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कानून वापसी की मांग पर अड़े किसान, कृषि राज्य मंत्री बोले- अभी सुधारों की शुरुआत है

किसानों के कल की ट्रैक्टर वाले शक्ति प्रदर्शन के बाद आज की बैठक पर नजर है. अब तक की बातचीत में दोनों अपने-अपने रूख पर अड़े हैं. ना सरकार मानने को तैयार है ना किसान.

किसानों के समर्थन में प्रदर्शन करते लोग (फोटो-PTI) किसानों के समर्थन में प्रदर्शन करते लोग (फोटो-PTI)
हिमांशु मिश्रा/अशोक सिंघल
  • नई दिल्ली,
  • 08 जनवरी 2021,
  • अपडेटेड 12:18 PM IST
  • सरकार और किसानों के बीच आज होगी बातचीत
  • तीनों कृषि कानूनों की वापसी की मांग पर अड़े हैं किसान

आज फिर आंदोलनकारी किसान और सरकार बातचीत के टेबल पर आमने-सामने होंगे. आठवें दौर की ये वार्ता दोपहर 2 बजे दिल्ली के विज्ञान भवन में होगी. किसानों के कल की ट्रैक्टर वाले शक्ति प्रदर्शन के बाद आज की बैठक पर नजर है. अब तक की बातचीत में दोनों अपने-अपने रूख पर अड़े हैं. ना सरकार मानने को तैयार है ना किसान.

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भारतीय किसान यूनियन सिद्धूपुर पंजाब के स्टेट अध्यक्ष जगजीत सिंह ढल्लेवाल का कहना है कि हम उम्मीद लेकर जा रहे हैं कि सरकार कुछ ना कुछ जरूर करेगी, क्योंकि काफी लंबा हो गया है और जो कल हमारी ट्रैक्टर परेड थी, वह भी काफी  सफल रही है. सरकार को समझ में आ गया होगा कि किसान एकजुट है और पीछे हटने वाले नहीं है. 

वहीं, राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के यूथ विंग के अध्यक्ष अभिमन्यु का कहना है कि सरकार को तीनों कानून तो वापस लेने ही होंगे और एमएसपी गारंटी कानून बनाना पड़ेगा. चाहे अब बनाएं या बाद में बनाएं. अगर सरकार जल्दी कोई फैसला नहीं लेती तो यह आन्दोंलन और तेज होगा. 

किसान नेता अभिमन्यु ने कहा कि कल सभी ने रिहर्सल देख ली होगी और यह आंदोलन सिर्फ कुछ लोगों का नहीं पूरे देश का आंदोलन है. आज की जो मीटिंग है, हम सकारात्मक सोच के साथ जाएंगे. पहले भी हम खुले मन से और सकारात्मक सोच से आए थे, लेकिन सरकार टालमटोल कर रही है.

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किसानों से बातचीत से पहले केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि हमें उम्मीद है कि आज की बातचीत में कोई न कोई हल निकलेगा और किसान सरकार की बात समझेंगे कि किसानों के हित में यह कानून बनाया गया है और सभी किसानों के लिए है. 

केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि अगर पहली बातचीत पर किसान जाएंगे तो उस समय कानून में परिवर्तन की बात कही गई थी, कानून वापस लेने की बात नहीं थी, अगर उस हिसाब से सोचेंगे तो हल जरूर निकलेगा. अभी तो कृषि सुधारों की शुरुआत हुई है. कृषि सुधार जारी रहेंगे.

 

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