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'दो साल के भीतर पेट्रोल और डीजल के बराबर होगी इलेक्ट्रिक गाड़ियों की कीमत', बोले- नितिन गडकरी

केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि दो साल के भीतर इलेक्ट्रिक वाहन की लागत पेट्रोल वाहन तथा डीजल वाहन की लागत के बराबर हो जाएगी. गडकरी ने कहा कि मेरा मानना ​​है कि उत्पादन की संख्या भी बढ़ रही है, सब्सिडी के बिना आप उस लागत को बनाए रख सकते हैं.

केंद्रीय सड़कर परिवहन मंत्री नितिन गडकरी केंद्रीय सड़कर परिवहन मंत्री नितिन गडकरी
पीयूष मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 09 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 11:14 PM IST

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि 2 साल के भीतर इलेक्ट्रिक गाड़ियों (ईवी) की कीमत पेट्रोल और डीजल वाहन के बराबर हो जाएगी. गडकरी ने यह भी कहा कि उन्हें वित्त मंत्री द्वारा ईवी पर सब्सिडी देने में कोई समस्या नहीं है.

इससे पहले उन्होंने सुझाव दिया था कि ईवी निर्माताओं को अब सब्सिडी देने की जरूरत नहीं है क्योंकि उत्पादन की लागत कम हो गई है और उपभोक्ता अब अपने दम पर इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) या सीएनजी वाहन चुन रहे हैं.

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बताया कैसे कम होगी EV की कीमत

उन्होंने कहा,'मैं किसी प्रोत्साहन के खिलाफ नहीं हूं. इसका जिम्मा भारी उद्योग मंत्री के पास है. अगर वे इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर अधिक इंसेंटिव देना चाहते हैं, तो मुझे कोई समस्या नहीं है. गडकरी ने कहा कि मेरा मानना ​​है कि उत्पादन की संख्या भी बढ़ रही है, सब्सिडी के बिना आप उस लागत को बनाए रख सकते हैं क्योंकि उत्पादन की लागत कम है.

यह भी पढ़ें: 'EV मेकर्स को अब सब्सिडी देने की जरूरत नहीं', केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का बड़ा बयान

उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन आसानी से उपलब्ध है और मेरा मानना ​​है कि दो साल के भीतर इलेक्ट्रिक वाहन की कीमत भी पेट्रोल वाहन और डीजल वाहन की कीमत जैसी हो जाएगी. इसलिए उन्हें सब्सिडी की आवश्यकता नहीं है क्योंकि ईंधन के रूप में इलेक्ट्रिक पर पहले से ही बचत हो रही है.

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मुझे सब्सिडी से कोई दिक्कत नहीं

उन्होंने आगे कहा, 'लेकिन फिर भी अगर वित्त मंत्री और भारी उद्योग मंत्री सब्सिडी देना चाहते हैं और आप इसके लिए फायदेमंद होने जा रहे हैं. मुझे कोई परेशानी नहीं है, मैं इसका विरोध नहीं करूंगा.' आपको बता दें कि भारत में पिछले साल इलेक्ट्रिक वाहनों की बाजार हिस्सेदारी 6.3% थी, जो उससे पिछले साल की तुलना में 50% अधिक है.
 

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