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दिल्ली में कैसे अवैध एंट्री, किस तरह बनाते थे फर्जी दस्तावेज... बांग्लादेशी सिंडिकेट की पूरी कहानी

सीलमपुर, जाफराबाद, सेंट्रल दिल्ली के वे इलाके जहां अवैध बांग्लादेशियों के छिपे होने की आशंका थी वहां दिल्ली पुलिस ने फोकस किया. इसके अलावा बाहरी दिल्ली और साउथ वेस्ट दिल्ली का काफी बड़ा इलाका भी पुलिस की कार्रवाई में शामिल था. अब तक के आंकड़ों की अगर बात करें तो पिछले एक महीने में दिल्ली पुलिस ने करीब 500 संदिग्धों के दस्तावेजों की जांच की है. जांच के दौरान अब तक 100 अवैध बंगलादेशी गिरफ्तार किए गए हैं.

 दिल्ली पुलिस ने भारत में अवैध तरीके से बांग्लादेशियों की घुसपैठ कराने वाले गिरोह को गिरफ्तार किया दिल्ली पुलिस ने भारत में अवैध तरीके से बांग्लादेशियों की घुसपैठ कराने वाले गिरोह को गिरफ्तार किया
हिमांशु मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 08 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 2:37 PM IST

दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में रहने वाले मोहम्मद नौशाद अनवर शाहिद और उनके कुछ साथियों ने पिछले साल 10 दिसंबर को दिल्ली पुलिस को एक चिट्ठी लिखकर अवैध तरीके से रहने वाले बांग्लादेशियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी. अनवर शाहिद की चिट्ठी का संज्ञान लेते हुए दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर वीके सक्सेना ने इसे फौरन ही अपनी नोटिंग के साथ दिल्ली पुलिस को फॉरवर्ड कर दिया था. संदेश साफ था की अवैध बांग्लादेशी जो दिल्ली में रह रहे हैं उनके खिलाफ तुरंत और सख्त एक्शन लिया जाए. उन्हें जल्द से जल्द पकड़कर डिपोर्ट किया जाए.

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दिल्ली पुलिस ने भी वक्त नहीं लगाया और सबसे पहले उस बांग्लादेशी सेल को एक्टिव किया जो सालों से दिल्ली में काम कर रहा है. इसके अलावा हर जिले की पुलिस ने एक स्पेशल ड्राइव अपने इलाके में शुरू की. खासतौर से दक्षिण पूर्व दिल्ली, दक्षिण पश्चिम दिल्ली, शाहदरा और उत्तर पूर्व दिल्ली, सेंट्रल और आउटर दिल्ली में शुरू की गई. पुलिस टीम को संदेश साफ था, जिस पर भी शक हो उसे रोको उसके दस्तावेजों की जांच करो और अगर कुछ संदिग्ध लगे तो कार्रवाई करो. 

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सीलमपुर, जाफराबाद, सेंट्रल दिल्ली के वे इलाके जहां अवैध बांग्लादेशियों के छिपे होने की आशंका थी वहां दिल्ली पुलिस ने फोकस किया. इसके अलावा बाहरी दिल्ली और साउथ वेस्ट दिल्ली का काफी बड़ा इलाका भी पुलिस की कार्रवाई में शामिल था. अब तक के आंकड़ों की अगर बात करें तो पिछले एक महीने में दिल्ली पुलिस ने करीब 500 संदिग्धों के दस्तावेजों की जांच की है. जांच के दौरान अब तक 100 अवैध बंगलादेशी गिरफ्तार किए गए हैं. दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें फौरन एफआरआरओ के हवाले कर दिया है, जहां से इनमें से ज्यादातर को या तो डिपोर्ट कर दिया गया है या डिपोर्ट की कार्रवाई चल रही है. 

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दिल्ली में घुसपैठ कराने वाले तीन सिंडिकेट का भंडाफोड़

दिल्ली पुलिस का सर्च अभियान लगातार जारी है. हर दिन दिल्ली पुलिस अवैध-बांग्लादेशियों को पकड़ रही है. इस धर पकड़ के दौरान दिल्ली पुलिस ने तीन ऐसे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है जो अवैध बांग्लादेशियों को भारत में एंट्री दिलाने और उन्हें यहां सेटल करने में शामिल रहते थे. इसमें एक नेटवर्क ऐसा है जिसके तार सीधा बांग्लादेश से जुड़े थे. पुलिस ने इस गैंग के चार लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें दो बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल हैं.

