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बैठक के बाद बोले किसान नेता- गोली या शांतिपूर्ण समाधान, सरकार से कुछ तो जरूर लेंगे वापस

सरकार ने किसानों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे अपनी मांगों पर अब भी अड़े हैं. बैठक के बाद एक किसान नेता ने तो यहां तक कहा कि हम सरकार से कुछ तो जरूर वापस लेंगे, चाहे वो बुलेट हो या शांतिपूर्ण समाधान. 

कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन (फोटो- PTI) कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन (फोटो- PTI)
अशोक सिंघल
  • नई दिल्ली,
  • 01 दिसंबर 2020,
  • अपडेटेड 8:24 PM IST
  • कृषि कानूनों पर सरकार और किसानों की बातचीत
  • अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं किसान
  • बैठक के बाद किसान नेता का बड़ा बयान

केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का हल्ला बोल जारी है. किसान सरकार से कृषि कानून वापस लेने की मांग कर रहे हैं. पिछले 6 दिनों से दिल्ली बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन जारी है. इस बीच, मंगलवार को सरकार और किसान नेताओं की बातचीत हुई. दोपहर 3 बजे शुरू हुई ये बैठक करीब 7 बजे खत्म हुई.

सरकार ने किसानों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे अपनी मांगों पर अब भी अड़े हैं. बैठक के बाद एक किसान नेता ने तो यहां तक कहा कि हम सरकार से कुछ तो जरूर वापस लेंगे, चाहे वो बुलेट हो या शांतिपूर्ण समाधान. 

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सरकार के साथ बातचीत का हिस्सा रहे किसान नेता चंदा सिंह ने कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ हमारा आंदोलन जारी रहेगा. हम सरकार से कुछ तो जरूर वापस लेंगे, चाहे वो बुलेट हो या शांतिपूर्ण समाधान. उन्होंने कहा कि हम बातचीत के लिए फिर आएंगे.

वहीं, अखिल भारतीय किसान महासंघ के अध्यक्ष प्रेम सिंह ने कहा कि आज की बैठक अच्छी रही. सरकार के साथ 3 दिसंबर को अगली बैठक के दौरान, हम उन्हें समझाएंगे कि कृषि कानून का कोई भी किसान समर्थन नहीं करता है. हमारा आंदोलन जारी रहेगा.

बता दें कि लंबे घमासान के बीच केंद्र सरकार और किसानों के बीच कृषि कानूनों पर मंगलवार को बैठक हुई. करीब चार घंटे तक चली ये बैठक बेनतीजा रही. दिल्ली के विज्ञान भवन में हुई इस बातचीत में कोई फैसला नहीं निकलने के बाद अब अगली बैठक 3 दिसंबर को दोपहर 12 बजे होगी. आज की बैठक को कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने सकारात्मक बताया. उन्होंने कहा कि किसानों के साथ बातचीत अच्छी रही. हमने 3 दिसंबर को फिर से बातचीत करने का फैसला लिया है.

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वहीं, किसान नेताओं ने कहा कि देश के किसानों का केंद्र सरकार पर भरोसा नहीं है. प्रधानमंत्री के वाराणसी के भाषण पर किसान नेताओं ने कहा कि किसानों के प्रति पीएम की नीति और नीयत ठीक नहीं है और केंद्र सरकार दोहरे मापदंड अपना रही है. किसान नेताओं ने आंदोलन में शहीद हुए किसानों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग की. 

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मध्य प्रदेश के किसान नेता शिव कुमार कक्काजी ने कहा कि कृषि कानून किसानों की मौत के फरमान हैं. उन्होंने कहा कि सभी किसान नेता बहुत समझदार हैं और वो जानते हैं कि इन कानूनों से किसानों को बहुत नुकसान है. उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में यह किसान आंदोलन जनांदोलन बनने जा रहा हैं और बुआई के सीजन के बाद आंदोलन में धरने स्थल पर किसानों की संख्या बढ़ेगी. 

सरकार-किसानों की बैठक में क्या हुआ

किसानों के साथ आज की बैठक में APMC Act and MSP पर सरकार की तरफ से प्रेजेंटेशन दिया गया. सरकार किसानों को MSP पर समझाने की कोशिश की. सूत्रों के मुताबिक, बैठक में एक किसान संगठन के प्रतिनिधि ने कहा कि किसान कृषि कानूनों के खिलाफ सड़कों पर हैं. और उन्होंने मांग की कि सरकार को इसे वापस लेने पर विचार करना चाहिए. 

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कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने किसानों से बैठक में कहा कि 4 से 5 नाम अपने संगठन से दीजिए, एक समिति बना देते हैं जिसमे सरकार के लोग भी होंगे, कृषि एक्सपर्ट भी होंगे, नए कृषि कानून पर चर्चा करेंगे. किसानों को समिति पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उनका कहना है कि जबतक समिति कोई निष्कर्ष पर नहीं पहुंचती और कुछ ठोस बात नहीं निकलती तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा. सरकार ने ये भी प्रस्ताव दिया है कि समिति रोजाना बैठकर चर्चा करने को तैयार है, ताकि जल्द नतीजा निकल सके. सूत्रों के मुताबिक, एक किसान प्रतिनिधि ने कहा कि ये नए कानून किसानों के लिए ‘डेथ वारंट’ हैं. 

सूत्रों के मुताबिक, किसान संगठन के प्रतिनिधि ने कहा कि आप (सरकार) लोग ऐसा कानून लाए हैं, जिससे हमारी जमीने बड़े कॉरपोरेट ले लेंगे, आप कॉरपोरेट को इसमे मत लीजिए. अब समिति बनाने का समय नहीं है. आप कहते हैं कि आप किसानों का भला करना चाहते हैं, हम कह रहे हैं कि आप हमारा भला मत कीजिए.

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