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वित्त मंत्री ने बजट की विशेषताएं गिनाईं, मोदी सरकार की उपलब्धियां बताईं और बजट पर चर्चा के दौरान पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की ओर से उठाए गए एक-एक सवाल के भी जवाब दिए. बजट पर चर्चा के दौरान राज्यसभा में पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने राज्यों के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की भूमिका पर सवाल उठाए थे. बुधवार को राज्यसभा में बजट पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस सवाल का भी जवाब दिया.
वित्त मंत्री जब बजट पर चर्चा का जवाब दे रही थीं, सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि पूर्व वित्त मंत्री ने दो वाजिब सवाल उठाए थे. एक ये कि राज्यों के डीजीपी की नियुक्ति में यूपीए का रोल क्यों हैं. यूपीए कैसे पिक्चर में आ गया और ऐसा ही सवाल वीसी की नियुक्ति को लेकर भी था. इस पर निर्मला सीतारमण ने कहा कि इसका जवाब देना चाहती हूं. उन्होंने कहा कि पूर्व वित्त मंत्री पूरी सिचुएशन को गलत तरीके से प्रस्तुत कर रहे हैं.
वित्त मंत्री ने कहा कि 2006 के प्रकाश सिंह और अन्य बनाम भारत सरकार केस में सुप्रीम कोर्ट का फैसला 22 सितंबर 2006 को आया था. उन्होंने कहा कि अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि डीजीपी का चयन राज्य सरकार की ओर से विभाग के सबसे वरिष्ठ तीन सदस्यों में से किया जाएगा. राज्य सरकार सबसे वरिष्ठ तीन सदस्यों के नाम का पैनल बनाएगी और वह यूपीएससी है जो निर्णय करेगी. वित्त मंत्री ने कहा कि पुलिस रिफॉर्म से जुड़े केस में प्रकाश सिंह और अन्य पुलिसकर्मी सुप्रीम कोर्ट गए थे और कोर्ट ने ये निर्देश दिए थे जिसकी वजह से डीजीपी की नियुक्ति में यूपीएससी का रोल है.
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वित्त मंत्री के इस बयान पर कांग्रेस सांसद रणदीप सुरजेवाला ने पॉइंट ऑफ ऑर्डर रेज किया. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जो गाइडलाइन निर्वाचन आयोग में नियुक्तियों को लेकर दी थी, सरकार उनको क्यों फॉलो नहीं कर रही. इस पर भड़के सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि हर बात जो आपने कही, अप्रासंगिक है. हर किसी को जजमेंट की जानकारी है. पूर्व वित्त मंत्री ने सवाल उठाया कि डीजीपी की नियुक्तियों में यूपीएससी का रोल क्यों है, सिचुएशन को गलत तरीके से प्रस्तुत किया. वित्त मंत्री ने कहा है कि पूर्व वित्त मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट को लेकर गलत तरीके से सिचुएशन प्रस्तुत किया है. इस पर सीरियस नोट लूंगा.
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दिग्विजय सिंह ने इस पर कहा कि चिदंबरम जी प्रतिष्ठित वकील हैं, गृह मंत्री भी रहे हैं. वो जब उपस्थित रहें तब क्या आप उनको अपना स्पष्टीकरण देने का मौका देंगे. सभापति ने कहा कि एक चार्ज है, पूर्व वित्त मंत्रीजी ने महत्वपूर्ण तरीके से सदन के समक्ष ये कहा है कि राज्यों का ही अधिकार है डीजीपी बनाने का. आप यूपीएससी को क्यों बीच में ला रहे हैं. उनका डायरेक्शन साफ है कि आप ये कर रहे हो क्योंकि आप राज्यों को कंट्रोल करना चाहते हो. वित्त मंत्री का कहना है कि ये किसी एग्जीक्यूटिव ऑर्डर से नहीं, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से हो रहा है जो 2006 में आया था. आपके सुझाव से हम सहमत हैं.
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वित्त मंत्री ने कहा कि अब राज्य विश्वविद्यालयों में वाइस चांसलर (वीसी) की नियुक्ति पर आती हूं. सुप्रीम कोर्ट का ही निर्णय है साल 2022 के पश्चिम बंगाल सरकार बनाम अनंदिया सुंदर दास केस में. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा था कि रेग्युलेशन 2018 विश्वविद्यालयों के वीसी के लिए चयन और नियुक्ति के लिए प्रक्रिया उपलब्ध कराता है. स्टेट और सेंट्रल लेजिस्लेशन में किसी तरह के कॉन्फ्लिक्ट की दशा में सेंट्रल लेजिस्लेशन लागू होगा जिसका संविधान के आर्टिकल 254 में भी वर्णन है.