
कोरोना वायरस महामारी का प्रकोप देशभर में जारी है. कोरोना से हो रही मौतों के चलते श्मशान घाट पर लाशों की संख्या बढ़ती जा रही है. यह किसी एक राज्य का हाल नहीं है. देश के अलग-अलग राज्यो में श्मशान घाट पर लंबी कतारें लग रही हैं. कुछ ऐसा ही हाल कर्नाटक के बेंगलुरू में भी है. बेंगलुरु के तवारेकेरे में का नजारा वीभत्स है. यहां के श्मशान के पास से गुजरने पर कई चिताएं जलती नजर आती हैं.
यहां श्मशान घाट पर काम करने वाले लोगों के पास थोड़ी फुर्सत नहीं है. यहां एक के बाद एक एंबुलेंस लाशों के साथ पहुंचती रहती हैं. शहर में सात कोविड श्मशान घाट दिन रात चालू हैं. यह हाल पिछले तीन सप्ताह से है. शनिवार को एक श्मशान घाट को मरम्मत के लिए बंद किया गया था.
तवारेकेरे श्मशान घाट पर 41 आइरन प्लेटफार्म है जहां चिताओं को अग्नि दी जाती है. यह काम दो सुबह और शाम की दो शिफ्ट में होता है. एक चिता को जलने में पांच घंटे का समय लगता है. रोजाना 85 लाशें जलाई जाती हैं. श्माशान घाट पर मृतक के एक परिजन को पीपीई किट पहनकर अंतिम संस्कार करने की अनुमति है.
श्मशान घाट पर मौजूद प्राधिकरण के लोगों ने बताया कि यहां सभी के काम बंटे हुए हैं. एक शख्स पीपीई किट पहनकर लाशों को एंबुलेंस चिता तक ले आता है. एक ग्रुप लकड़ियां चीरता है. जबकि दूसरी ग्रुप साफ-सफाई कर दूसरी चिता की तैयारी करता है. बीते 15 दिन में 800 लाशें जलाई गई हैं और यह आंकड़ा दिनबदिन बढ़ता जा रहा है.
तवारेकेरे से 6 किलोमीटर दूर एक और श्मशान घाट पर हाल कुछ ऐसा ही है. यह श्मशान घाट सरकार की तरफ से बनाया गया है. यहां पहुंचने पर देखा गया कि परिजनों के साथ एंबुलेंस की लंबी कतारें थीं. लोग यहां शव जलाने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे. बेंगलुरू में कोरोना से मौत के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं. शुक्रवार को यहां 346 लोगों को मौत हुई थी. रविवार को यहां कोरोना से 281 लोगों ने दम तोड़ा था. जबकि रविवार को पूरे कर्नाटक में 490 लोगों की मौत हुई थी.