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डिजिटल अरेस्ट में ED की चार्जशीट, पिग-बुचरिंग स्कैम में 159 करोड़ की धोखाधड़ी

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को एक बयान जारी कर कहा कि उसने पिछले महीने बेंगलुरु में एक विशेष पीएमएलए कोर्ट के समक्ष आठ आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत (prosecution complaint) दर्ज की थी, जिन्होंने कथित तौर पर 'फर्जी' आईपीओ आवंटन के माध्यम से लोगों को 'लालच' दिया था.

(सांकेतिक फोटो) (सांकेतिक फोटो)
अरविंद ओझा
  • बेंगलुरु,
  • 03 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 2:14 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अपने कार्यक्रम 'मन की बात' में 'डिजिटल अरेस्ट' के खतरों से सावधान रहने की अपील की थी. इसके बाद जांच एजेंसियों ने कहा कि वे साइबर क्राइम की इस कैटेगरी के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं. अब ईडी ने ऐसे एक मामले में चार्जशीट दाखिल की है और I4C ने एक नई एडवाइजरी जारी की है.

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को एक बयान जारी कर कहा कि उसने पिछले महीने बेंगलुरु में एक विशेष पीएमएलए कोर्ट के समक्ष आठ आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत (prosecution complaint) दर्ज की थी, जिन्होंने कथित तौर पर 'फर्जी' आईपीओ आवंटन के माध्यम से लोगों को 'लालच' दिया था.

'पिग-बुचरिंग' स्कैम

ईडी ने कहा, 'जांच में पाया गया है कि भारत में साइबर घोटालों का एक बड़ा नेटवर्क है, जिसमें फर्जी शेयर बाजार निवेश और डिजिटल अरेस्ट की साजिशें शामिल हैं, जिन्हें मुख्य रूप से फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के माध्यम से अंजाम दिया जाता है.'

प्रवर्तन निदेशालय ने कहा, 'शेयर बाजार निवेश घोटाले को 'पिग-बुचरिंग' स्कैम के नाम से जाना जाता है. इसमें स्कैमर्स पीड़ितों को उच्च रिटर्न के वादे के साथ लुभाते हैं, नकली वेबसाइटों और भ्रामक व्हाट्सएप ग्रुप्स का इस्तेमाल करते हैं जो बिल्कुल असली और प्रतिष्ठित वित्तीय फर्मों से जुड़े हुए प्रतीत होते हैं.'

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I4C ने जारी की एडवाइजरी

ईडी ने कहा कि इस घोटाले के कुछ पीड़ितों को कस्टम और सीबीआई द्वारा डिजिटल अरेस्ट की आड़ में 'फंसाया' गया और नकली 'फंड रेगुलराइजेशन प्रोसेस' के तहत विभिन्न शेल या डमी कंपनियों में भारी धनराशि ट्रांसफर की गई.

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने रविवार को एक एडवाइजरी जारी कर लोगों से 'डिजिटल अरेस्ट से सावधान रहने' के लिए कहा. एडवाइजरी में लोगों से यह कहा गया कि 'वीडियो कॉल करने वाले लोग पुलिस, सीबीआई, कस्टम अधिकारी या जज नहीं हैं'.

ईडी ने आठ लोगों को किया गिरफ्तार

ईडी ने कहा कि उसने कई पुलिस एफआईआर को स्टडी करने के बाद इस अपराध में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया और आठ लोगों को गिरफ्तार किया, जिनका नाम 10 अक्टूबर को दायर चार्जशीट में भी आरोपी के रूप में शामिल था. ये नाम हैं- चरण राज सी, किरण एस के, शाही कुमार एम, सचिन एम हैं, तमिलारासन, प्रकाश आर, अजित आर और अरविंदन, साथ ही 24 संबंधित कंपनियां.

इस्तेमाल किए सैकडों सिमकार्ड

गिरफ्तार सभी लोग फिलहाल न्यायिक हिरासत के तहत जेल में बंद हैं. इस साइबर क्राइम मामले में 159 करोड़ रुपये की अपराध आय शामिल है और अदालत ने 29 अक्टूबर को ईडी के आरोप पत्र पर संज्ञान लिया है. ईडी ने कहा कि धोखेबाजों ने इस धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए सैकड़ों सिम कार्ड इस्तेमाल किए जो या तो शेल कंपनियों के बैंक खातों से जुड़े थे या व्हाट्सएप अकाउंट बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए थे.

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