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एक रिपोर्ट जिसने खोल दिया दिल्ली का शराब घोटाला, सिसोदिया से लेकर अफसर-कारोबारी तक... कैसे नप गए?

दिल्ली का कथित शराब घोटाला छाया हुआ है. आम आदमी पार्टी में दूसरे नंबर माने जाने वाले मनीष सिसोदिया बुरी तरह फंस चुके हैं. तेलंगाना के सीएम केसीआर की बेटी के. कविता पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है. सीबीआई और ईडी कई अफसरों और शराब कारोबारियों को गिरफ्तार कर चुकी है. ऐसे में जानिए दिल्ली के शराब घोटाले की पूरी कहानी क्या है?

(Photo- Rahul Gupta/ aajtak.in) (Photo- Rahul Gupta/ aajtak.in)
Priyank Dwivedi
  • नई दिल्ली,
  • 11 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 1:23 PM IST

तारीखः 22 मार्च 2021. दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया मीडिया के सामने आए. उन्होंने नई शराब नीति का ऐलान किया. उन्होंने बताया कि नई शराब नीति लागू होने के बाद सरकार शराब के कारोबार से बाहर आ जाएगी. अब शराब की दुकानें निजी हाथों में चली जाएंगी. ये ऐलान करते समय दो बड़े तर्क दिए गए. पहला- माफिया राज खत्म होगा. दूसरा- सरकारी खजाना बढ़ेगा.

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इसके ठीक 240 दिन बाद यानी 17 नवंबर 2021 को नई शराब नीति यानी एक्साइज पॉलिसी 2021-22 लागू कर दी गई. चूंकि सरकार इस कारोबार से बाहर हो गई थी और सब निजी हाथों में चला गया था, इसलिए शराब की बिक्री बढ़ाने के लिए जबरदस्त डिस्काउंट दिए गए. शराब की जमकर बिक्री हुई. सरकारी खजाना भी बढ़ा. लेकिन इसका विरोध होने लगा. 

8 जुलाई 2022 को दिल्ली के मुख्य सचिव नरेश कुमार ने एलजी वीके सक्सेना को रिपोर्ट सौंपी. रिपोर्ट में सिसोदिया पर आरोप लगा कि उन्होंने गलत मकसद के साथ नई शराब नीति तैयार की. लाइसेंसधारी शराब कारोबारियों को अनुचित लाभ पहुंचाया. और तो और कथित तौर पर एलजी और कैबिनेट की मंजूरी लिए बगैर ही शराब नीति में अहम बदलाव भी कर दिए.

मुख्य सचिव की रिपोर्ट के आधार पर एलजी ने सीबीआई जांच की सिफारिश की. 17 अगस्त 2022 को सीबीआई ने केस दर्ज किया. इसमें मनीष सिसोदिया, तीन पूर्व सरकारी अफसर, 9 कारोबारी और दो कंपनियों को आरोपी बनाया गया.

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सीबीआई ने आरोपियों पर आपराधिक साजिश रचने और भ्रष्टाचार से जुड़ी धाराओं के तहत केस दर्ज किया है. इनमें तीन पूर्व सरकारी अफसर एजी कृष्णा (पूर्व एक्साइज कमिश्नर), आनंद तिवारी (पूर्व डिप्टी एक्साइज कमिश्नर) और पंकज भटनागर (पूर्व असिस्टेंट एक्साइज कमिश्नर) शामिल हैं.

इसमें अमित अरोड़ा (बडी रिटेल प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर), दिनेश अरोड़ा और अर्जुन पांडे को भी आरोपी बनाया गया है. इन तीनों को सिसोदिया का करीबी माना जाता है. आरोप है कि तीनों ने आरोपी सरकारी अफसरों की मदद से शराब कारोबारियों से पैसा इकट्ठा किया और उसे दूसरी जगह डायवर्ट किया.

सीबीआई ने पिछले साल नवंबर में इस मामले में पहली चार्जशीट दाखिल की. इसमें सात आरोपियों का नाम शामिल किया गया था. हालांकि, इसमें सिसोदिया का नाम नहीं था. 

इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी जांच कर रही है. ईडी भी इस मामले में अदालत में चार्जशीट दायर कर चुकी है. ईडी ने भी मनीष सिसोदिया का नाम नहीं लिखा. 

