किसान आंदोलन की आगे की रणनीति तय करने को लेकर मंगलवार को 2 बजे सिंघु बॉर्डर पर किसान संगठनों की बैठक होगी. इस बैठक में किसान आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे.
कृषि कानूनों को वापस लेने के मुद्दे पर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मीटिंग में कहा कि हमें देशभर के बाकी राज्यों के किसानों से भी बात करनी होगी क्योंकि हमें बाकी देश के किसानों का हित भी देखना है. बहुत से राज्यों के किसान और संगठन इन तीनों कानूनों का समर्थन कर रहे हैं. उनका मानना है कि इससे किसानों का फायदा होगा. उन सब से बातचीत करने के बाद ही मैं आपको बता पाऊंगा. इसलिए 8 जनवरी मीटिंग रखी गई है. किसानों ने कहा कि ताली दोनों हाथों से बजती है.
कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह ने कहा कि हम किसानों के साथ तीनों कानूनों पर बिंदूवार चर्चा करना चाहते थे. लेकिन हम कोई निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सके क्योंकि किसान तीनों कानून को रद्द करने की मांग पर अड़े हुए थे. नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि आज की वार्ता के बाद हमें उम्मीद है कि अगली वार्ता के दौरान हम कोई निष्कर्ष पर पहुंचेंगे.
सूत्रों के हवाले से खबर नरेंद्र सिंह तोमर ने बैठक में कहा कि एमएसपी पर आपकी मांगों को मनाने को तैयार हैं आप चर्चा करे और अपनी माँग हमें बताए
सरकार के मंत्रियों के साथ वार्ता के बाद किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि 8 जनवरी 2021 को सरकार के साथ फिर से मुलाकात होगी. उन्होंने कहा कि तीनों कृषि कानूनों को वापिस लेने पर और MSP के मुद्दे पर 8 तारीख को फिर से बात होगी. उन्होंने कहा कि हमने सरकार को बता दिया है कानून वापसी नहीं तो घर वापसी नहीं .
नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में किसान संगठनों और सरकार के मंत्रियों के बीच चल रही मीटिंग आज फिर बेनतीजा खत्म हो गई. आज दोनों पक्षों के बीच 8वें दौर की मीटिंग थी. आज की बैठक में किसान सिर्फ कानून वापसी की मांग पर ही अड़े रहे. सरकार के मंत्रियों ने कहा कि वे एक बार फिर से किसान संगठनों से बात करेंगे. दोनों पक्षों के बीच अगले दौर की वार्ता 8 जनवरी को होगी.
लंच ब्रेक के बाद किसान संगठनों के साथ सरकार के मंत्रियों की वार्ता दोबारा शुरू हो गई है. आज दोनों पक्षों के बीच आठवें दौर की वार्ता हो रही है. इससे पहले सरकार ने किसानों की मांगों पर विचार करते हुए तीनों कानूनों में संशोधन के लिए संयुक्त कमेटी गठित करने पर तैयार हो गई थी. लेकिन किसानों ने सरकार के इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया. अब दोनों पक्षों के बीच दोबारा वार्ता शुरू हो गई है.
किसानों और सरकार के बीच वार्ता से ताजा खबर ये है कि किसान संगठनों के MSP पर लिखित आश्वासन और तीनों कृषि कानूनों को वापस करने की मांग पर सरकार ने कहा एक संयुक्त कमेटी बना देते हैं वो तय करे कि इन तीनों कानूनों में क्या क्या संशोधन किए जाने चाहिए. सूत्रों के अनुसार सरकार के इस प्रस्ताव को किसान संगठनों ने खारिज कर दिया.
सूत्रों के मुताबिक आज किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेल मंत्री पीयूष गोयल और केंद्रीय उद्योग व वाणिज्य राज्यमंत्री सोम प्रकाश से कहा की आज हम आपके साथ खाना नही खाएंगे. आप अपना खाना खाइए और हम अपना खाना खाएंगे.
बैठक के पहले ही दौरे में किसान संगठनों ने कहा कि आप हमें ये बताएं कि तीन कृषि कानूनों को वापस लेंगे या नहीं. इस पर नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि हम तीन कानूनो में संशोधन के लिए तैयार हैं. इसी बहस के बीच लंच ब्रेक लिया गया.
किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि अभी किसान लंगर से मंगाया गया भोजन कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकार कृषि कानून के फायदे गिना रही है, जबकि किसान कानून वापस लेने की मांग कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि अभी तीनों कानूनों को लेकर गतिरोध बरकरार है.
सरकार और किसानों के बीच चल रही वार्ता लंच ब्रेक के लिए कुछ देर के लिए रुकी है. अब तक कृषि कानूनों को खत्म करने के एजेंडे पर कोई प्रगति नहीं हो पाई है.
