
तुर्की में सोमवार को आए जबरदस्त भूकंप ने सबकुछ तबाह कर दिया है. मरने वालों की संख्या बढ़कर 16 हजार के पार चली गई है. तुर्की में ही करीब 13 हजार लोगों की मौत हो चुकी है.
इतना ही नहीं, पांच हजार से ज्यादा इमारतें ताश के पत्तों की तरह बह गई हैं. कड़ाके की सर्दी और मुसीबत बढ़ा रही है. चार दिन पहले तक जो लोग अपने घरों में रहा करते थे, वो अब या तो रिलीफ कैम्प में रह रहे हैं या फिर खुले आसमान के नीचे.
कई लोगों का दावा है कि इस मुश्किल की घड़ी में सरकार उनके साथ नहीं है. उनकी कोई मदद नहीं कर रहा है. उनके पास रहने को घर नहीं है. राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोगन ने कहा कि हम एक साल के अंदर सभी के लिए फिर से घर बना देंगे. उन्होंने बताया कि हाउसिंग एजेंसी ठेकेदार कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रही है, ताकि जल्द से जल्द मलबा हटाया जा सके और घर बनाए जा सकें.
भूकंप पर नजर रखने वाली अमेरिकी संस्था USGS का कहना है कि तुर्की में ज्यादातर लोग ऐसे घरों में रह रहे थे, जो भूकंप के लिहाज से काफी कमजोर थे. शायद यही वजह है कि भूकंप की वजह से साढ़े पांच हजार से ज्यादा इमारतें ढह गईं.
भूकंप के लिहाज से तुर्की काफी संवेदनशील है और इसी कारण वहां सभी लोगों को भूकंप इंश्योरेंस दिया जाता है. अगर भूकंप की वजह से घर या संपत्ति को नुकसान पहुंचता है तो इंश्योरेंस से उसका भुगतान किया जाता है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, तुर्की की बीमा कंपनियां 2.5 अरब डॉलर तक का भुगतान कर सकतीं हैं.
ऐसे में ये जानना जरूरी है कि क्या भारत में भी भूकंप से होने वाले नुकसान को इंश्योरेंस में कवर किया जाता है? लेकिन उससे पहले ये जानते हैं कि भूकंप के लिहाज से भारत कितना संवेदनशील है?
भारत में भूकंप का कितना खतरा?
नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का 59 फीसदी हिस्सा भूकंप के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है. यानी, यहां कभी भी भूकंप आ सकता है.
भूकंप के मानचित्र में भारत को चार जोन- V, IV, III और II में बांटा गया है. 59% में से 30% हिस्सा जोन-III, 18% हिस्सा जोन-IV और 11% हिस्सा जोन-V में आता है. बाकी जितना बचा वो सब जोन-II में पड़ता है.
जोन-V में कश्मीर घाटी का हिस्सा, हिमाचल प्रदेश का पश्चिमी इलाका, उत्तराखंड का पूर्वी इलाका, गुजरात में कच्छ का रण, उत्तरी बिहार का हिस्सा, भारत के सभी पूर्वोत्तर राज्य और अंडमान-निकोबार आता है.
जोन-IV में जम्मू-कश्मीर का बचा हुआ इलाका, लद्दा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बाकी हिस्से, हरियाणा का कुछ इलाका, पंजाब के हिस्से, दिल्ली, सिक्किम, उत्तर प्रदेश का उत्तरी इलाका, बिहार और पश्चिम बंगाल का कुछ इलाका, पश्चिमी तट के पास गुजरात का इलाका, महाराष्ट्र और पश्चिमी राजस्थान के कुछ इलाके आते हैं.
जोन-III में केरल, गोवा, लक्षद्वीप, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कुछ हिस्से, गुजरात और पंजाब के बचे हुए हिस्से, पश्चिम बंगाल का कुछ इलाका, पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्से, मध्य प्रदेश, बिहार के बचे हुए इलाके, झारखंड और छत्तीसगढ़ का उत्तरी हिस्सा, महाराष्ट्र, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और कर्नाटक के कुछ हिस्से आते हैं.
जोन-II में राजस्थान और हरियाणा के कुछ हिस्से, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ हिस्से, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु के बचे हुए इलाके शामिल हैं.
अब बात क्या भूकंप इंश्योरेंस में कवर होता है?
एक आम आदमी बड़ी मुश्किल से अपना घर बनाता है, लेकिन क्या हो कि तुर्की जैसा एक भूकंप आए और वो घर मलबे में बदल जाए. ऐसे में इस नुकसान की भरपाई के लिए इंश्योरेंस जरूरी है.
हमारे देश में कई बीमा कंपनियां होम इंश्योरेंस ऑफर करतीं हैं. होम इंश्योरेंस में भूकंप, बाढ़ या और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को भी कवर किया जाता है. होम इंश्योरेंस में सिर्फ घर ही नहीं, बल्कि घर में रखे सामान को भी कवर किया जाता है.
कुछ बीमा कंपनियां 10 करोड़ रुपये तक के होम स्ट्रक्चर और 50 लाख रुपये तक के सामान को कवर करती हैं. अगर भूकंप की वजह से घर को थोड़ा-बहुत नुकसान होता है या पूरी तरह मलबे में बदल जाता है तो फिर इसका भुगतान हो जाता है. इतना ही नहीं, सामान के लिए भी पैसा मिल जाता है. इसी तरह से कारोबारी संस्थान, जैसे- दुकान, स्टोर या मॉल वगैरह की भी इंश्योरेंस पॉलिसी में भूकंप को कवर किया जाता है.
इसी तरह से अगर भूकंप में आपकी गाड़ी भी डैमेज हो गई है तो वो भी इंश्योरेंस में कवर होती है. लेकिन उसके लिए ऑन डैमेज पॉलिसी लेनी पड़ती है, जो कार इंश्योरेंस का हिस्सा है. इसमें भूकंप, बाढ़ या दंगों से हुए नुकसान की भरपाई की जाती है.
क्यों जरूरी है ये?
घर बनाना हर व्यक्ति का सपना होता है. इंडिया हाउसिंग की रिपोर्ट बताती है कि भारत में ग्रामीण इलाकों में 95 फीसदी और शहर में 69 फीसदी लोगों अपने घर में रहते हैं.
शहरों में रहने वाली 37 फीसदी आबादी 40 लाख रुपये से ज्यादा की कीमत के घर में रहते हैं. वहीं, 29 फीसदी ऐसे हैं जिनके घर की कीमत 10 से 40 लाख रुपये के बीच है.
आंकड़े बताते हैं कि बीते 200 साल में भारत में 29 बड़े भूकंप आए हैं. आंकड़े ये भी बताते हैं कि भारत में जब भी भूकंप आया है, उसकी तीव्रता कहीं ज्यादा होती है.
मसलन, तुर्की में सोमवार को 7.8 तीव्रता का भूकंप आया था. ये बहुत खतरनाक होता है. भारत में इस तीव्रता के 11 भूकंप आ चुके हैं. इनमें से 6 बार तो भूकंप की तीव्रता 8 से भी ज्यादा थी.
इसके अलावा भूकंप एक ऐसी आपदा है जो बताकर नहीं आती. इसलिए भूकंप आने के बाद अपने घर को फिर से बना सकें, उसके लिए इंश्योरेंस जरूरी है.