
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की एक महिला जवान जेंडर बदलवाकर पुरुष बनना चाहती थी लेकिन सरकार ने उसकी अर्जी खारिज कर दी. आईटीबीपी में यह पहला ऐसा मामला है जब किसी जवान ने अपना लिंग परिवर्तन करवाने की अपील की थी. इसी लेकर केंद्रीय बल के पास कोई पॉलिसी नहीं थी और इसी वजह से अर्जी को गृह मंत्रालय के पास भेजा गया और मंत्रालय ने इसे कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के पास भेद दिया. हालांकि वहां भी कोई तय नीति न होने के बाद मामला केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की मेडिकल ब्रांच को भेजा गया था.
पुरुषों के बर्ताव पर होगा असर
सीएपीएफ ने महिला की अर्जी खारिज करते हुए कहा कि इससे बाकी पुरुष कर्मियों के मन और व्यवहार पर बुरा असर पड़ सकता है. साथ ही दलील दी कि फोर्स में पुरुष और महिला जवानों की भर्ती के लिए अलग-अलग मापदंड हैं और ऐसे में जेंडर चेंज के बाद उन मानकों को पूरा करना संभव नहीं है. इसी फैसले को नजीर मानते हुए आईटीबीपी ने सभी दफ्तरों को इस बारे में सूचित कर दिया है. साथ ही आगे से ऐसा कोई भी मामला सामने आने पर उसका निपटान इसी तरह से किया जाना सुनिश्चित किया गया है.
देश में आम नागरिकों के जेंडर चेंज के लिए कोई कानून बाध्यता नहीं है, लेकिन ऐसा करने वाले का बालिग होना जरूरी है. हाल के दिनों में सेक्स चेंज के कई मामले सामने आए हैं और एक आंकड़े के मुताबिक दुनियाभर में हर साल करीब 5 हजार लोग अपना जेंडर चेंज कराते हैं. कई लोग जिनकी शारीरिक बनावट लड़के की होती है लेकिन उनके हावभाव लड़की जैसे होते हैं और आकर्षण भी लड़कों के प्रति होता है. वह जटिल मेडिकल प्रक्रिया से गुजरते हुए अपना जेंडर चेंज कराते हैं.
सर्जरी के जरिए जेंडर चेंज
सेक्स रीअसाइनमेंट सर्जरी काफी मुश्किल प्रक्रिया मानी जाती है और खर्चीली भी होती है. इसके लिए सबसे पहले मानसिक तौर पर मजबूत होना बेहद जरूरी होता है. कई बार तो परिवार या समाज के दबाव में आकर लोग इस फैसले तक पहुंच ही नहीं पाते और अपनी इच्छाओं को भीतर ही दबा लेते हैं. लेकिन जो भी लोग जेंडर चेंज का फैसला करते हैं उन्हें मेंटल लेवल पर काफी मजबूत होना पड़ता है.
कानूनी पहलू की बात करें तो कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छा से जेंडर चेंज करा सकता है. लेकिन सरकारी दस्तावेज जैसे आधार, पैन कार्ड, पासपोर्ट में अपनी नई पहचान साबित करने के लिए उसे कई प्रक्रियाओं से गुजना पड़ता है. मसलन, जेंडर चेंज कराने वाला अगर पुरुष से महिला बना है तो आधार कार्ड में लिंग बदलवाना पड़ता है. इसके लिए आपको सर्जरी से संबंधित मेडिकल डॉक्यूमेंट्स की जरूरत होती है. आधार में जेंडर सिर्फ एक बार ही बदलवाया जा सकता है, इसके बाद कोई दोबारा से अपना जेंडर नहीं बदल सकता.
क्या कहता है कानून
जेंडर चेंज करवाने को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट के एडवोकेट प्रेम जोशी ने बताया कि सेक्स रीअसाइनमेंट सर्जरी एक मेडिकल प्रोसेस है, जिसे देश में कोई भी व्यक्ति करवाने के लिए स्वतंत्र है और इसमें कोई कानूनी अड़चन नहीं है. बिधान बरुआ केस (2012) में मुंबई हाइकोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई कानून नहीं है जो भारत में जेंडर चेंज सर्जरी पर रोक लगाता हो. कोई भी वयस्क जो 18 साल से ऊपर हो वो स्वेच्छा से जेंडर चेंज करवा सकता है.
ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) एक्ट 2019 के सेक्शन 7 के मुताबिक सर्जरी करवाने वाले शख्स को सर्जरी के बाद रिवाइज्ड सर्टिफिकेट के लिए जिला मजिस्ट्रेट को आवेदन देना होता है. इसमें सर्जरी से जुड़े दस्तावेज वहां जमा करने होते हैं. नए सर्टिफिकेट के बाद उनके अधिकारों पर कोई असर नहीं पड़ता है. ऐसे में कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छा से जेंडर बदलवा सकता है.
जेंडर चेंज के बाद अपनी नई पहचान साबित करने के लिए सबसे पहले जेंडर चेंज का एफिडेविट बनवाना होता है, जो कि स्टॉम्प पेपर पर बनता है और इसपर नोटरी की मुहर लगाई जाती है. इस हलफनामे में नाम, पता, पति या पिता का नाम और अपना नया जेंडर बताना होता है. इसके बाद नाम बदलवाने के लिए स्थानीय अखबार में विज्ञापन देना होता है और पहचान पत्र बनवाने के लिए संबंधित विभाग में उस अखबार की कटिंग जमा करानी होती है, ताकि रिकॉर्ड में नया नाम दर्ज हो सके. इसके अलावा नेशनल गैजेट में भी नोटिफिकेशन देना होता है और उसके लिए जरूरी फीस भी देनी पड़ती है. गैजेट नोटिफिकेशन के लिए अप्लाई करने के दो महीने के भीतर ई-गैजेट की कॉपी मेल पर आती है जिसमें नई पहचान के बारे में नोटिफिकेशन पब्लिश होता है.