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पकड़ गए अवैध बांग्लादेशियों में अनीश शेख नाम का एक आरोपी भी है, वह 15 साल पहले अवैध रूप से घुसपैठ करके भारत में आया था और दिल्ली में बस गया था. वह घुसपैठियों को दिल्ली में बसाने के काम में जुटा हुआ था. पुलिस ने अनीश की पत्नी सपना और इसके साथी अमीनुर इस्लाम को भी गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक ये लोग आशीष मेहरा के साथ इस सिंडिकेट को चला रहा थे. यह सिंडिकेट दो तरीके से काम करता था. इसका एक तार बांग्लादेश में जुड़ा था. सिंडीकेट के बांग्लादेश का मॉड्यूल वहां पर उन लोगों से बात करता जो अवैध तरीके से भारत आना चाहते हैं. फिर उनसे अपना कमीशन लेकर उन्हें बॉर्डर पार कराता. 

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मॉड्यूल 1

पुलिस के मुताबिक इस सिंडिकेट का पहला मॉड्यूल बांग्लादेश के अंदर काम करता था. जो बांग्लादेश के दुर्गापुर से भारत के बाघमारा बॉर्डर के जरिए जंगल के अंदर डंकी रूट से बांग्लादेशियों को मेघालय में घुसपैठ करवाता था. इस मॉड्यूल का सरगना अनीश शेख था. अगले पड़ाव तक पहुंचाने के लिए ये लोग ऑटो रिक्शा या कोई छोटी गाड़ी, बाइक या फिर कुछ दूर पैदल चलकर बाघमारा पहुंच जाया करते थे.

मॉड्यूल 2

घुसपैठिए बाघमारा बॉर्डर से अंदर आ जाते थे तो उन्हें मिनी बस के जरिए असम के कृष्णाई तक ले जाया जाता था. ये पूरा रास्ता करीब डेढ़ सौ किलोमीटर लंबा है. इस मॉड्यूल की कमान अमीनुर इस्लाम संभालता था.

मॉड्यूल 3

कृष्णाय पहुंचने के बाद इन घुसपैठियों को ट्रेन के जरिए या तो कोलकाता ले जाया जाता था या फिर बस के जरिए बोंगाईगांव ले जाया जाता था. बोंगाईगांव का रास्ता करीब 75 किलोमीटर का था, जबकि कोलकाता का 100 किलोमीटर का. इस मॉड्यूल की कमान भी अमीनुर इस्लाम ही संभालता था. 

मॉड्यूल 4

इस मॉड्यूल की कमान अनीश शेख की पत्नी सपना संभालती थी. कोलकाता और बोंगाईगांव पहुंचे बांग्लादेशी घुसपैठियों को सपना ट्रेन के जरिए दिल्ली लेकर आती थी. एक बार जब घुसपैठिये दिल्ली पहुंच जाते तो यहां आशीष मेहरा का काम शुरू हो जाता. वह सबसे पहले घुसपैठियों के अवैध दस्तावेज बनवाता ताकि उन्हें दिल्ली में काम और रहने के लिए कोई जगह दिलाई जा सके.

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कैसे बनते थे फर्जी दस्तावेज

अवैध बांग्लादेशियों का फर्जी दस्तावेज बनवाने में अनीश की मदद मनमोहन और आशीष मेहरा करते. पुलिस ने पकड़े गए अवैध बांग्लादेशियों की निशानदेही पर 6 आधार कार्ड और 5 पैन कार्ड बरामद किए हैं. साथ ही उनके बैंक अकाउंट की ट्रांजैक्शन डिटेल भी जांची जा रही है.

कैसे पकड़े गए तीन सिंडिकेट

सबसे पहले दिल्ली की साउथ वेस्ट डिस्ट्रिक्ट पुलिस ने सोनाली शेख नाम की एक महिला को पकड़ा और उसने पूछताछ में जो जानकारियां साझा कीं, उसके आधार पर अवैध बांग्लादेशियों को भारत लाकर बसाने वाले तीन सिंडिकेटका खुलासा हुआ.

