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फेस्टिव सीजन में हुई 'बल्ले-बल्ले', कारोबार सवा चार लाख करोड़ के पार! चीन को हुआ बड़ा नुकसान

दिवाली के पांच दिवसीय त्योहारों पर देश भर में 3.75 लाख करोड़ रुपए का रिकॉर्ड व्यापार हुआ. कार्तिक पूर्णिमा तक इसके सवा चार लाख रुपए का आंकड़ा पार करने की उम्मीद है. इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान वोकल फॉर लोकल के असर से चीन को एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की मुद्रा का नुकसान झेलना पड़ा है.

फेस्टिव सीजन में हुई 'बल्ले-बल्ले', कारोबार सवा चार लाख करोड़ के पार-फोटो PTI फेस्टिव सीजन में हुई 'बल्ले-बल्ले', कारोबार सवा चार लाख करोड़ के पार-फोटो PTI
संजय शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 14 नवंबर 2023,
  • अपडेटेड 4:31 PM IST

दिवाली के पांच दिवसीय त्योहारों पर देश भर में 3.75 लाख करोड़ रुपए का रिकॉर्ड व्यापार हुआ. कार्तिक पूर्णिमा तक इसके सवा चार लाख रुपए का आंकड़ा पार करने की उम्मीद है. इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान वोकल फॉर लोकल के असर से चीन को एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की मुद्रा का नुकसान झेलना पड़ा है.

कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया कॉमर्स ट्रेडर्स यानी कैट के भारतीय उत्पाद-सबका उस्ताद अभियान को देश भर में ग्राहकों का जबरदस्त समर्थन मिला. कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ( कैट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया एवं महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा है कि इस वर्ष के दिवाली सीजन में देश भर के बाज़ारों में पौने चार लाख करोड़ यानी 3.75 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा का रिकॉर्ड-तोड़ व्यापार हुआ.

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सभी त्योहार पर ग्राहकों ने जमकर भारतीय वस्तुओं की ख़रीदारी की. गोवर्धन पूजा, भैया दूज, छठ पूजा एवं तुलसी विवाह और कार्तिक पूर्णिमा पर लगभग 50 हज़ार करोड़ रुपये का और व्यापार होने की संभावना है. यानी आंकड़ा सवा चार लाख करोड़ के पार जाने की संभावना है.

चीन को 1 लाख करोड़ से ज़्यादा का नुकसान
खंडेलवाल के मुताबिक इस बार चीन को दिवाली पर्व पर लगभग 1 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा के व्यापार का बड़ा नुक़सान हुआ. पूर्व वर्षों में दिवाली त्योहारों पर चीन से बनी वस्तुओं को भारतीय बाजार का लगभग 70% हिस्सा मिल जाता था. इस बार वो काफी कम रहा. देश के व्यापारियों ने इस वर्ष चीन से दिवाली से संबंधित किसी भी वस्तु का कोई इंपोर्ट नहीं किया. यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वोकल फॉर लोकल तथा आत्मनिर्भर भारत अभियान का असर है. 

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खंडेलवाल ने कहा कि एक मोटे अनुमान के अनुसार 3.5 लाख करोड़ रुपए के त्योहारों पर व्यापार में लगभग 13% खाद्य एवं किराना में, 9% ज्वेलरी में, 12% वस्त्र एवं गारमेंट, 4% ड्राई फ्रूट, मिठाई एवं नमकीन, 3% घर की साज सज्जा, 6% कास्मेटिक्स, 8% इलेक्ट्रॉनिक्स एवं मोबाइल, 3% पूजन सामग्री एवं पूजा वस्तुओं, 3% बर्तन तथा रसोई उपकरण, 2% कॉन्फ़ेक्शनरी एवं बेकरी, 8% गिफ्ट आइटम्स, 4% फ़र्निशिंग एवं फर्नीचर एवं शेष 20% ऑटोमोबाइल, हार्डवेयर, इलेक्ट्रिकल, खिलौने सहित अन्य अनेक वस्तुओं एवं सेवाओं पर ग्राहकों द्वारा खर्च किए गए. 

पैकिंग कारोबार को भी मिला बड़ा बाजार
देश भर में पैकिंग कारोबार को भी एक बड़ा बाजार इस दिवाली पर मिला. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिवाली त्योहारों पर लोकल बनी वस्तुएं खरीदने का आह्वान किया गया था, जिसका बड़ा प्रभाव पूरे देश में दिखाई दिया. देश के सभी शहरों के स्थानीय निर्माताओं, कारीगरों एवं कलाकारों द्वारा बनाये गये उत्पादों की भारी मात्रा में बिक्री हुई, जिससे आत्मनिर्भर भारत की एक विशिष्ट झांकी दिवाली पर्व के ज़रिए देश एवं दुनिया को दिखाई गई.

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