
पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल और जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला के बीच भगवान राम की जिंदगी से जुड़ी चर्चा पर बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. ये वीडियो 'Dil se with Kapil Sibal' यूट्यूब चैनल पर शेयर किया गया है. कपिल ने फारूक से खास बातचीत में देश के तमाम मसलों पर राय जानी. दोनों ने भगवान राम के जीवन पर भी बात की.
फारूक अब्दुल्ला के साथ चर्चा में कपिल सिब्बल कहते हैं कि आपने यह भी कहा कि भगवान राम, हमारे भी भगवान हैं. इस पर फारूक कहते हैं कि मैं ये बात बार-बार कहता हूं. पाकिस्तान में मौलाना इसरार थे. उनकी कुरान की तर्ज पर 60 किताबें हैं. उसमें उन्होंने दो शख्सियत के बारे में लिखा है. एक- भगवान राम और दूसरे- गौतम बुद्ध. दोनों बादशाह (राजा) थे. लेकिन उन्होंने बादशाह पद ठुकरा दिया और कहा कि हमें लोगों को सच्चाई का रास्ता दिखाना है. उस रास्ते पर पहले वे खुद चले. बादशाहत छोड़ दी और सबके साथ इंसाफ किया. याद है आपको. महात्मा गांधी क्या कहते थे- राम राज्य. इसका मतलब- सबके लिए बराबरी. कोई फर्क नहीं होगा. भारत बहुत बड़ा है. कितने लोग, कितने धर्म और कितनी भाषाएं हैं. ये पूरा देश एक बाग की तरह है. अलग-अलग रंग देखने को मिल जाएंगे. ये खूबसूरती भारत की है.
कपिल कहते हैं कि उनको (बीजेपी) तो एक ही रंग दिख रहा है. इस पर फारूक कहते हैं कि क्या किया जाए. हमें सभी धर्मों को पहचानने की कोशिश करनी चाहिए.
'राम राज्य से बिल्कुल अलग है इनकी राजनीति'
कपिल कहते हैं कि ये राम की बात करते हैं, लेकिन राम के जो आदर्श हैं- उनका पालन नहीं करते हैं. इनकी (बीजेपी) राजनीति राम के राज से बिल्कुल अलग है. खुद को रामभक्त कहते हैं. असली रामभक्त तो आम आदमी हैं, जो सच्चाई के आधार पर जिंदगी को आगे बढ़ाते हैं.
'फारूक ने राम वनवास का सुनाया किस्सा'
फारूक कहते हैं, उसी राम के बारे में कहता हूं आपसे. बाप (राजा दशरथ) ने अपनी बीवी (रानी कैकेई) को वचन दिया था कि जो भी तुम मांगोगी, वो मैं तुम्हें देने को तैयार हूं. उन्होंने (राजा दशरथ) अपना वचन निभाया. राम ने नहीं कहा था (14 वर्ष के वनवास के बारे में).
'यहां लोग कुर्सी छोड़ने के लिए तैयार नहीं'
इस पर कपिल कहते हैं कि यहां तो लोग कुर्सी छोड़ने के लिए भी तैयार नहीं हैं. फारूक कहते हैं कि जैसे कुर्सी ही सबकुछ है. ये देखिए, जब वो (राम) उस दरिया (सरयू नदी) को पार करने के लिए गए तो वो कश्ती (नाव) वाला क्या कहता है? इन्होंने (राम) कहा कि मेरे पास कुछ नहीं है. तब सीता मैया ने अपने हाथ का कंगन निकाला और कहती हैं कि ये ले लीजिए और हमें पार करवा दीजिए. उसने (केवट) हाथ जोड़कर कहा कि भगवान, जब मेरा वक्त आएगा ना.. स्वर्ग जाने के लिए. जब मेरा हाथ पकड़कर ले जाइए. इस दौरान फारूक को भावुक भी देखा गया.
इस पर कपिल कहते हैं कि ये था राम.. फारूक भी यही बात दोहराते हैं. ये राम था और ये हमारा कल्चर था.
'पहले अपने धर्म को समझने की कोशिश करो'
फारूक कहते हैं कि कभी राम ने फर्क किया? कौन धर्म है, ये किस धर्म को मानता है. क्या इसकी पहचान है? नहीं. मैं तो यही कहता हूं कि अल्लाह करे कि... जहां हम लोग खुशी से रह सकें. इंसान मंदिर जाना चाहे तो जाए. मस्जिद जाना चाहे तो जाए. भगवान हर जगह. हर दिल में हैं. मगर हम उन्हें पहचानते नहीं हैं. इसलिए मैं भारतवासियों से कहूंगा कि पहले अपने धर्म को समझने की कोशिश करो. जिस दिन तुम अपने धर्म को समझ जाओगे, उस दिन से किसी दूसरे धर्म से नफरत नहीं करोगे.
'नफरत क्यों किसी से करो?'
कपिल कहते हैं कि फिर वो दूसरे धर्म से नफरत कर ही नहीं सकता. नफरत क्यों किसी से करें? धर्म छोड़िए, आप किसी से नफरत ही क्यों करो? अगर किसी ने गलती की है तो वो भुगतेगा. आप नफरत क्यों करते हो. नफरत के आधार पर राजनीति क्यों करते हो.
फारूक कहते हैं कि इस बात पर मुझे बहुत अफसोस होता है.
'फारूक ने सुनाया राम भजन'
अंत में कपिल कहते हैं कि इस विवादित माहौल में मुझे एक बात याद आ गई- आप तो राम के भजन भी गाते हैं? एक-दो लाइन सुना दीजिए. फारूक ने 'मेरे राम, मेरे राम, मेरे राम...किस गली गयो मेरे राम... आंगन मोरा, सूना-सूना... आंगन मोरा... गाकर अपनी बात पूरी की.