विवाद बढ़ने के बाद 28 जुलाई 2022 को सरकार ने नई शराब नीति रद्द कर फिर पुरानी नीति लागू करने का फैसला लिया. 31 जुलाई को कैबिनेट नोट में ये माना गया कि शराब की ज्यादा बिक्री के बावजूद सरकार की कमाई कम हुई, क्योंकि खुदरा और थोक कारोबारी शराब के धंधे से हट रहे थे. वित्त वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही में 1,485 करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिला, जो बजट अनुमान से करीब 38 फीसदी कम था.

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चूंकि, मनीष सिसोदिया के पास एक्साइज डिपार्टमेंट था, इसलिए उन्हें दिल्ली के इस कथित शराब घोटाले में मुख्य आरोपी बनाया गया. कई बार पूछताछ के बाद सीबीआई ने 26 फरवरी को सिसोदिया को गिरफ्तार कर लिया. 

सीबीआई ने आरोप लगाया कि आबकारी मंत्री होने के नाते सिसोदिया ने 'मनमाने' और 'एकतरफा' फैसले लिए, जिससे खजाने को भारी नुकसान पहुंचा और शराब कारोबारियों को फायदा हुआ.

मुख्य सचिव ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया कि कोविड का बहाना बनाकर मनमाने तरीके से 144.36 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस माफ कर दी. आरोप लगा कि एयरपोर्ट जोन में लाइसेंसधारियों को 30 करोड़ वापस कर दिए गए, जबकि ये रकम जब्त की जानी थी, क्योंकि एयरपोर्ट अथॉरिटी ने दुकान खोलने की अनुमति नहीं दी थी. 

इतना ही नहीं, एक्साइज डिपार्टमेंट ने बिना किसी मंजूरी के विदेशी शराब की कीमतें तय करने का फॉर्मूला संशोधित किया और बीयर पर 50 रुपये प्रति केस की एक्साइज ड्यूटी लेवी हटा दी. आरोप यहीं खत्म नहीं हुए. सिसोदिया पर ये भी आरोप लगा कि उन्होंने बिना किसी मंजूरी के एक्साइज ड्यूटी को दो बार- 1 अप्रैल से 31 मई और 1 जून से 31 जुलाई तक बढ़ा दिया.

अब तक की जांच में क्या-क्या हुआ?

- 17 अगस्त को सीबीआई ने केस दर्ज किया और दो दिन बाद ही 19 तारीख को मनीष सिसोदिया के घर और दफ्तर समेत सात राज्यों के 31 ठिकानों पर छापेमारी की. 30 तारीख को सीबीआई ने सिसोदिया के बैंक लॉकर भी खंगाले. सिसोदिया ने दावा किया कि सीबीआई को कुछ नहीं मिला.

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- 6 सितंबर 2022 को ईडी ने 40 से ज्यादा ठिकानों पर छापा मारा. ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ये छापेमारी की. 16 सितंबर को ईडी ने फिर दिल्ली-एनसीआर के अलावा आंध्र प्रदेश और कर्नाटक समेत कई राज्यों के 40 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी की.

- 27 सितंबर को सीबीआई ने विजय नायर (ओनली मच लाउडर के पूर्व सीईओ) को गिरफ्तार किया. अगले ही दिन ईडी ने भी समीर महेंद्रू (इंडोस्पिरिट ग्रुप के एमडी) को गिरफ्तार कर लिया.

- सीबीआई की एफआईआर के मुताबिक, मनीष सिसोदिया के कथित करीबी अर्जुन पांडे ने शराब कारोबारी समीर महेंद्रू से 2 से 4 करोड़ रुपये लिए थे. ये रकम विजय नायर की ओर से ली गई थी. विजय नायर कुछ साल तक आम आदमी पार्टी के कम्युनिकेशन इंचार्ज भी रहे हैं.

- 10 अक्टूबर को सीबीआई ने अभिषेक बोइनपल्ली को गिरफ्तार किया. अभिषेक बोइनपल्ली अरुण रामचंद्र पिल्लई का पार्टनर है. 17 अक्टूबर को सीबीआई हेडक्वार्टर में मनीष सिसोदिया से 9 घंटे तक पूछताछ हुई. 

- 8 नवंबर को सीबीआई ने अदालत में बताया कि दिनेश अरोड़ा सरकारी गवाह बनने को तैयार है. दिनेश अरोड़ा को सिसोदिया का करीबी माना जाता है.