सरकार और किसानों के बीच बैठक में एमएसपी को लेकर चर्चा हो रही है. एमएसपी पर गारंटी कैसे दी जाए और किस तरह इसे कानून का हिस्सा बनाया जाए, इसपर मंथन जारी है. एमएसपी पर गारंटी किसानों की अहम मांग में से एक है.
दिल्ली के विज्ञान भवन में किसानों और सरकार की बैठक को आधा घंटा से अधिक हो गया है. आज ये बैठक ढाई बजे शुरू हो पाई. बैठक की शुरुआत में मंत्रियों और किसानों ने उन किसानों के लिए दो मिनट का मौन रखा, जिनकी जान किसान आंदोलन के दौरान गई.
दिल्ली के विज्ञान भवन में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेल मंत्री पीयूष गोयल और 40 किसान संगठनों के बीच बातचीत जारी है.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को किसान आंदोलन के मसले पर ट्वीट किया. अरविंद केजरीवाल ने लिखा कि ठंड और बारिश के बीच सड़कों पर डटे हमारे किसानों के हौंसले को सलाम. मेरी केंद्र सरकार से अपील है कि आज की बैठक में किसानों की सारी मांगें मानते हुए तीनों काले कानून वापस लिए जाएं.
कृषि कानून के मसले पर किसानों और सरकार के बीच बातचीत हो रही है. पिछली चर्चा में सरकार दो मुद्दों पर मान गई थी, लेकिन दो मुद्दों पर मंथन जारी है. विज्ञान भवन में किसान नेता और सरकार फिर बातचीत की टेबल पर है. किसानों ने MSP पर गारंटी कानून और कृषि कानून वापस लेने की मांग की है. वहीं, सरकार का कहना है कि बातचीत से कुछ हल निकलेगा. सोमवार को हो रही इस बैठक में कुल चालीस किसान संगठन हिस्सा ले रहे हैं.
सरकार के साथ चर्चा से पहले किसान नेता बूटा सिंह ने कहा है कि अगर सरकार MSP पर कानून बनाती है, तभी बात बन सकती है. बता दें कि किसानों और सरकार के बीच दोपहर 2 बजे विज्ञान भवन में बातचीत होनी है.
किसानों संग आज होने वाली बातचीत को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बयान दिया है. उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि आज कुछ सकारात्मक नतीजा निकलेगा. बैठक में हर विषय पर मंथन होगा.
सरकार के साथ आज होने वाली बातचीत को लेकर किसान नेता हनन मुल्ला का कहना है कि अब ये सरकार पर निर्भर है कि वो किसानों का मुद्दा सुलझाना चाहती है या नहीं. हमें उम्मीद है कि सरकार किसानों के प्रति कुछ मानवीय अप्रोच करेगी और हमारी मांगों को मानेगी.
सरकार से बातचीत से पहले किसान नेता राकेश टिकैत ने रखी ये तीन मांगें
किसानों और सरकार के बीच आज आठवें दौर की चर्चा होनी है. इस बातचीत के लिए किसान नेता विज्ञान भवन के लिए रवाना हो गए हैं. दोपहर 2 बजे ये बातचीत शुरू होगी.
किसानों का आंदोलन लगातार जारी है और उन्हें कई तबकों का समर्थन भी मिल रहा है. सोमवार सुबह दिल्ली-गाजीपुर बॉर्डर पर बौद्ध भिक्षु भी पहुंचे. यहां उन्होंने किसानों की मांगों का समर्थन किया और तीनों कृषि कानून वापस लेने की मांग की.
सरकार के साथ बात करने से पहले किसान नेता राकेश टिकैत का कहना है कि आज की बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा होनी है. सरकार को समझना चाहिए कि किसानों का आंदोलन दिल से है और कानून वापसी के बिना हम पीछे नहीं हटेंगे. सरकार कानून वापस ले, स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करे और एमएसपी पर कानून बनाए.
अगर किसानों की बात करें तो 26 जनवरी को किसानों ने दिल्ली में ट्रैक्टर मार्च निकालने की बात कह दी है. किसानों का कहना है कि हम किसी संशोधन नहीं बल्कि तीनों कानूनों की वापसी की मांग कर रहे हैं. अगर आज की चर्चा में सरकार नहीं मानती है, तो गणतंत्र दिवस के दिन दिल्ली की ओर ट्रैक्टर मार्च निकाला जाएगा.
दोपहर को दो बजे एक बार फिर किसान और सरकार बातचीत की टेबल पर होंगे. आठवें दौर की इस बातचीत के जरिए आंदोलन को खत्म करने की ओर कदम बढ़ाया जा सकता है. बिजली बिल, प्रदूषण के मसले पर तो सरकार ने हामी भर दी, लेकिन MSP और कानूनों की वापसी पर अभी भी सरकार नहीं मानी है. ऐसे में इन्हीं दो बिंदुओं पर आज चर्चा है.