
भारतीय निर्वाचन आयोग ने हाल में बीजू जनता दल (बीजेडी), भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की. यह बैठक उन चिंताओं पर केंद्रित थी जो मतदाता सूची में गड़बड़ियों को लेकर उठी थीं. आयोग ने इन दलों को भरोसा दिलाया कि उनकी चिंताओं का समाधान आगामी तीन महीनों के भीतर कर दिया जाएगा.
बैठक के दौरान, आयोग ने तीन महीने की अवधि में मतदाता पहचान पत्र के यूनिक नंबर सिस्टम को लागू करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा की. यह नए सिस्टम से प्रत्येक मतदाता को एक विशिष्ट ईपीआईसी नंबर मिलेगा, जो आधार नंबर की तरह काम करेगा और मतदाता पहचान को और मजबूत करेगा.
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डुप्लिकेट वोटर का समाधान बूथ स्तर पर किया जाएगा
आयोग ने यह स्पष्ट किया कि मतदाताओं में डुप्लिकेट, स्थानांतरित और मृत मतदाताओं जैसे विषयों का समाधान बूथ स्तर पर ही किया जाएगा. इसके लिए प्रत्येक बूथ स्तर के अधिकारी और संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के साथ राजनीतिक दलों के बूथ एजेंट्स की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी.
कौन से मतदाता मतदान केंद्रों पर रजिस्टर हो सकते हैं?
बीजेपी के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में आयोग ने पुनः इस बात पर जोर दिया कि केवल 18 वर्ष से अधिक आयु वाले भारतीय नागरिक ही उन मतदान केंद्रों में पंजीकृत हो सकते हैं, जहां वे सामान्य निवासी होते हैं. मतदाता सूची का अद्यतनीकरण एक सहभागी प्रक्रिया है, जिसमें जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 24 के अंतर्गत अपील की स्थापित व्यवस्था का पालन किया जाएगा.
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फॉर्म 17सी पर चुनाव आयोग ने क्या कहा?
आयोग ने यह भी बताया कि राजनीतिक दल चुनाव प्रक्रिया के महत्वपूर्ण हितधारक होते हैं और उन्होंने लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए सभी राजनीतिक दलों के साथ समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया. यह भी ध्यान दिलाया गया कि निर्वाचन नियम, 1961 के अनुसार, सभी बूथों पर डाले गए मतों का रिकॉर्ड पहले से ही फॉर्म 17सी के अनुसार सभी उम्मीदवारों के मतदान एजेंटों को सौंप दिया जाता है.