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'चुनौतियों के नए समाधान खोजने के लिए प्रतिबद्ध है BRICS...', रूस के कजान रवाना हुए पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने इस यात्रा को लेकर कहा कि "भारत ब्रिक्स मंच के जरिए अलग-अलग ग्लोबल चुनौतियों पर सामूहिक रूप से काम करने के लिए प्रतिबद्ध है." यह मंच, जो अब और अधिक समावेशी हो चुका है, आर्थिक सहयोग, जलवायु परिवर्तन, और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर नए समाधान खोजने के लिए प्रतिबद्ध है.'

Prime Minister Narendra Modi. (File Photo) Prime Minister Narendra Modi. (File Photo)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 22 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 8:05 AM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार (आज) को महत्वपूर्ण दो दिवसीय यात्रा पर रूस के कज़ान के लिए रवाना हो रहे हैं. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के विशेष आमंत्रण पर पीएम मोदी कजान पहुंच रहे हैं और इस दौरान वह 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे. इस यात्रा के दौरान न केवल वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होगी, बल्कि यह भारत और रूस के बीच सदियों पुराने रिश्तों को और मजबूत बनाने का अवसर भी है.

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क्या बोले पीएम मोदी?
प्रधानमंत्री मोदी ने इस यात्रा को लेकर कहा कि "भारत ब्रिक्स मंच के जरिए अलग-अलग ग्लोबल चुनौतियों पर सामूहिक रूप से काम करने के लिए प्रतिबद्ध है." यह मंच, जो अब और अधिक समावेशी हो चुका है, आर्थिक सहयोग, जलवायु परिवर्तन, और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर नए समाधान खोजने के लिए प्रतिबद्ध है.' पीएम मोदी ने कहा कि, उनका मानना है कि ब्रिक्स जैसे मंच भारत को वैश्विक समस्याओं को हल करने में सक्रिय भूमिका निभाने का मौका देते हैं.

पिछले साल ब्रिक्स में नए सदस्यों के जुड़ने से यह मंच और भी समृद्ध हो गया है. ऐसे समय में जब दुनिया कई चुनौतियों से जूझ रही है, ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग और संवाद को और अधिक प्रासंगिक बना रहा है. कज़ान की यह यात्रा जुलाई 2024 में मॉस्को में हुए वार्षिक शिखर सम्मेलन की कड़ी को आगे बढ़ाएगी. प्रधानमंत्री के अनुसार, "यह दौरा भारत और रूस के बीच विशेष और रणनीतिक साझेदारी को और गहराई देगा, जो कई क्षेत्रों में सहयोग का प्रतीक है." प्रधानमंत्री ब्रिक्स के अन्य देशों के नेताओं से मिलने के लिए भी उत्सुक हैं. उनका मानना है कि यह मुलाकातें न केवल आपसी रिश्तों को मजबूत करेंगी, बल्कि वैश्विक विकास के लिए नए रास्ते भी खोलेंगी.

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BRICS के सदस्य देशों के साथ इन्हें मिला निमंत्रण
स (मेजबान), ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, ईरान, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, यूएई, अल्जीरिया, आर्मेनिया, अजरबैजान, बहरीन, बेलारूस, बोलीविया, कांगो, क्यूबा, इंडोनेशिया, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, लाओस, मलेशिया, मॉरिटानिया, मेक्सिको, मंगोलिया, मोरक्को, निकारागुआ, श्रीलंका, ताजिकिस्तान, थाईलैंड, टर्की, तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान, वेनेजुएला, वियतनाम, सर्बिया, फिलिस्तीन.

2006 में बना था ब्रिक्स
क्स की स्थापना सितंबर 2006 में हुई थी और इसमें मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत और चीन (ब्रिक) शामिल थे. सितंबर 2010 में दक्षिण अफ्रीका को पूर्ण सदस्य के रूप में स्वीकार किए जाने के बाद इसका नाम बदलकर ‘ब्रिक्स’ कर दिया गया.ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ ब्रिक्स वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है और यह वर्षों से वैश्विक आर्थिक विकास का एक प्रमुख प्रेरक रहा है

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