
यूपी के हाथरस जिले में हुई घटना के विरोध में तमिलनाडु के चेन्नई में आज बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ. डीएमके नेता और सांसद कनिमोझी के नेतृत्व में डीएमके ने शाम 5.30 बजे के करीब प्रदर्शन किया और राजभवन की ओर कैंडल मार्च निकाला. इस विरोध प्रदर्शन में तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता और डीएमके के प्रमुख एमके स्टालिन भी शामिल हुए और पहली मोमबत्ती उन्होंने ही जलाई.
डीएमके की महिला विंग ने शाम से ही प्रदर्शन स्थल पर जुटना शुरू कर दिया था. प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए भीड़ को काबू में रखने के लिए पुलिस के 500 जवानों को वहां तैनात किया गया था. प्रदर्शन के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों की धज्जियां उड़ती भी देखी गईं.
प्रदर्शन के दौरान डीएमके प्रमुख स्टालिन ने कहा कि हम तमिलनाडु में पोलाची घटना को नहीं भूल सकते, जहां अनुचित तरीके से महिलाओं के वीडियो लिए गए थे और उनकी शिकायतों को ठीक से हैंडल नहीं किया गया था क्योंकि एक आरोपी एआईडीएएमके से जुड़ा हुआ है.
हाथरस पर बात करते हुए स्टालिन ने कहा यूपी ब्लड लैंड बनती जा रही है. पीड़िता के लिए न्याय होना चाहिए. क्या सीबीआई जांच निष्पक्ष होगी? कोर्ट की देखरेख में जांच आगे बढ़नी चाहिए तभी न्याय हो पाएगा.
तमिलनाडु पर बात करते हुए स्टालिन ने कहा कि आने वाले चुनाव के बाद डीएमके सत्ता में होगी. हम विशेष अदालत का गठन करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि महिलाएं सुरक्षित हों और उन्हें जल्दी न्याय मिले.
इसके साथ ही स्टालिन ने विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए महिला विंग की सदस्यों को धन्यवाद दिया. स्टालिन ने कहा कि यहां सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया गया. इसके साथ ही उन्होंने लोगों से सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने का अनुरोध किया और प्रदर्शनकारियों से अनुरोध किया कि वे मोमबत्तियां अपने हाथ में लेते समय सावधान रहें.
डीएमके सांसद कनिमोझी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में एक क्रूर बलात्कार हुआ, जहां एक लड़की के साथ क्रूरता से बलात्कार किया गया. यूपी सरकार बलात्कार की घटना को छिपाने की कोशिश कर रही है. जब से बीजेपी सरकार सत्ता में आई है, महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं.
प्रदर्शन के बाद डीएमके ने राजभवन की ओर अपना कैंडल मार्च शुरू किया था लेकिन इस दौरान पुलिस ने उन्हें रोक लिया जिसके बाद तमाम कार्यकर्ताओं समेत सांसद कनिमोझी को हिरासत में ले लिया गया क्योंकि उन्हें चेन्नई में कैंडल मार्च की अनुमति नहीं दी गई थी.