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प्रमुख संस्थानों के 250 से अधिक पूर्व छात्रों ने पीएम मोदी को लिखा खुला पत्र, 'Bulli Bai' ऐप को लेकर रखी बात

काफी चर्चित रहे बुल्ली बाई ऐप को लेकर अब आईआईटी-बॉम्बे, जेवियर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट (एक्सएलआरआई), दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (एनआईडी) सहित देश भर के प्रमुख संस्थानों के 250 से अधिक पूर्व छात्रों ने प्रधानमंत्री को एक खुला पत्र लिखा है. 

PM Modi PM Modi
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 21 जनवरी 2022,
  • अपडेटेड 10:22 AM IST
  • ऐप के जरिए टारगेट हुई थीं मुस्लिम महिलाएं
  • कहा- आरोपियों के खिलाफ तत्काल हो कार्रवाई

अभी देश में Bulli Bai ऐप विवाद थमा नहीं है. इस ऐप के जरिए मुस्लिम महिलाओं का टारगेट कर उनकी बोली लगाई जा रही थी. हालांकि मामले में आरोपी को गिरफ्तार किया जा चुका है. इसको लेकर अब आईआईटी-बॉम्बे, जेवियर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट (एक्सएलआरआई), दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (एनआईडी) सहित देश भर के प्रमुख संस्थानों के 250 से अधिक पूर्व छात्रों ने प्रधानमंत्री को एक खुला पत्र लिखा है. 

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'आरोपियों के खिलाफ तत्काल हो कार्रवाई'

इसमें उन्होंने "बुली बाई" और "सुली डील" ऐप मामलों में आरोपियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की. उन्होंने आरोप लगाया कि देश में महिलाएं ऑनलाइन और ऑफलाइन स्पेस में कभी भी इतनी असुरक्षित नहीं रही हैं. इस बात पर जोर देते हुए कि ऐसी घटनाओं के संबंध में "अधिकारियों की चुप्पी" महिलाओं की सुरक्षा के प्रति उदासीनता का संकेत देती है और ऐसे अपराधियों को प्रोत्साहित करती है, उन्होंने प्रभावित महिलाओं को न्याय दिलाने का आग्रह किया. पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों ने सरकार से ऐसा स्कूल पाठ्यक्रम तैयार करने का भी अनुरोध किया, जो कम उम्र से ही सकारात्मक मर्दानगी, लिंग और लिंग समाजीकरण के मुद्दों के बारे में युवा लड़कियों और लड़कों को शिक्षित करे.

'ऑनलाइन और ऑफलाइन असुरक्षित महिलाएं'

इसमें कहा गया- सामाजिक व्यवस्था और राजनीतिक अर्थव्यवस्था ऐतिहासिक रूप से महिलाओं के खिलाफ खड़ी रही है. विभिन्न स्थानों पर महिलाओं को डराने और उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं से संकेत मिलते रहे हैं कि पिछले प्रयासों से कुछ नहीं हुआ. भारत में महिलाएं ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों जगहों पर कभी भी अधिक असुरक्षित नहीं रही हैं. शारीरिक नुकसान से लेकर यौन हिंसा तक, ऑनलाइन स्थानों पर सम्मान और अधिकारों का एकमुश्त उल्लंघन हुआ है. इस पर ध्यान न देना और भी आम हो गया है.

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'हिंसा का शिकार हुईं आवाज उठाने वाली महिलाएं'

पत्र में आगे कहा गया "इसके अलावा देश में नफरत और विभाजन की बढ़ती संस्कृति है, जो महिलाओं को भी असमान रूप से प्रभावित करती है. सुल्ली डील और बुल्ली बाई जैसी घटनाएं इस संस्कृति की अभिव्यक्तियां हैं. इसके अलावा आवाज उठाने की हिम्मत के लिए दलित महिलाओं और लड़कियों को भी कई क्षेत्रों में हिंसा का शिकार होना पड़ा है."

इसमें कहा गया कि हम यह खुला पत्र उन महिलाओं और लड़कियों के साथअपनी एकजुटता व्यक्त करते हुए लिख रहे हैं जिन्हें इस मुसीबत का सामना करना पड़ा है. हम आग्रह करते हैं कि इन ऐप्स के निर्माताओं को न्याय के कटघरे में लाया जाए, सरकार द्वारा इस तरह के नफरत से प्रेरित कार्यों और भाषणों की निंदा की जाए और महिलाओं के लिए ऐसे चैनलों को सुरक्षित रखा जाए.

ऐप के जरिए टारगेट हुई थीं 100 से अधिक मुस्लिम महिलाएं

गौरतलब है कि "सुल्ली डील्स" ऐप ने व्यापक आक्रोश पैदा कर दिया था क्योंकि इसने 100 से अधिक मुस्लिम महिलाओं को टारगेट किया था, यहां यूजर्स को महिलाओं की "नीलामी" में भाग लेने की अनुमति मिली. आरोपी को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस महीने की शुरुआत में मध्य प्रदेश के इंदौर से गिरफ्तार किया था.

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