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Exclusive: पटाखे पर बैन को लेकर पर्यावरण मंत्रालय ने खड़े किए हाथ, हरियाणा-यूपी भी तैयार नहीं

उत्तर प्रदेश सरकार ने इस पूरे मामले पर एनजीटी से कहा है कि प्रदूषण और पटाखों के इस्तेमाल से जुड़े मामले पहले ही सुप्रीम कोर्ट सुन रहा है. इसी महीने नवंबर में इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी होनी है. लिहाजा सुप्रीम कोर्ट इस मामले में फैसला करने में सक्षम है.

NGT 9 नवंबर को पटाखों पर बैन को लेकर फैसला सुनाएगा (सांकेतिक-पीटीआई) NGT 9 नवंबर को पटाखों पर बैन को लेकर फैसला सुनाएगा (सांकेतिक-पीटीआई)
पूनम शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 06 नवंबर 2020,
  • अपडेटेड 5:22 PM IST
  • पटाखों पर प्रतिबंध को लेकर 9 को फैसला सुनाएगा एनजीटी
  • पूरे प्रदेश में पटाखों पर बैन लगाने की जरूरत नहींः हरियाणा
  • SC ही प्रतिबंध को लेकर फैसला करने में सक्षमः यूपी सरकार
  • पता नहीं पटाखों के इस्तेमाल के बाद कोरोना केस बढ़ेंगेः केंद्र

पटाखों पर प्रतिबंध के मुद्दे पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) 9 अक्टूबर को सुबह साढ़े 10 बजे फैसला सुनाएगा. दिल्ली में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण के मद्देनजर राज्य सरकार ने ग्रीन पटाखे चलाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है. यह प्रतिबंध 30 नवंबर तक लागू रहेगा. लेकिन उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों ने फिलहाल पटाखों पर प्रतिबंध लगाने का कोई आदेश जारी नहीं किया है. दूसरी ओर पर्यावरण मंत्रालय ने कहा है कि फिलहाल उनके पास कोई ऐसी स्टडी नहीं है जिससे साफ हो सके कि पटाखों के इस्तेमाल के बाद कोरोना केस और बढ़ेंगे.

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हरियाणा सरकार ने एनजीटी में दाखिल किए गए अपने जवाब में कहा है कि वह अपने राज्य में पटाखों पर प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं है. हरियाणा सरकार ने कहा है कि दिल्ली में बढ़ रहे प्रदूषण के मद्देनजर अगर एनजीटी को ऐसा लगता है कि दिल्ली एनसीआर में आने वाले शहरों मसलन फरीदाबाद और गुरुग्राम में पटाखे चलाने से दिल्ली में प्रदूषण बढ़ सकता है तो वहां प्रतिबंध लगाया जा सकता है, लेकिन राज्य सरकार को लगता है कि पूरे हरियाणा में पटाखों पर प्रतिबंध लगाने की जरूरत नहीं है.

वहीं उत्तर प्रदेश सरकार ने इस पूरे मामले पर एनजीटी से कहा है कि प्रदूषण और पटाखों के इस्तेमाल से जुडे मामले पहले ही सुप्रीम कोर्ट सुन रहा है. इसी महीने नवंबर में इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी होनी है. लिहाजा सुप्रीम कोर्ट इस मामले में फैसला करने में सक्षम है.

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उत्तर प्रदेश सरकार ने एनजीटी को यह भी बताया है कि इस साल उन्होंने पटाखे बेचने के लिए दुकानदारों को दिए जाने वाले लाइसेंस जारी नहीं किए हैं. लेकिन पटाखों को चलाने से रोकने को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने कोर्ट में अपना रुख साफ नहीं किया है. राजस्थान और ओडिशा जैसे कई राज्य एनजीटी को पहले ही लिख कर दे चुके हैं कि वे 30 नवंबर तक पटाखे चलाने पर प्रतिबंध लागू कर चुके हैं.

इन सबके बीच में पर्यावरण मंत्रालय का रुख बेहद दिलचस्प है. पर्यावरण मंत्रालय ने पटाखों पर बैन लगाने को लेकर एनजीटी की तरफ से मांगी गई राय पर कहा है कि फिलहाल इस मामले में उनके पास कोई भी ऐसी स्टडी नहीं है जिससे यह साफ हो सके कि पटाखों के इस्तेमाल के बाद कोरोना के मामले और बढ़ेंगे.

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आजतक से बात करते हुए पर्यावरण मंत्रालय के वकील बालेंद्र शेखर ने कहा कि अभी 3 नवंबर को उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय को दोबारा एक पत्र लिखा है जिससे यह साफ हो सके कि क्या पटाखों के इस्तेमाल और कोरोना के केस बढ़ने के बीच कोई संबंध है. पर्यावरण मंत्रालय के मुताबिक, पटाखों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने से इसके लिए उपयुक्त कारण होना जरूरी है.

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दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण और उस पर लगाम लगाने को लेकर दिल्ली सरकार के प्रयास तब तक नाकाफी हैं जब तक कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा राज्य की भूमिका भी सकारात्मक न हो. अगर दिल्ली-एनसीआर के तहत आने वाले उत्तर प्रदेश और हरियाणा के शहरों में पटाखों पर प्रतिबंध नहीं लगाया जाता है तो दिल्ली में ग्रीन पटाखे भी बैन होने के बावजूद राजधानी में प्रदूषण बढ़ेगा. नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुरुग्राम जैसे शहरों में बढ़ता प्रदूषण दिल्ली की आबो-हवा को हर हाल में प्रभावित करता है.

ऐसे में अब 9 नवंबर को आने वाला एनजीटी का फैसला यह साफ करेगा कि इन राज्यों में पटाखों पर रोक लगेगी या नहीं.

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