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भारत ने चीन पर साधा निशाना, बिना नाम लिए कहा- संप्रभुता का सम्मान हो

चीन का नाम लिए बिना विदेश मंत्री ने दक्षिण चीन सागर में विश्वास खत्म करने वाले कदमों और घटनाओं को लेकर शनिवार को चिंता प्रकट की और इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अनुपालना और क्षेत्रीय अखंडता तथा संप्रभुता का सम्मान होना चाहिए.

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईस्ट एशिया समिट को किया संबोधित (फोटो-PTI) विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईस्ट एशिया समिट को किया संबोधित (फोटो-PTI)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 15 नवंबर 2020,
  • अपडेटेड 7:44 AM IST
  • 15वें ईस्ट एशिया समिट को विदेश मंत्री ने किया संबोधित
  • दक्षिण चीन सागर में विश्वास खत्म करने वाले कदमों से चिंतित
  • चुनौतियों से निपटने के लिए दुनिया के देशों का आह्वान

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 15वें ईस्ट एशिया समिट में शनिवार को भारत का प्रतिनिधित्व किया. इस सम्मेलन की अध्यक्षता वियतनाम के प्रधानमंत्री गुयेन जुआन फुक ने की. वह आसियान के अध्यक्ष हैं. 

बहरहाल, चीन का नाम लिए बिना विदेश मंत्री ने दक्षिण चीन सागर में विश्वास खत्म करने वाले कदमों और घटनाओं को लेकर शनिवार को चिंता प्रकट की और इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अनुपालना और क्षेत्रीय अखंडता तथा संप्रभुता का सम्मान होना चाहिए. 

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विदेश मंत्रालय की तरफ जारी बयान के अनुसार दक्षिण चीन सागर के मसले पर विदेश मंत्री जयशंकर ने उन कार्यों और घटनाओं को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की जिससे क्षेत्र में भरोसा डगमगा रहा है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार एस जयशंकर ने इस दौरान हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए हाल ही में कई देशों की ओर से घोषित नीतियों का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय सहयोग को लेकर प्रतिबद्धता हो तो विभिन्न दृष्टिकोण का समायोजन करना कभी चुनौतीपूर्ण नहीं होगा. 

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विदेश मंत्री की यह टिप्पणी उस समय सामने आई है जब चीन और भारत में पूर्वी लद्दाख में सीमा पर तनाव चल रहा है. वहीं दक्षिण चीन सागर एवं हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भी बीजिंग का विस्तारवादी रवैया देखने को मिल रहा है. विदेश मंत्री जयशंकर ने कोरोना महामारी से निपटने के लिए भारत में उठाए गए कदमों के बारे में भी इस शिखर बैठक में जानकारी दी. 

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अपने संबोधन में जयशंकर ने आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और कोरोना महामारी जैसी राष्ट्रीय सीमाओं से परे चुनौतियों से निपटने के लिए अधिक से अधिक अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता को भी रेखांकित किया.


 

 

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