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तनाव के बीच चीन-पाक को भारत का जवाब, BRO के बनाए 44 पुल तैयार

इनमें से आठ पुल लद्दाख मे हैं जहां पिछले पांच महीनों से भारत और चीन की सेनाओं के सैन्य गतिरोध जारी है. इसके अलावा 10 पुल जम्मू और कश्मीर हैं. इन पुलों से नियंत्रण रेखा (LoC) पर सड़क संपर्क बेहतर होगा.

सीमा से सटे इलाकों में बनाए गए कुल 44 पुल सीमा से सटे इलाकों में बनाए गए कुल 44 पुल
अभिषेक भल्ला
  • नई दिल्ली,
  • 12 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 6:23 PM IST
  • बीआरओ की ओर से बनाए गए हैं 44 पुल
  • राजनाथ सिंह ने सोमवार को किया उद्घाटन
  • सारे पुल इस्तेमाल के लिए तैयार

सीमा पर संपर्क को और बेहतर बनाने के लिए सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की ओर से बनाए गए 44 पुल इस्तेमाल के लिए तैयार हैं. सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इन पुलों का ऑनलाइन उद्घाटन किया. भारत-चीन गतिरोध के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचे) को बढ़ावा देने के लिए इन पुलों का तैयार होना अहम घटनाक्रम है. इनमें से अधिकतर पुल वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के आसपास के इलाकों में संपर्क को बढ़ाएंगे. 

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इनमें से आठ पुल लद्दाख में हैं, जहां पिछले पांच महीनों से भारत और चीन की सेनाओं के बीच गतिरोध जारी है. इसके अलावा 10 पुल जम्मू और कश्मीर में हैं. इन पुलों से नियंत्रण रेखा (LoC) पर सड़क संपर्क बेहतर होगा. 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पुलों के ई-उद्घाटन के दौरान दोनों सरहदों पर सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर की अहमियत पर जोर दिया. उन्होंने चीन और पाकिस्तान के मिलकर पेश की जाने वाली चुनौती के खतरे को देखते हुए सड़क संपर्क बेहतर बनाने को वक्त की जरूरत बताया.  

सिंह ने कहा, “आप हमारी उत्तरी और पूर्वी सीमाओं पर बनी स्थितियों से अच्छी तरह वाकिफ हैं. पहले पाकिस्तान, और अब चीन की ओर से भी. जैसे कि दोनों देशों की ओर से एक मिशन के तहत सीमा विवाद बनाया जा रहा है. हमारे पास इन देशों के साथ लगभग 7,000 किलोमीटर लंबी सीमा है.” 

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चीन के साथ सीमा वाले उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश में आठ नए पुल बने हैं. चार नए पुल सिक्किम में, दो हिमाचल प्रदेश में स्थित हैं. इन दोनों राज्यों की सीमा भी चीन से सटी है. लोगों के लिए खुले नए पुलों में से चार पंजाब में हैं. 

इन नए पुलों के उद्घाटन का घटनाक्रम रोहतांग में अटल टनल के आवाजाही के ठीक बाद हुआ है. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 अक्टूबर को हिमाचल प्रदेश के रोहतांग में अटल टनल का उद्घाटन किया था. 9 किमी लंबी इस सुरंग के माध्यम से लाहौल-स्पीति क्षेत्र से साल भर सड़क संपर्क कायम रह सकेगा. जाड़े में भारी बर्फबारी की वजह इस क्षेत्र का बाकी देश से 5-6 महीने संपर्क कटा रहता था. 

अटल सुरंग मनाली और लेह के बीच कनेक्टिविटी को भी बढ़ावा देती है. इससे न सिर्फ आम लोगों के लिए यात्रा के समय में कटौती हुई है बल्कि लद्दाख के लिए तेजी से मिलिट्री मूवमेंट भी हो सकेगा. 

एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने आजतक/इंडिया टुडे को बताया कि पूर्वी लद्दाख में दौलत बेग ओल्डी की सड़क जो नवीनीकरण के दौर से गुजर रही थी, इस महीने के अंत तक तैयार हो जाएगी. ये सड़क LAC के करीब है. 

दरबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी रूट (डीएस-डीबीओ) पर भारत का सड़क निर्माण पिछले 5 महीने से चल रहे भारत-चीन सैन्य गतिरोध के ट्रिगर्स में से एक है. भारत की ओर से इस सड़क निर्माण को चीन पचा नहीं पा रहा है. 

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सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने इस साल के लिए नियोजित 102 पुलों में से 54 को पूरा कर लिया है. तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए 60 बेली ब्रिज भी बनाए गए हैं. 

रक्षा मंत्री ने बताया कि 5-6 साल पहले, बीआरओ का वार्षिक बजट 3000-4000 करोड़ रुपए था जो वर्तमान में बढ़कर 11,000 करोड़ से अधिक हो गया है. सिंह ने कहा, "यह बजट लगभग तीन गुना बढ़ गया है. कोविड-19 महामारी के बावजूद बीआरओ के खर्च पर कोई पाबंदी नहीं है." 

 

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