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चुनाव आयोग ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) द्वारा सुप्रीम कोर्ट को सौंपा गया चुनावी बॉन्ड का पूरा डेटा गुरुवार को अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है. SBI ने 2018 में शुरू हुई योजना के बाद से अब तक 30 किश्तों में 16,518 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी सार्वजनिक की है. एसबीआई के हलफनामे में बताया गया है कि 1 अप्रैल, 2019 से 15 फरवरी, 2024 के बीच 22,217 बॉन्ड खरीदे गए हैं, जो कि इस तीन मूल्यवर्ग यानी ₹1 लाख, ₹10 लाख और ₹1 करोड़ के हैं. इस अवधि के दौरान भुनाए गए बॉन्ड्स की कुल संख्या 22,030 है.
चुनाव आयोग ने दो अलग-अलग डिटेल को अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया है. पहली पीडीएफ में 337 पेज हैं, जिसमें चुनावी बॉन्ड खरीदने वाली कंपनियों और संस्थाओं के नाम, खरीद की तारीख और पैसे की जानकारी शामिल है. वहीं, दूसरी पीडीएफ में 426 पेज हैं, जिसमें राजनीतिक दलों के नाम, तारीख और राशि की डिटेल दी गई है. हालांकि इससे यह स्पष्ट नहीं है कि किस कंपनी या संस्थान ने कौन-सा इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदा है, क्योंकि उपलब्ध कराई गई जानकारी में बॉन्ड संख्या शामिल का विवरण नहीं दिया गया है. साथ ही यह भी नहीं बताया गया है कि किस कंपनी ने किस पार्टी को फंड दिया है.
अब बात करते हैं उन टॉप कंपनियों की, जिन्होंने देश की अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों को फंड देने के लिए सबसे ज्यादा कीमत के चुनावी बॉन्ड खरीदे हैं. भारत निर्वाचन आयोग द्वारा अपनी वेबसाइट पर अपलोड किए गए आंकड़ों के मुताबिक फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज और मेघा इंजीनियरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड अप्रैल 2019 से जनवरी 2024 तक इस लिस्ट में टॉप पर हैं. 1,368 करोड़ रुपये के साथ फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज सबसे ज्यादा फंड देने वाली कंपनी है. वहीं 966 करोड़ रुपये के फंड के साथ मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है.
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'लॉटरी किंग' की है फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज
कथित तौर पर फ्यूचर गेमिंग के मालिक दक्षिण भारत के लॉटरी किंग सैंटियागो मार्टिन हैं. फ्यूचर की वेबसाइट के मुताबिक, मार्टिन ने 13 साल की उम्र में लॉटरी व्यवसाय शुरू किया था. इसके बाद से वो पूरे देश में लॉटरी के खरीदारों और विक्रेताओं के एक विशाल नेटवर्क को विकसित करने में कामयाब रहे. दक्षिण में यह फर्म मार्टिन कर्नाटक के तहत चलती है, जबकि उत्तर-पूर्व में इसे मार्टिन सिक्किम लॉटरी के नाम से जाना जाता है.
मेघा इंजीनियरिंग के 18 राज्यों में चल रहे प्रोजेक्ट
वहीं, बांध और बिजली प्रोजेक्ट्स बनाने वाली कंपनी मेघा इंजीनियरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड का स्वामित्व पीवी कृष्णा रेड्डी और पीपी रेड्डी के पास है. इसका मुख्यालय हैदराबाद में है. कंपनी के वेबसाइट के मुताबिक ये सिंचाई, जल प्रबंधन, बिजली, हाइड्रोकार्बन, परिवहन, भवन और औद्योगिक बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में काम करती है. यह केंद्र और राज्य सरकारों के साथ पीपीपी (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) में अग्रणी रही है और वर्तमान में देश भर के 18 से अधिक राज्यों में प्रोजेक्ट्स चला रही है.
