
ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के चेयरपर्सन मीरवाइज उमर फारूक ने पांच वर्षों के बाद सोशल मीडिया पर वापसी की. उन्होंने अपने X हैंडल पर एक पोस्ट में कश्मीर मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. उन्होंने शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन (SCO Summit) में शामिल होने के लिए विदेश मंत्री एस जयशंकर के आगामी पाकिस्तान दौरे के संबंध में लिखा, 'कश्मीरियों की पीढ़ियां अनिश्चितता में डूब गईं. हम इसका अंत चाहते हैं, निष्पक्ष समाधान चाहते हैं. भारत और पाकिस्तान के पास आगामी एससीओ शिखर सम्मेलन में रिश्तों पर जमीं बर्फ पिघलाने और रचनात्मक रूप से जुड़ने का एक वास्तविक अवसर है. आशा है कि वे इस पर ध्यान देंगे.'
मीरवाइज उमर फारूक के इस पोस्ट पर जम्मू-कश्मीर भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री कविंदर गुप्ता ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. उन्होंने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के चेयरपर्सन को भारत की विदेश नीति पर टिप्पणी करने से परहेज करने की सलाह दी और कहा कि सरकार पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को संभालने में सक्षम है. न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कविंदर गुप्ता ने कहा, 'विदेश मंत्रालय और भारत सरकार पाकिस्तान के साथ अपनी नीति के बारे में सोचेंगे. मीरवाइज को भारत की विदेश नीति के बारे में सोचने या बात करने की जरूरत नहीं है, यह काम सरकार करेगी. उन्हें पाकिस्तान के बजाय भारत की चिंता करनी चाहिए.'
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उन्होंने कहा, 'किसी को ऐसी सलाह देने की जरूरत नहीं है. पाकिस्तान आतंकवाद का जन्मदाता है. वह आतंक की विचारधारा को बढ़ावा देता है, यह देश आतंकवाद के लिए ज्ञानदाता है. उन्होंने ही कश्मीरी पंडितों को बाहर निकाला, उन्होंने ही कश्मीर में ऐसा माहौल पैदा किया. मीरवाइज को पाकिस्तान के बारे में चिंता करने के बजाय घरेलू मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए.' ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस 26 राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक संगठनों का एक गठबंधन है. इसका गठन 9 मार्च, 1993 को कश्मीर की स्वतंत्रता मुद्दे को उठाने के लिए एक संयुक्त राजनीतिक मोर्चे के रूप में किया गया था. यह गठबंधन अलगावादी विचारों का समर्थक है.
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एससीओ शिखर सम्मेलन के लिए विदेश मंत्री एस जयशंकर की पाकिस्तान यात्रा से पहले मीरवाइज उमर फारूक के बयानों पर पूर्व राजनयिक केपी फैबियन ने भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा, 'हुर्रियत प्रमुख की अपील भारत सुनेगा या नहीं, इसमें संदेह है. इस प्रकार की सार्वजनिक अपीलों का कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला है, जम्मू-कश्मीर पर भारत की स्थिति बहुत स्पष्ट है. मुझे नहीं लगता कि बदलाव की कोई गुंजाइश होगी. विदेश मंत्री ने हाल ही में दोहराया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच एकमात्र अनसुलझा मुद्दा पीओके है. हमें पाकिस्तान के प्रति एक सक्रिय गतिशील नीति की भी आवश्यकता है. हमें उन पाकिस्तानियों को वीजा देना चाहिए जो भारत आना चाहते हैं, जो हम नहीं कर रहे हैं. पाकिस्तानी नागरिकों को आने देना चाहिए और उन्हें देखने देना चाहिए कि भारत ने 1947 के बाद से क्या प्रगति की है.'