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'दिल्ली नहीं ग्वालियर में दर्ज किया गया है नए कानूनों के तहत पहला केस', बोले गृह मंत्री अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को बताया कि नए आपराधिक न्याय कानूनों के तहत पहला मामला मध्य प्रदेश के ग्वालियर में आधी रात को करीब 12 बजकर 10 मिनट पर दर्ज किया गया है. जो कि एक बाइक चोरी का मामला है. गृह मंत्री ने यह भी कहा कि मैं सबसे पहले देश के लोगों को बधाई देना चाहता हूं कि आजादी के करीब 77 साल बाद हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली पूरी तरह से स्वदेशी हो गई है.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह. (फाइल फोटो) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह. (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 01 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 9:28 PM IST

एक जुलाई के देश में नए कानून लागू हो गए हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को बताया कि नए आपराधिक न्याय कानूनों के तहत पहला मामला मध्य प्रदेश के ग्वालियर में आधी रात को करीब 12 बजकर 10 मिनट पर मोटर साइकिल की चोरी का दर्ज किया गया था. पहला जानकारी आई थी कि इन नए कानूनों के तहत दिल्ली में पहला मामला दर्ज हुआ है, लेकिन गृह मंत्री ने इस बारे में बताया कि दिल्ली नहीं, बल्कि ग्वालियर में नए कानूनों के तहत मामला दर्ज किया गया था.

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दरअसल, अमित शाह एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे. उसी दौरान जब उनके तीन नए कानूनों के तहत दिल्ली में दर्ज हुए पहले केस  के बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह झूठ है. अब तक मिली जानकारी के अनुसार, नए कानूनों के तहत सबसे पहला मामला ग्वालियर के थाने में दर्ज किया गया है. जो कि बाइक चोरी का मामला है. ये मामला रात करीब 12 बजकर 10 मिनट पर दर्ज किया गया था.

'दिल्ली का मामला पहला मामला नहीं है'

दिल्ली के स्ट्रीट वेंडर के खिलाफ जो मामला दर्ज हुआ है. वह पहला मामला नहीं है. उस मामले का प्रावधान पहले भी था. पुलिस ने इस मामले की समीक्षा करने के लिए प्रावधान का इस्तेमाल किया और उसे खारिज कर दिया. दिल्ली पुलिस ने नए कानूनों के तहत एक स्ट्रीट वेंडर के खिलाफ राजधानी के कमला मार्केट पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया था.

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गृह मंत्री ने स्पष्टीकरण करते हुए कहा कि अगर अपराध की तारीख एक जुलाई, 2024 से पहले की है तो उस पर पुराने कानूनों के तहत मुकदमा चलाया जाएगा. अगर यह घटना एक जुलाई के बाद की है तो नए कानूनों तहत मुकदमा चलाया जाएगा.

अब दंड की जगह होगा न्याय: गृह मंत्री

उन्होंने नए कानूनों के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि मैं सबसे पहले देश के लोगों को बधाई देना चाहता हूं कि आजादी के करीब 77 साल बाद हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली पूरी तरह से स्वदेशी हो गई है. यह भारतीय मूल्यों पर काम करेगी. 75 साल बाद इन कानूनों पर विचार किया गया और आज से जब ये कानून लागू हुए है तो औपनिवेशिक कानूनों को खत्म कर दिया गया है और भारतीय संसद में बने कानूनों को अमल में लाया जा रहा है. दंड की जगह अब न्याय होगा. देरी की जगह अब तुरंत सुनवाई और तुरंत न्याय होगा. पहले सिर्फ पुलिस के अधिकार सुरक्षित थे, लेकिन अब पीड़ितों और शिकायतकर्ताओं के अधिकार भी सुरक्षित रहेंगे.

आपको बता दें कि तीन नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम एक जुलाई से लागू हो गए हैं. इन कानूनों को 25 दिसंबर, 2023 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी दी थी.

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