इस पीडीएफ में देखें इलेक्टोरल बॉन्ड किसने खरीदे
इस पीडीएफ में देखें किस पार्टी ने इलेक्टोरल बॉन्ड भुनाए
ये हैं चुनावी बॉन्ड खरीदने वाली अन्य टॉप कंपनियां-
- क्विक सप्लाई चेन प्राइवेट लिमिटेड ने 410 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड खरीदे हैं.
- वेदांता लिमिटेड ने 400 करोड़ रुपये के बॉन्ड खरीदे हैं.
- हल्दिया एनर्जी लिमिटेड ने 377 करोड़ रुपये के बॉन्ड खरीदे हैं.
- भारती ग्रुप 247 करोड़ रुपये के बॉन्ड खरीदे हैं.
- एस्सेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने कुल 224 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड खरीदे.
- चुनावी बॉन्ड खरीदने वाले अन्य कंपनियों में ग्रासिम इंडस्ट्रीज, टोरेंट पावर, भारती एयरटेल, डीएलएफ कमर्शियल डेवलपर्स, अपोलो टायर्स, लक्ष्मी मित्तल, एडलवाइस, पीवीआर, केवेंटर, सुला वाइन, वेलस्पन, सन फार्मा, आईटीसी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, डीएलएफ, पीवीआर, बिड़ला, बजाज, जिंदल, स्पाइसजेट, इंडिगो और गोयनका आदि शामिल हैं.
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चुनावी बॉन्ड से फंड पाने वाली टॉप 5 राजनीतिक पार्टियां-
1. बीजेपी के हिस्से में कुल बॉन्ड का 47% फंड आया है. पार्टी को चुनावी बॉन्ड के जरिए 6061 करोड़ रुपये फंड मिला.
2. पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी इस लिस्ट में दूसरी स्थान पर है. टीएमसी को कुल बॉन्ड का 12.6% फंड मिला. पार्टी को बॉन्ड के जरिए 1610 करोड़ रुपये का फंड मिला है.
3. देश की सबसे पुरानी पार्टी चुनावी बॉन्ड से मिले फंड के मामले में तीसरे स्थान पर है. कांग्रेस को बॉन्ड के जरिए 1422 करोड़ रुपये का फंड मिला है, जो कि कुल बॉन्ड का 11% है.
4. लिस्ट में 9.5% के साथ चौथे स्थान पर भारत राष्ट्रीय समिति यानी बीआरएस है, जिसे बॉऩ् के जरिए 1215 करोड़ रुपये का फंड मिला है.
5. पांचवे स्थान पर 6 फीसदी के साथ ओडिशा की सत्ताधारी पार्टी बीजू जनता दल है. बीजेडी को इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए 776 करोड़ रुपये का फंड मिला है.
6. इनके अलावा चुनावी बॉन्ड के माध्यम से फंड प्राप्त करने वाली पार्टियों में अन्नाद्रमुक, शिवसेना, टीडीपी, वाईएसआर कांग्रेस, डीएमके, जेडीएस, एनसीपी, जेडीयू, आरजेडी, आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी भी शामिल हैं.
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क्या होता है इलेक्टोरल बॉन्ड और क्यों किया गया था शुरू?
28 जनवरी, 2017 को तत्कालीन केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्री अरुण जेटली ने देश में चुनावी बॉन्ड या इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम की घोषणा की थी. इसे 29 जनवरी 2018 को कानूनी रूप से लागू किया गया था. सरकार का कहना था कि चुनावी चंदे में 'साफ-सुथरा' धन लाने और 'पारदर्शिता' बढ़ाने के लिए इस स्कीम को लाया गया है.
एसबीआई की 29 ब्रांचों से अलग-अलग रकम के इलेक्टोरल बॉन्ड जारी किए जाते हैं. ये रकम एक हजार से लेकर एक करोड़ रुपये तक हो सकती है. इसे कोई भी खरीद सकता है और अपनी पसंद की राजनीतिक पार्टी को दे सकता है. बॉन्ड 1000 रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक की राशि के जारी किए गए थे. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल 15 फरवरी को फैसला देते हुए इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को 'असंवैधानिक' करार देते हुए रद्द कर दिया.