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दिल्ली की कोठियों में बना बिल मंजूर नहीं, 700 चौपाल पहले लगानी चाहिए थी: राकेश टिकैत

आजतक के 'किसान पंचायत' में शिरकत करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि हमने हमेशा कहा कि बिल गांव में बनना चाहिए. दिल्ली की कोठियों में बना हुआ बिल देश के किसानों को मंजूर नहीं है. सरकार को चौपाल कानून लाने से पहले गांव में लगाना चाहिए था.

किसान नेता राकेश टिकैत (फोटो- PTI) किसान नेता राकेश टिकैत (फोटो- PTI)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 12 दिसंबर 2020,
  • अपडेटेड 8:26 PM IST
  • बिल हमेशा गांव में बनना चाहिए: राकेश टिकैत
  • 'दिल्ली की कोठियों में बना हुआ बिल मंजूर नहीं'
  • 'सरकार को 7 हजार चौपाल लगानी चाहिए'

कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन 17 दिनों से जारी है. किसानों और विपक्ष के विरोध का सामना कर रही बीजेपी ने देश के अलग-अलग शहरों में 700 चौपाल का आयोजन करने का फैसला लिया है. बीजेपी के इस निर्णय पर किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि कानून लाने से पहले 700 चौपाल लगाना चाहिए था. लेकिन 700 से भी क्या होगा. देश तो बहुत बड़ा है. 7 हजार चौपाल लगानी चाहिए. 

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आजतक के 'किसान पंचायत' में शिरकत करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि हमने हमेशा कहा कि बिल गांव में बनना चाहिए. दिल्ली की कोठियों में बना हुआ बिल देश के किसानों को मंजूर नहीं है. सरकार को चौपाल कानून लाने से पहले गांव में लगाना चाहिए था.

राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस ले. एमएसपी पर कानून बनाना पड़ेगा. इन मांगों के साथ हम आंदोलन करने आए हैं. ये बात हम वार्ता के दौरान सरकार के सामने रख भी रहे हैं.

प्रधानमंत्री मोदी कहते हैं तीनों कानून किसानों के फायदे के लिए हैं. इस पर राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार वो फॉर्मूला हमें भी बता दे जिससे किसानों को फायदा मिलेगा. एमएसपी कानून में शामिल नहीं है. ये तो व्यापारियों के हित में है. 

वहीं, किसान नेता हनन मुल्ला ने कहा कि किसान आंदोलन कल नहीं शुरू हुआ है. पिछले 6 महीने से आंदोलन चल रहा है. किसानों ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की. सरकार का ध्यान खींचने के लिए बिल की 4-5 हजार कॉपियां जलाई गईं. सरकार ने इसपर ध्यान नहीं दिया. 

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हनन मुल्ला ने कहा कि उसके बाद बिल को संसद से पास किया गया. बिल को संसद से कैसे पारित किया गया, ये सबको पता है. किसानों से कोई बात नहीं की गई. हमने कानून को लागू नहीं करने के लिए सरकार से मांग की. इसके बाद किसानों का गुस्सा बढ़ा.

हनन मुल्ला ने कहा कि 9 अगस्त को जेल भरो की अपील की गई. सरकार तब भी नहीं सुनी. 25 सितंबर को जब बिल संसद से पास हो गया, इसके बाद पूरे देश में आंदोलन शुरू हुआ. हनन मुल्ला ने कहा कि कानून वापस लेने की मांग की गई. इस सोई हुई सरकार को जगाने के लिए किसानों ने लगातार 6 महीने कोशिश की. जब कोई बात नहीं सुनी गई तो किसान मजबूर होकर सड़क पर उतरे. 


 

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