
बीजेपी विपक्ष को परिवारवाद के मसले पर चाहे कितनी भी घेराबंदी करे और विरोध में मोर्चा खोले, लेकिन आने वाले गुजरात विधानसभा चुनाव पार्टी के लिए सिर दर्द साबित होने जा रहे हैं. क्योंकि यहां अधिकांश दिग्गज नेताओं के बेटे टिकट की दावेदारी करने में लग गए हैं. इन नेताओं का भी पुत्र प्रेम उमड़ कर सामने आने लगा है. यही वजह है कि पार्टी में युवाओं को मौका देने के नाम पर टिकट मांगे जाने लगे हैं.
दरअसल, गुजरात बीजेपी में एक परंपरा रही है कि यहां 75 साल की उम्र में नेता को मार्गदर्शक मंडल में बिठा दिया जाता है. ऐसे में सीनियर नेताओं को चिंता सताती रही है कि राजनीति में उनके बाद बेटे आगे आएं. गुजरात में पिछले 27 साल से बीजेपी का शासन है. वैसे में बीजेपी खुद के निष्पक्ष शासन के लिए परिवारवाद को राजनीति से दूर रखने की रणनीति को सफलता की वजह बताती है.
इस साल गुजरात में भाजपा भले ही परिवारवाद का विरोध कर रही है, लेकिन अब बीजेपी में मौजूदा विधायकों और सांसदों के जरिए के मांग धीरे-धीरे उठ रही है. विधायक और सांसद ने अपने बेटों के लिए टिकट मांगना शुरू कर दिया है. आने वाले विधानसभा में बीजेपी को ये भी चिंता है कि नेताओं के पुत्र मोह कहीं उनकी पार्टी को नुकसान ना पहुंचाए. इस बार पहले से ही बीजेपी चिंता में है, क्योंकि पार्टी के सामने कांग्रेस के साथ-साथ आम आदमी पार्टी में चुनावी मैदान में है.
ऐसे में अगर टिकट नहीं दिया गया और नेताओं की सक्रियता कम हो गई तो पार्टी को बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है. सौराष्ट्र में दिलीप सांधानी अपने बेटे के लिए टिकट मांग रहे हैं, जबकि पोरबंदर के सांसद राम धडुक अपने बेटे के लिए पोरबंदर सीट से टिकट मांग रहे हैं. वहीं, पोरबंदर के विधायक बाबू बोखेरिया भी अपने बेटे के लिए टिकट मांग रहे हैं.
कई ऐसे बड़े नेता भी हैं, जिनके बच्चे पार्टी में टिकट की मांग कर रहे हैं. यह भी कहा जा रहा है कि बीजेपी के हाईप्रोफाइल नेताओं को अपने बच्चों के लिए टिकट चाहिए. इस चुनाव में बीजेपी के जिन नेताओं की उम्र 75 साल के पार हो गई है या हो रही है, ऐसे में उनके बेटे और बेटियों के लिए वो टिकट की मांग कर रहे हैं.
हालांकि, इससे पहले बीजेपी ने स्थानीय निकाय के चुनाव में फैसला लिया था कि तीन बार के जीते हुए पार्षद को टिकट नहीं दिया जाएगा. जबकि 60 साल के ऊपर के लोगों को भी टिकट नहीं दिया जाएगा. ऐसे में अगर बीजेपी विधानसभा के चुनाव में भी ये नियम लागू करती है तो हो सकता है कि पार्टी में और ज्यादा नेता नाराज हो जाएं. लेकिन अगर बीजेपी ने यह ट्रेंड सेट कर दिया तो आने वाले वक्त में बीजेपी राजनीति में नये चेहरे के साथ चुनावी मैदान में होगी.