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'हमने चुनाव आयोग को पूरा डेटा सौंपा...', इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर SC में SBI ने दायर किया हलफनामा

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा है कि, उन्होंने चुनाव आयोग को इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ा सारा डेटा दे दिया है. SBI ने कहा कि, हमारी ओर से अब कोई कोर-कसर बाकी नहीं है. हमने इसकी सारी डिटेल निर्वाचन आयोग को जैसा बताया गया था, वैसा ही सौंप दिया है.

एसबीआई ने चुनाव आयोग को सौंपी सारी जानकारी एसबीआई ने चुनाव आयोग को सौंपी सारी जानकारी
संजय शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 21 मार्च 2024,
  • अपडेटेड 6:58 PM IST

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा है कि, उन्होंने चुनाव आयोग को इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ा सारा डेटा दे दिया है. SBI ने कहा कि, हमारी ओर से अब कोई कोर-कसर बाकी नहीं है. हमने इसकी सारी डिटेल निर्वाचन आयोग को जैसा बताया गया था, वैसा ही सौंप दिया है.

क्या बोले SBI चेयरमैन?
SBI चेयरमैन दिनेश कुमार खारा ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा है कि हमने कोर्ट के आदेश के मुताबिक चुनावी बॉन्ड्स से जुड़ी सारी जानकारी तय समय सीमा यानी 21 मार्च शाम पांच बजे से पहले ही उपलब्ध करा दी है. इस जानकारी में बॉन्ड का अल्फा न्यूमेरिक नंबर यानी यूनीक नंबर, बॉन्ड की कीमत, खरीददार का नाम, भुगतान पाने वाली पार्टी का नाम, पार्टी के बैंक एकाउंट की आखिरी चार डिजिट नंबर, भुनाये गए बांड की क़ीमत/ नंबर शामिल है. साइबर सिक्युरिटी के मद्देनजर राजनीतिक पार्टी का पूरा बैंक खाता नंबर, पार्टी और बांड खरीदने वाले की KYC डिटेल्स सार्वजनिक नहीं की गई है.

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सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी फटकार
बता दें कि, इलेक्टोरल बॉन्ड पर सुप्रीम फैसले के एक महीने बाद भी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया इसका डेटा ठीक ढंग से जारी नहीं कर पाया था. कोर्ट को एसबीआई को फिर फटकार लगानी पड़ी थी. चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने पूछा था कि क्या बैंक को कोर्ट का फैसला समझ नहीं आया? चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने सोमवार की सुनवाई में बैंक और कंपनियों की तरफ से पेश वकीलों को निर्देश दिया कि एसबीआई को 21 मार्च को शाम 5 बजे से पहले बॉन्ड से जुड़े तमाम डेटा जारी करने के आदेश दिए. फैसले के मुताबिक, बैंक बॉन्ड का डेटा चुनाव आयोग को सौंपना था, जो आयोग की साइट पर पब्लिश किया जाएगा, ताकि उन्हें आसानी से एक्सेस किया जा सके. इस आदेश के बाद SBI ने गुरुवार को ये डाटा चुनाव आयोग 

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सुप्रीम कोर्ट किस फॉर्मेट में चाहता था डेटा? 
आम मतदाता डेटा को आसानी से समझ पाएं, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि, स्टेट बैंक यूनिक कोड के साथ सभी डेटा जारी करे. बैंक अगर यूनिक कोड के साथ डेटा जारी करता है, तो बैंक को दो पार्ट में डेटा जारी करना चाहिए. 

पार्ट-1 में इलेक्टोरल बॉन्ड्स खरीदने की तारीख, खरीदने वालों के नाम, बॉन्ड्स के यूनिक कोड, और उसके डिनॉमिनेशन यानी उसकी कीमत दी गई हो. 
पार्ट-2 में इलेक्टोरल बॉन्ड भुनाने की तारीख, भुनाने वाली पार्टी, बॉन्ड्स के यूनिक कोड और बॉन्ड के डिनॉमिनेशन यानी उसकी कीमत दी गई हो. 

क्या है यूनिक कोड?
इलेक्टोरल बॉन्ड शुरू से ही विवादों में रहा था. इसकी ट्रांसपेरेंसी पर चौतरफा सवालों के बाद दिसंबर 2021 में लोकसभा में वित्त मंत्रालय ने कुबूल किया था, "चुनावी बांड पर छिपे हुए अल्फान्यूमेरिक नंबर किसी भी जाली इलेक्टोरल बॉन्ड की प्रिंटिंग या उसके एनकैशमेंट को रोकने के लिए एक आंतरिक सुरक्षा देता है."

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