा कि हाल ही में बच्चों पर कोवैक्सीन की ट्रायल की गई थी. इसे लेकर बेहतरीन परिणाम सामने आए हैं. उन्होंने कहा है कि व्यस्कों की तुलना में बच्चों में एंटी बॉडीज ज्यादा बनती है और एंटी बॉडीज का सीधा संबंध बीमारियों से मिलने वाली सुरक्षा से है.
डॉ. एनके अरोड़ा ने कहा कि कोवैक्सीन की ट्रायल के दौरान पाया गया कि बच्चों को व्यस्कों की तुलना में मांसपेशियों में दर्द कर्म हुआ. उन्हें सूजन की शिकायत भी कम हुई.
डॉ. अरोड़ा ने कहा कि किशोरों (15-18 साल) का टीकाकरण दो वजहों से ज्यादा जरूरी है. एक यह कि वे काफी तेज हैं, उनकी लाइफ स्टाइल फास्ट है, उन्हें स्कूल-कॉलेज जाना पड़ता है. ऐसे में उन्हें ओमिक्रॉन खतरा ज्यादा है. इसलिए वैक्सीनेशन के जरिए उन्हें कोरोना और ओमिक्रॉन से बचाने की जरूरत है.
डॉ. अरोड़ा ने कहा कि 15-18 साल के बच्चों को वैक्सीन लगाना इसलिए भी जरूरी है कि कई बार घर में बीमारियों से ग्रसित बुजुर्ग होते हैं. इसकी चपेट में बच्चे भी आत जाते हैं. ऐसे में इस आयु वर्ग के बच्चों को सुरक्षित करना काफी लाभदायक होगा.
कोवैक्सीन का बच्चों पर क्या असर?
डॉ एन के अरोड़ा ने कहा कि बच्चों पर कोवैक्सीन के असर को लेकर प्रतिरक्षाजनकता (immunogenicity) अध्ययन किया गया है. अभी इसकी प्रभावकारिता की स्टडी नहीं की गई है. immunogenicity का मतलब है कि वैक्सीन देने के बाद किस स्तर की एंटी बॉडी पैदा की जा सकती है. और हम जानते हैं कि एंटी बॉडी लेवल और बीमारियों से मिलने वाली सुरक्षा के बीच सीधा संबंध है. एंटी बॉडी जितनी ज्यादा रहेगी सुरक्षा उतनी ही तगड़ी होगी.
व्यस्कों की अपेक्षा ज्यादा मात्रा में एंटी बॉडी पैदा कर रहे किशोर
डॉ अरोड़ा ने कहा, "जैसा कि मैं पहले ही कह चुका हूं किशोर व्यस्कों की अपेक्षा ज्यादा मात्रा में एंटी बॉडी पैदा करते हैं." डॉ अरोड़ा के अनुसार बच्चों को वही कोवैक्सिन की खुराक दी जाती है और खुराक के बीच की का समय भी चार सप्ताह होता है.
उन्होंने कहा कि किशोरों के बीच वैक्सीनेशन को बिना किसी विशेष तैयारी के कम समय में शुरू किया जा सकता है. डॉ अरोड़ा ने कहा कि कोवैक्सीन के जितने डोज व्यस्कों को लगाए जा रहे थे उतने ही बच्चों को लगाए जाएंगे.
DCGI ने भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को दी है मंजूरी
बता दें कि भारत के औषधि महानियंत्रक (DCGI) ने 15-18 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को आपातकालीन उपयोग की अनुमति दी है. डॉ अरोड़ा ने कहा कि कोवैक्सीन के इस टीके ने ट्रायल के दौरान बच्चों पर अच्छी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया दिखाई है.
व्यस्कों के मुकाबले दर्द कम, सूजन भी नहीं
डॉ. अरोड़ा के मुताबिक वैक्सीन से दर्द, हाथों में सूजन जैसी समस्या नहीं हो रही है. उन्होंने कहा कि यह टीका हमारे किशोरों के लिए नए साल का शानदार गिफ्ट है. डॉ अरोड़ा ने कहा कि मुद्दा यह है कि हमारे पास एक टीका है, जिसे बच्चों के लिए स्वीकृती मिल चुकी है. कोवैक्सीन ने दिखाया है कि परीक्षणों में बच्चों में इसकी बहुत अच्छी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया है. यह बच्चों को सुरक्षा देता है. वास्तव में कहें तो यह वयस्कों की तुलना में थोड़ा बेहतर है. दूसरी बात यह है कि यह टीका एक सुरक्षित वैक्सीन है , और यहां तक कि दर्द, बाजुओं में सूजन जैसे प्रभाव भी वयस्कों की तुलना में बच्चों में बहुत कम सामने आए हैं. हम अपने किशोरों को यह सुरक्षा प्रदान करना चाहेंगे.
भरोसे के साथ स्कूल जा सकेंगे बच्चे
डॉक्टर अरोड़ा ने कहा कि हालांकि बीमारी का प्रभाव बच्चों में बहुत कम है, लेकिन जैसा कि हम जानते हैं कि कई स्कूल खुल गए हैं, बहुत सारे माता-पिता अभी भी अपने बच्चों को स्कूलों में भेजने को लेकर आश्वस्त नहीं हैं. इसलिए यह टीकाकरण अभियान उनमें भी आत्मविश्वास जगाएगा. मैं कहूंगा कि यह हमारे किशोरों के लिए नए साल का एक शानदार उपहार है.