
पेगासस के जरिए जासूसी मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. इस मामले में अगली सुनवाई दस दिन बाद होगी. केंद्र सरकार को अब इस मामले में जवाब देना होगा कि क्या पेगासस का इस्तेमाल किया गया? सॉफ्टवेयर की खरीद कैसे हुई?
सुनवाई के दौरान एसजी तुषार मेहता ने कहा कि याचिकाकर्ताओं के सवालों के जवाब के लिए सोमवार को जो हलफनामा दाखिल किया था वो पर्याप्त हैं. सभी याचिकाएं जो सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुई हैं वो जानना चाहते हैं कि सरकार ने पेगासस का प्रयोग किया है या नहीं? क्योंकि राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर पेगासस जैसे सॉफ्टवेयर का प्रयोग किया जाता है.
तुषार मेहता ने कहा कि सामान्यत: ऐसे सॉफ्टवेयर का प्रयोग सरकार नहीं करती. सरकार, कोर्ट से कुछ भी नहीं छिपा रही है. सरकार की ओर से तकनीकी विशेषज्ञों की समिति का गठन किया जा रहा है. पांच याचिकाओं में जिन मुद्दों पर मीडिया रिपोर्ट के आधार का जिक्र है, उस आधार पर इसे और सनसनीखेज नहीं बनाया जाना चाहिए.
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अगर कोई आतंकी संगठन है तो उसे ये अहसास होना चाहिए कि उनकी हर गतिविधि पर निगरानी रखी जा रही है. हमारे पास अदालत से छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है. हम अदालत द्वारा गठित समिति के सामने सब कुछ रखेंगे, लेकिन इसे हलफनामे के माध्यम से सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम याचिकाओं की मांग पर नहीं जा रहे. हम राष्ट्रीय सुरक्षा के मसले पर भी नहीं जा रहे हैं. यहां मसला यह है कि क्या पेगासस का प्रयोग व्यक्तिगत तौर पर किया गया है? हम आपकी नीयत पर पर शक नहीं कर रहे हैं. कोर्ट ने कहा कि हम आपको इस मामले में नोटिस जारी कर रहे हैं और सरकार तथा संबंधित एजेंसी इस पर जवाब दें.
तुषार मेहता ने कहा कि तमाम देशों में इस तरह के सॉफ्टवेयर का प्रयोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए किया जाता है. विशेषज्ञों की समिति सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट देगी. तुषार मेहता ने कहा कि अदालत एक बार समिति कि रिपोर्ट देख ले. इसके बाद चाहे जो निर्णय ले.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर सक्षम अधिकारी हमारे सामने हलफनामा दाखिल करें तो क्या दिक्कत है? हम नहीं चाहते कि आप राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित कुछ भी कहें. अब तो यही किया जा सकता है कि हम नोटिस जारी करें. तय नियमों और प्रक्रिया के तहत सक्षम प्राधिकारी को निर्णय लेने दें कि किस हद तक जानकारी का खुलासा किया जाना है और हम देखेंगे कि क्या किया जाना है.
इसके जवाब में सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि ये ऐसे मुद्दे हैं, जिन्हें तकनीकी विशेषज्ञों की समिति के समक्ष रखा जाएगा. भारत सरकार के लिए मैं यह नहीं कह रहा हूं कि मैं किसी को नहीं बताऊंगा, मैं इसे सार्वजनिक रूप से नहीं कहना चाहता हूं.
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कोर्ट ने कहा कि हम सिर्फ लोगों की निजता जासूसी की वैधता के पहलू पर नोटिस जारी करना चाहते हैं. आपको संवेदनशील बातें बताने की ज़रूरत नहीं है. इसके जवाब में सॉलिसीटर जनरल ने कहा, बेहतर यही होगा कि हमें विशेषज्ञ कमिटी के सामने बातें रखने दीजिए. कमिटी कोर्ट को रिपोर्ट देगी.
इस बीच नोटिस की प्रक्रिया को लेकर वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने सुझाव दिया तो कोर्ट ने कहा कि हमें न बताएं कि क्या करना है? हमें पता है. यानी अब सरकार को नोटिस का जवाब हफ्ते भर में देना है. सुप्रीम कोर्ट अब 10 दिन बाद इस मामले की सुनवाई करेगा.