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ओमिक्रॉन का पांचवां वैरिएंट, रोजाना 3000 कोरोना केस, क्या देश में चौथी डोज का वक्त आ गया है? एक्सपर्ट्स ने बताया

देश में तेजी से बढ़ रही कोविड की रफ्तार को लेकर मेडिकल एक्सपर्ट्स टेंशन में हैं. वहीं सरकार अलर्ट मोड में आ गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि नए केसों में ओमिक्रॉन के XBB.1.16 वैरिएंट होने की आशंका है. हालांकि अभी कोरोना की चौथी डोज लेने की कोई जरूरत नहीं है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे सुरक्षित रहने का एकमात्र रास्ता सावधानी बरतना है.

देश में कोरोना के केस तेजी से बढ़ रहे हैं (फाइल फोटो- पीटीआई) देश में कोरोना के केस तेजी से बढ़ रहे हैं (फाइल फोटो- पीटीआई)
स्नेहा मोरदानी
  • नई दिल्ली,
  • 01 अप्रैल 2023,
  • अपडेटेड 12:16 PM IST

भारत में कोविड-19 के केस लगातार बढ़ रहे हैं. पिछले दो दिन से लगातार 3 हजार से ज्यादा नए केस मिल रहे हैं. जबकि पॉजिटिविटी रेट 3 फीसदी के करीब पहुंच गई है. वहीं, मेडिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि बीते कुछ दिनों में कोविड-19 की स्थिति तेजी से बदल रही है. केसों में लगातार वृद्धि हो रही है. नए केसों में ओमिक्रॉन के XBB.1.16 वैरिएंट होने की आशंका है. ऐसे में अब ये सवाल उठने लगा है कि इससे बचाव के लिए क्या कोविड की चौथी वैक्सीन लगवानी होगी?

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आजतक ने मेडिकल एक्सपर्ट्स से पूछा कि ओमिक्रॉन के XBB.1.16 वैरिएंट से बचने के लिए क्या उपाय हो सकते हैं, क्या लोगों को कोविड की चौथी वैक्सीन लेनी होगी. इसे लेकर उन्होंने कहा कि भारत में कोविड-19 से बचाव के लिए युद्ध स्तर पर वैक्सीनेशन ड्राइव चलाई जा रही है. लोगों को बूस्टर डोज दी गई है, ताकि उनकी इम्युनिटी मजबूत हो सके. कोविड को हराने के बाद लोगों की इम्युनिटी काफी स्ट्रॉन्ग हो चुकी है. उन्होंने कहा कि जब हम इम्युनिटी की बात करते हैं, तो यह दो स्तर पर काम करती है. पहली- ये लोगों को सामान्य वायरस से बचाती है, दूसरी- यह संक्रमण के  गंभीर परिणामों से सिक्योर करती है. 

अलर्ट रहने की जरूरत

मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक ओमिक्रॉन के इस वैरिएंट से बचाव के लिए किसी वैक्सीन की नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर सावधानी बरतने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि जब संक्रमण बढ़ रहा हो,  तो लोगों को ज्यादा अलर्ट होने की जरूरत है.

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वैक्सीनेशन ही कोरोना से बचाव का हथियार
 

कोरोना की वैक्सीन को लेकर मेडिकल एक्सपर्ट का कहना है कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीन बहुत बड़ा हथियार है. लिहाजा, लोगों को कोविड की तीसरी डोज के साथ ही बूस्टर डोज भी लेनी चाहिए. उन्होंने कहा कि कोरोना की कंप्लीट डोज लेने से फेफड़ों की गंभीर बीमारी, निमोनिया को रोकने में मदद मिलती है. इतना ही नहीं, अब कोविड की चपेट में आने वाले मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत भी कम हुई है. बूस्टर डोज करीब एक साल पहले उपलब्ध कराया गई थी, हालांकि अभी भी कई लोगों ने बूस्टर डोज नहीं लगवाई है.

 

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चौथी डोज लेने की जरूरत नहीं

ओमिक्रॉन के XBB.1.16 वैरिएंट से बचने के लिए चौथी डोज लगवानी होगी? इसके जवाब में मेडिकल एक्सपर्ट कहते हैं कि अब चौथी डोज लेने की जरूरत नहीं है. भारत में इस्तेमाल होने वाली वैक्सीन तीन साल पहले डवलप की गई थी. अब कोई वैक्सीन नए वैरिएंट में बहुत ज्यादा कारगर साबित नहीं होगी. उन्होंने कहा कि ओमिक्रॉन वैरिएंट के 1100 से ज्यादा सब-टाइप हैं. मसलन, जो वैक्सीन पहले से उपलब्ध हैं, वही इसकी रोकथाम के लिए काफी हैं. इसलिए चौथी वैक्सीन लेने की कोई जरूरत नहीं है.

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नेजल वैक्सीन लेना समझदारी

नेफ्रॉन क्लिनिक के चेयरमैन डॉ. संजीव बगई ने बताया कि पहले ली गई तीन खुराक से गंभीर बीमारी से बचाव किया जा सकता है. कोरोना की पूरी डोज लेने से लोग काफी हद तक सुरक्षित हो गए है. लेकिन वर्तमान मे ऐसे हालात नहीं है कि चौथी डोज की जरूरत पड़े. उन्होंने कहा कि जिन लोगों को अभी बूस्टर डोज लेना है, उनके लिए इंट्रा नेजल वैक्सीन लेना समझदारी है. यह लंबे समय तक फेंकड़ों को सुरक्षित करता है.


देश में कोरोना की स्थिति

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक भारत में शनिवार को कोविड-19 के 2,994 नए केस सामने आए. इससे देशभर में कोविड के एक्टिव मरीजों की संख्या 16,354 हो गई है. जबकि कोविड से 9 मरीजों की मौत हो गई. इसमें दिल्ली, कर्नाटक और पंजाब के दो-दो, गुजरात से एक और केरल से दो मरीजों की मौत हुई है. आंकड़ों के मुताबिक डेली पॉजिटिविटी रेट 2.09 फीसदी और वीकली पॉजिटिविटी रेट 2.03 प्रतिशत हो गई है.
 

क्या हैं इस वैरिएंट के लक्षण?

ओमिक्रॉन के XBB.1.16 वैरिएंट के प्रमुख लक्षणों में नाक बहना, गले में खराश, बुखार, सिरदर्द, छींक, ठंड, खांसी और आवाज का कर्कश होना शामिल हैं.

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यदि आप सांस की तकलीफ या हाइपोक्सिया के बिना ऊपरी श्वसन पथ के लक्षण या बुखार का अनुभव कर रहे हैं तो यह एक हल्की बीमारी है जिसे होम आइसोलेशन से सही किया जा सकता है. वहीं जिनकी रेस्पिरेटरी रेट 24 प्रति मिनट से अधिक है और एसपीओ2 90 से 93 प्रतिशत  के बीच रहती है तो उन्हें वार्ड में भर्ती करने की आवश्यकता होती है. वहीं अगर किसी की रेस्पिरेटरी रेट प्रति मिनट 30 से अधिक है तो उसे एचडीयू या आईसीयू में भर्ती करने की आवश्यकता होती है.

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