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जॉर्ज सोरोस की फंडिंग पर ED का खुलासा... नियमों को ताक पर रखकर भारतीय NGO को दिए 25 करोड़ रुपये!

ईडी की जांच के मुताबिक, SEDF ने भारत की तीन कंपनियों- रूटब्रिज सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (RSPL), रूटब्रिज एकेडमी प्राइवेट लिमिटेड (RAPL) और असर सोशल इम्पैक्ट एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड (ASAR) को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और कंसल्टेंसी/सेवा शुल्क के नाम पर फंड उपलब्ध कराया.

जॉर्ज सोरोस की फंडिंग को लेकर एनजीओ जांच के घेरे में हैं (फाइल फोटो) जॉर्ज सोरोस की फंडिंग को लेकर एनजीओ जांच के घेरे में हैं (फाइल फोटो)
मुनीष पांडे
  • नई दिल्ली,
  • 02 अप्रैल 2025,
  • अपडेटेड 6:51 PM IST

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक जांच में खुलासा किया है कि अरबपति परोपकारी जॉर्ज सोरोस के सोरोस इकोनॉमिक डेवलपमेंट फंड (SEDF) ने भारत में एनजीओ सेक्टर को वित्तीय सहायता दी, जिससे विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नियमों के उल्लंघन की आशंका बढ़ गई है.

ईडी की जांच के मुताबिक, SEDF ने भारत की तीन कंपनियों- रूटब्रिज सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (RSPL), रूटब्रिज एकेडमी प्राइवेट लिमिटेड (RAPL) और असर सोशल इम्पैक्ट एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड (ASAR) को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और कंसल्टेंसी/सेवा शुल्क के नाम पर फंड उपलब्ध कराया.

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ये कंपनियां 2020-21 से 2023-24 के बीच लगभग 25 करोड़ रुपये प्राप्त कर चुकी हैं, जबकि सोरोस की ओपन सोसाइटी इंस्टीट्यूट (OSI) को गृह मंत्रालय ने मई 2016 से अवांछित गतिविधियों के लिए निगरानी में रखा है. इसके बाद से OSI को किसी भी FCRA-पंजीकृत संगठन को फंड भेजने के लिए सरकार की मंजूरी लेनी पड़ती है.

रूटब्रिज सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (RSPL) को 18.64 करोड़ रुपये

ईडी के अनुसार, RSPL को SEDF से 18.64 करोड़ रुपये अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय वरीयता शेयर (CCPS) के रूप में मिले. इन शेयरों का मूल्य 2.5-2.6 लाख रुपये प्रति शेयर था, जिसे ‘छूटित नकदी प्रवाह विधि’ (Discounted Cash Flow method) के आधार पर आंका गया था. अधिकारियों को संदेह है कि यह एक "कृत्रिम व्यवस्था" थी ताकि FCRA नियमों को दरकिनार किया जा सके, क्योंकि SEDF को सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना भारतीय एनजीओ को सीधे दान देने की अनुमति नहीं है.

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रूटब्रिज एकेडमी प्राइवेट लिमिटेड (RAPL) को 2.70 करोड़ रुपये

RAPL, जो 2019 में स्थापित हुई और गैर-लाभकारी संगठनों के लिए धन जुटाने की सेवाएं प्रदान करने का दावा करती है, को SEDF से 2.70 करोड़ रुपये "कमीशन एजेंट सेवाओं" के रूप में प्राप्त हुए. हालांकि, ईडी ने पाया कि RAPL ने वास्तव में कोई सेवाएं नहीं दीं, जिससे संदेह हुआ कि यह केवल धन को इधर-उधर करने के लिए बनाई गई थी ताकि FCRA नियमों का उल्लंघन किया जा सके.

असर सोशल इम्पैक्ट एडवाइजर्स (ASAR) को 2.91 करोड़ रुपये

2016 में स्थापित ASAR, जो सार्वजनिक जुड़ाव, अनुसंधान और एनजीओ के लिए क्षमता निर्माण में कार्यरत है, को SEDF से 2.91 करोड़ रुपये सेवा शुल्क के रूप में मिले. ईडी ने इसे भी एक प्रयास के रूप में चिह्नित किया है, जिसमें विदेशी फंड को सेवा शुल्क के नाम पर भारतीय एनजीओ तक पहुंचाने की कोशिश की गई.

मॉरीशस कनेक्शन: विदेशी कंपनियों के जरिए फंडिंग का खेल

ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि OSI से जुड़ी फंडिंग Aspada Investment Company (AIC) नामक एक मॉरीशस स्थित इकाई के माध्यम से भारत में भेजी गई थी. Aspada Investment Advisors Pvt Ltd (AIAPL), जिसे 2013 में बेंगलुरु में पंजीकृत किया गया था, SEDF के भारतीय निवेशों का प्रबंधन और सलाह देने का कार्य करती थी.

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SEDF ने भारत में 12 कंपनियों में 300 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया, और ईडी को संदेह है कि इन कंपनियों का उपयोग भारत में विदेशी धन पहुंचाने के लिए किया गया.

दिलचस्प बात यह है कि Lightrock Investment Advisors Private Limited, जो पहले Aspada Investment Advisors Pvt Ltd थी और जो SEDF के भारतीय निवेशों की आधिकारिक सलाहकार फर्म थी, उसे इन लेनदेन की कोई जानकारी नहीं थी. इससे संदेह और गहरा हो गया है कि ये फंडिंग गतिविधियां नियमों के उल्लंघन के तहत हो सकती हैं.

सोरोस फंडिंग पर विवाद और भाजपा की प्रतिक्रिया

जॉर्ज सोरोस एक विवादास्पद व्यक्ति रहे हैं और उन्हें दुनिया भर में राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित करने और सत्ता परिवर्तन में शामिल होने के आरोपों का सामना करना पड़ा है.

भारत में, उनका नाम अडानी समूह से जुड़े विवादों में भी सामने आया था. 2023 में, ऑर्गनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) ने आरोप लगाया था कि अडानी समूह ने मॉरीशस स्थित गुप्त फंडों के जरिए अपनी ही कंपनियों में निवेश किया. चूंकि सोरोस की ओपन सोसाइटी फाउंडेशन (OSF) OCCRP को फंडिंग देती है, इसलिए आरोप लगे कि उन्होंने ही अडानी के खिलाफ यह रिपोर्ट प्रकाशित करवाई.

बीजेपी ने सोरोस पर निशाना साधते हुए कहा कि वह भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने और अपने निजी एवं राजनीतिक हितों को साधने की कोशिश कर रहे हैं.

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