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कृषि विशेषज्ञ पी साईनाथ ने बताया- किसान कानून में क्या है सबसे विवादास्पद क्लॉज

केंद्र द्वारा लाए गए कानूनों के खिलाफ किसानों का हल्ला बोल जारी है. किसान लंबे वक्त से सड़कों पर हैं और इस कानून को वापस लेने की बात कह रहे हैं. कृषि एक्सपर्ट पी. साईनाथ ने किसानों की दिक्कतों पर खुलकर बात की है.

कृषि विशेषज्ञ पी. साईनाथ  (Photo: psainath.org) कृषि विशेषज्ञ पी. साईनाथ (Photo: psainath.org)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 03 दिसंबर 2020,
  • अपडेटेड 11:45 AM IST
  • कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन जारी
  • पी. साईनाथ बोले- रिएक्शन का अंदाजा नहीं लगा पाई सरकार
  • कृषि कानून के अंदर कई खामियां: पी. साईनाथ

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है. सरकार इन बिलों को किसानों के हक में बता रही है, जबकि किसान इसका विरोध कर रहे हैं. ऐसे में कृषि विशेषज्ञ पी. साईनाथ ने भी इस कानून पर भी अपनी राय रखी है, उनका कहना है कि ये वक्त है कि जो लोग किसान नहीं हैं, उन्हें इन कानूनों के विरोध में किसानों के आंदोलन का समर्थन करना चाहिए.

किसान आंदोलन के मसले पर पी. साईनाथ ने कहा, ‘हाल ही में ट्रेड यूनियन और कर्मचारियों ने बड़ी स्ट्राइक की थी, जिसके जरिए उन्होंने नए कानून का विरोध किया और किसानों का भी समर्थन किया. ऐसे में अब वक्त आ गया है कि आम लोगों को भी किसानों के समर्थन में आवाज उठानी चाहिए.’

पी. साईनाथ के मुताबिक, केंद्र सरकार ने कोरोना संकट के बीच ऐसे कानून लाकर गलती है और वो माहौल को समझ नहीं पाई है. सरकार को लगा कि अगर वो इस वक्त कानून लाएंगे, तो कोई विरोध नहीं कर सकेगा. लेकिन उन्होंने ये गलत अनुमान लगाया और आज हजारों की संख्या में किसान सड़कों पर हैं.  

एक्ट के किस क्लॉज में है दिक्कत?
समाचार एजेंसी के अनुसार, एक कार्यक्रम में कृषि कानून को लेकर पी. साईनाथ ने कहा कि APMC एक्ट का क्लॉज 18 और 19, कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग एक्ट में दिक्कतें हैं जो किसानों को किसी भी तरह की सुरक्षा नहीं देते हैं. 

पी. साईनाथ ने कहा कि भारत के संविधान का आर्टिकल 19 देश के लोगों को अपनी आवाज उठाने का अधिकार देता है. लेकिन कृषि कानून के ये एक्ट किसी भी तरह की कानूनी चुनौती देने से रोकते हैं. इसमें सिर्फ ये नहीं कि किसान नहीं कर सकते, बल्कि कोई भी नहीं कर पाएगा. 

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दरअसल, इन क्लॉज के अनुसार अगर किसान और कंपनी में कोई विवाद होता है तो उसे 30 दिन में निपटाना होगा. ऐसा ना होने पर कानूनी रास्ता अपनाना होगा. इसमें भी किसान सीधे सिविल कोर्ट नहीं जा पाएगा, बल्कि ट्रिब्यूनल के सामने अपील करनी होगी. अब किसान संगठनों का कहना है कि अगर किसान हर मसले के लिए ऐसे चक्कर काटता रहेगा, तो उससे फायदा नहीं नुकसान होगा.


आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने कृषि से जुड़े कुल तीन कानून पास किए हैं, जिनके तहत किसान मंडी के बाहर अपनी फसल बेच सकेंगे. प्राइवेट कंपनियां कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर किसानों से खेती करवा सकेंगी. हालांकि, कानून में MSP को लेकर कोई ठोस नियम नहीं है. 

अब किसानों की ओर से इसी का विरोध हो रहा है, किसानों का कहना है कि मंडी में MSP और पैसों की गारंटी मिलती है लेकिन बाहर नहीं होगी. ऐसे में सरकार को MSP से नीचे फसल खरीदने वालों पर एक्शन का प्रावधान शामिल करना चाहिए. हालांकि, सरकार इसपर नहीं मान रही है. 

लिखित में ही विश्वास क्यों चाहते हैं किसान?
नए कानून को लेकर किसानों ने कई तरह की चिंता व्यक्त की हैं, किसान संगठनों के मुताबिक, इससे APMC एक्ट कमजोर होगा, जो मंडियों को ताकत देता है. ऐसा होते ही MSP की गारंटी भी खत्म होने लगेगी जिसका सीधा नुकसान भविष्य में किसान को उठाना होगा. 

किसानों के मुताबिक, कानून लागू होने के बाद कॉरपोरेट खरीदार अधिक दाम पर फसल ले सकते हैं लेकिन एक-दो साल बाद उनपर MSP का जब कोई दबाव नहीं होगा तो वो मनचाहा दाम लेंगे. और तब किसान के पास कोई ऑप्शन नहीं होगा.

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