घुसपैठ की कहानी अवैध बांग्लादेशियों की जुबानी

सोनाली शेख बांग्लादेश की रहने वाली है. करीब 15 साल पहले जंगली इलाके से बॉर्डर करके वह भारत आई, फिर ट्रेन से मुंबई पहुंची. सोनाली शेख के साथ उसका पूरा परिवार अवैध तरीके से भारत में दाखिल हुआ था. मुंबई पहुंचने के बाद सोनाली शेख घरों में नौकरानी का काम करने लगी. इसी समय सोनाली शेख के पिता की एक एक्सीडेंट में मौत हो गई, जिसके बाद सोनाली की मां और भाई वापस बांग्लादेश चले गए. पुलिस के मुताबिक कुछ दिनों पहले सोनाली काम की तलाश में दिल्ली आई थी और इसी सिलसिले में सपना से उसकी बातचीत हुई थी.

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दिल्ली पुलिस को एक हाउस मेट के जरिए सोनाली शेख के बारे में पता चला, जिसके बाद उसके दस्तावेजों की जांच हुई. उसके मोबाइल से कुछ ऐसे सबूत मिले जिससे साबित हुआ कि वह बांग्लादेश की रहले वाली है. फिर बांग्लादेश से दिल्ली पुलिस ने उसके ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स मंगवाए गए और FRRO (Foreigners Regional Registration Office) यूनिट की मदद से सोनाली को वापस बांग्लादेश डिपोर्ट कर दिया. इसी तरह आरके पुरम पुलिस ने फिरोज मुल्ला नाम के शख्स को पकड़ा और डिपोर्ट कर दिया. फिरोज को 2002 में पकड़कर डिपोर्ट किया गया था, लेकिन एक बार फिर वह जंगल के रास्ते भारत की सीमा में दाखिल होने में सफल रहा और फिर ट्रेन से दिल्ली आ गया. दिल्ली पुलिस ने इस बार जितने अवैध बांग्लादेशियों की पहचान की है, उनमें से कई ऐसे हैं जो डिपोर्ट होने के बाद दोबारा घुसपैठ करके भारत आए हैं. 

दिल्ली पुलिस ने रंगपुरी इलाके की झुग्गी में रहने वाले जहांगीर नाम के एक बांग्लादेशी को पकड़ा और उसे डिपोर्ट किया. वह अपने 6 बच्चों और पत्नी के साथ रहता था. पूछताछ में जहांगीर ने बताया कि वह पहले जंगल के रास्ते कोलकाता पहुंचा था और वहां कुछ दिन काम करके वापस बांग्लादेश चला गया. फिर वहां जाकर वह अपने 6 बच्चों और पत्नी के साथ अवैध तरीके से भारत की सीमा में दाखिल हुआ और फिर दिल्ली आ गया. वह यहां कबाड़ी का काम करने लगा. जिसने जहांगीर को किराए पर घर दिया था, उसका कहना है कि उसकी भाषा से बिल्कुल भी अंदाजा नहीं हुआ कि वह बांग्लादेश या बंगाल का रहने वाला है. वह दिल्ली की लोकल भाषा बोलता है, हालांकि उसके पास कोई भी दस्तावेज नहीं था.

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दिल्ली में घूमते मिले थे मां-बेटा

सर्च ऑपरेशन के दौरान दिल्ली पुलिस ने साउथ कैंपस इलाके से एक मां-बेटे को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो पता चला कि दोनों बांग्लादेश के रहने वाले हैं और कई साल से दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे हैं. दोनों ने बताया कि वे 2020 में पश्चिम बंगाल बॉर्डर के माध्यम से भारत में आए थे. बेटा नईम और मां नजमा दिल्ली के कटवारिया सराय में रह रहे थे. नजमा ने बताया कि उसका बेटा गरीबी की वजह से स्कूल नहीं जा पाया था. इसके बाद 2020 में दोनों भारत आ गए. नजमा यहां घरों में नौकरानी का काम करती है.

अवैध बांग्लादेशियों को कैसे किया जाता है डिपोर्ट?

जब भी पुलिस किसी बांग्लादेशी को संदेह के आधार पर पकड़ती है तो सबसे पहले उसके दस्तावेजों की जांच होती है. जब वह फर्जी पाया जाता है तो उसका बांग्लादेश का पता निकला जाता है. जब बांग्लादेश के पते की पुष्टि हो जाती है, और यह साफ हो जाता है कि यह व्यक्ति बांग्लादेश का रहने वाला है तो उसे FRRO (Foreigners Regional Registration Office) के हवाले कर दिया जाता है. यहां पर इन्हें आईबी के अंडर डिटेंशन सेंटर में रहना होता है. फिर इन्हें ट्रेन में बैठाकर बांग्लादेश डिपोर्ट कर दिया जाता है.

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