- 10 नवंबर को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अरबिंदो फार्मा के डायरेक्टर शरत रेड्डी और पेरनोड रिकार्ड के एक्जीक्यूटिव बिनय बाबू को गिरफ्तार किया. 14 तारीख को ईडी ने विजय नायर और अभिषेक बोइनपल्ली को अरेस्ट किया. 30 नवंबर को सीबीआई ने बडी रिटेल के डायरेक्टर अमित अरोड़ा को गिरफ्तार किया. अमित अरोड़ा को भी सिसोदिया का करीबी माना जाता है.

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- 1 दिसंबर को ईडी ने अदालत में दावा किया कि शराब कारोबारियों, बड़े सरकारी अफसरों, मनीष सिसोदिया और दूसरे संदिग्धों ने कई बार अपने फोन बदले. ईडी ने बताया कि 1.38 करोड़ के डिवाइस यूज किए गए और डिस्ट्रॉय किए गए.

- इस साल 14 जनवरी को सीबीआई ने दिल्ली सचिवालय में सिसोदिया के दफ्तर में तलाशी ली. 26 जनवरी को ईडी ने शराब घोटाले से जुड़े लोगों और कंपनियों की 76.54 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर ली.

- 3 फरवरी को ईडी ने चार्जशीट दाखिल की. इसमें आरोप लगाया कि रद्द हुई शराब नीति के जरिए 100 करोड़ की 'रिश्वत' ली गई थी और आम आदमी पार्टी ने इस रकम का कुछ हिस्सा गोवा विधानसभा चुनाव में प्रचार के लिए किया.

- 26 फरवरी को सीबीआई ने मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार कर लिया. सिसोदिया 20 मार्च तक सीबीआई की हिरासत में है. इस दौरान 9 मार्च को ईडी ने भी सिसोदिया को गिरफ्तार कर लिया. सिसोदिया की जमानत अर्जी पर 21 मार्च को सुनवाई होगी.

तेलंगाना के सीएम की बेटी कैसे फंसीं?

दिल्ली के शराब घोटाले में तेलंगाना के सीएम के. चंद्रशेखर राव की बेटी के. कविता भी फंस गईं हैं. कविता भारत राष्ट्र समिति की एमएलसी भी हैं. 

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पिछले साल दिसंबर में ईडी ने अमित अरोड़ा की रिमांड रिपोर्ट में बताया था कि आम आदमी पार्टी के नेताओं की ओर से विजय नायर और दूसरे लोगों को 'साउथ ग्रुप' ने 100 करोड़ की रिश्वत दी थी. 

11 दिसंबर को सीबीआई की टीम ने हैदराबाद में कविता के घर पर उनसे पूछताछ की. 22 दिसंबर को ईडी ने चार्जशीट में दावा किया कि कविता के मालिकाना हक वाले ग्रुप ने विजय नायर को 100 करोड़ की रिश्वत दी थी.

फरवरी में सीबीआई ने सीए बुचीबाबू गोरंतला को गिरफ्तार किया. माना जाता है कि गोरंतला कविता का अकाउंट संभाला करता था. ईडी ने 7 मार्च को हैदराबाद के कारोबारी अरुण रामचंद्रन पिल्लई को गिरफ्तार किया. पिल्लई ने ईडी को पूछताछ में बताया कि कविता और आम आदमी पार्टी के बीच एक समझौता हुआ था. इसके तहत 100 करोड़ का लेन-देने हुआ, जिससे कविता की कंपनी इंडोस्पिरिट्स को दिल्ली के शराब कारोबार में एंट्री मिली.

पिल्लई ने बताया कि एक मीटिंग हुई थी, जिसमें वो, कविता, विजय नायर और दिनेश अरोड़ा मौजूद थे. इस मीटिंग में दी गई रिश्वत की वसूली पर चर्चा हुई थी.

साउथ ग्रुप मतलब क्या?

साउथ ग्रुप असल में दक्षिण के राजनेताओं, कारोबारियों और नौकरशाहों का एक ग्रुप है. इसमें सरथ रेड्डी, एम. श्रीनिवासुलु रेड्डी, राघव मुगन्टा और के. कविता शामिल थे. इस ग्रुप का प्रतिनिधित्व अरुण पिल्लई, अभिषेक बोइनपल्ली और बुच्ची बाबू ने किया था. साउथ ग्रुप ने विजय नायर (आम आदमी पार्टी के लिए) 100 करोड़ रुपये एडवांस में दिए थे.

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