
कृषि कानूनों को लेकर दिल्ली के विज्ञान भवन में सरकार और किसान नेताओं की गुरुवार को बैठक हुई. चौथे दौर की इस बैठक में करीब 40 किसान नेता शिरकत किए. दोपहर 12 बजे शुरू हुई ये बैठक करीब साढ़े सात घंटे चली. इस अहम बैठक में किसान नेताओं की तरफ से कविता कुरुगन्ती अकेली महिला रहीं.
कविता एक सोशल एक्टिविस्ट हैं और किसान आंदोलन की सेंट्रल कोऑर्डिनेशन कमिटी की मेंबर भी हैं. इस चर्चा में किसान नेताओं का प्रतिनिधित्व करते हुए कविता ने जबरदस्त दलीलें दी हैं. कविता कुरुगन्ती ऑल इंडिया किसान संयुक्त समिति की भी सदस्य हैं.
आपको बता दें कि केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ किसान पिछले 8 दिनों से दिल्ली बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे हैं. किसान कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं. वहीं, सरकार किसानों को समझाने में जुटी है. सरकार का कहना है कि कृषि कानून किसानों के पक्ष में है.
कृषि कानूनों के विरोध के बीच आज की बैठक अहम मानी जा रही है. आज की बैठक से आगे का रास्ता तय होगा. सरकार क्या किसानों को समझाने में सफल रहेगी. क्या कृषि कानूनों को लेकर किसानों के भ्रम को सरकार दूर कर पाएगी. इन सभी सवालों के जवाब आज की बैठक से मिल जाएंगे.
सूत्रों के मुताबिक, आज बैठक में सरकार बताएगी कि निजी मंडी और सरकारी मंडी में क्या फर्क है. इससे पहले किसानों ने मीडिया रिपोर्ट को प्रस्तुत किया. अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया. कहा गया कि सभी कह रहे हैं कि किसानों का बुरा हाल होगा. एक किसान ने कहा कि हमें मालूम है कि सरकार किसानों को मारना चाहती है.
किसानों की ओर से MSP पर अपनी मांग रखी गई. किसानों ने अपनी ओर से दस पन्नों का खाका पकड़ाया. संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से कुल दस पन्नों का खाका सरकार को सौंपा गया.