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सुकर्णो से सुबिआंतो... 5वीं बार गणतंत्र दिवस के चीफ गेस्ट इंडोनेशिया से, जानें 75 सालों में कितनी मजबूत हुई दोनों देशों की दोस्ती

साल 1950 में गणतंत्र दिवस के पहले कार्यक्रम में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो बतौर चीफ गेस्ट शामिल हुए थे. इसके बाद साल 1984 में भूटान और इंडोनेशिया के प्रतिनिधि भारत पहुंचे. इसमें भूटान के राजा जिग्मे सिंगये वांगचुक और इंडोनेशिया की सेना के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल रुदिनी शामिल हुए थे.

इस बार इंडोनेशिया के राष्ट्रपति गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि. इस बार इंडोनेशिया के राष्ट्रपति गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि.
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 26 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 11:26 AM IST

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो इस बार गणतंत्र दिवस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हैं. ये 5वीं बार है जब गणतंत्र दिवस के मौके पर इंडोनेशिया के नेता को बतौर गेस्ट भारत ने बुलाया है. भारत ने जब साल 1950 में पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया था तब भी इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो ही चीफ गेस्ट थे. इस बात में कोई संदेह नहीं है कि भारत और इंडोनेशिया के रिश्ते हजारों साल की ऐतिहासिक जड़ों से मजबूत हैं. लेकिन ये जानना जरूरी है कि आखिर दोनों देशों की आजादी के बाद ये रिश्ते कितने पुख्ता हुए हैं. साथ ही गणतंत्र दिवस पर बतौर चीफ गेस्ट इंडोनेशिया को बुलाने के पीछे क्या मकसद रहा है.

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जानें कब-कब इंडोनेशिया के नेता गणतंत्र दिवस पर भारत पहुंचे

साल 1950 में गणतंत्र दिवस  के पहले कार्यक्रम में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो बतौर चीफ गेस्ट शामिल हुए थे. इसके बाद साल 1984 में भूटान और इंडोनेशिया के प्रतिनिधि भारत पहुंचे. इसमें भूटान के राजा जिग्मे सिंगये वांगचुक और इंडोनेशिया की सेना के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल रुदिनी शामिल हुए थे. इसके बाद साल 2011 में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुसीलो बाम्बांह युद्दोयोनो बतौर चीफ गेस्ट भारत पहुंचे थे. साल 2018 में गणतंत्र दिवस के मौके पर भारत  ने आसियान देशों के प्रमुखों को न्यौता भेजा था. इसमें इंडोनेशिया भी शामिल था. अब 5वीं बार 2025 में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो भारत पहुंचे हैं.

1950 में सुकर्णो का भारत दौरा 

साल 1950 दोनों ही देशों के लिए कई मायनो में अहम था. भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों के लिहाज से भी ये समय काफी अहम था. इसी बीच, भारत के पहले गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे. यह घटना उस समय के वैश्विक परिप्रेक्ष्य में बेहद अहम थी. दरअसल, तब द्वितीय विश्व युद्ध के बाद उपनिवेशवाद का अंत हो रहा था और एशिया में नए स्वतंत्र राष्ट्रों का उदय हो रहा था. भारत ने 1947 में ब्रिटिश साम्राज्य से स्वतंत्रता प्राप्त की थी और इंडोनेशिया ने भी 1949 में नीदरलैंड्स से स्वतंत्रता हासिल की थी. 

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क्यों खास था सुकर्णो का भारत दौरा

सुकर्णो का भारत दौरा दोनों देशों के बीच एकजुटता और सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम माना गया. प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और सुकर्णो दोनों ने एशियाई देशों के स्वतंत्रता संघर्ष को समर्थन देने का संकल्प लिया था. यह दोनों देशों के बीच स्वतंत्रता, समानता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के सिद्धांतों को साझा करने का एक महत्वपूर्ण संकेत था. इस यात्रा का उद्देश्य भारत और इंडोनेशिया को एक दूसरे के पास लाकर दोनों देशों के बीच राजनीतिक और आर्थिक रिश्तों को मजबूत करना था, साथ ही एशियाई देशों की एकजुटता को बढ़ावा देना था. 

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गुटनिरपेक्षता और भारत-इंडोनेशिया का रिश्ता

1950 के बाद से भारत और इंडोनेशिया के रिश्ते लगातार मजबूत हुए हैं. दोनों देशों ने वैश्विक मंचों पर एक-दूसरे का हमेशा सहयोग किया है. खासकर संयुक्त राष्ट्र और गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) में. गुटनिरपेक्ष आंदोलन में भारत और इंडोनेशिया ने एक साथ मिलकर उन देशों के अधिकारों का समर्थन किया जो न तो पश्चिमी शक्तियों के साथ थे और न ही सोवियत संघ के साथ. बता दें कि शीत युद्ध के समय जब दुनिया दो ध्रुवों (अमेरिका और सोवियत संघ) में बंटी थी. तब नेहरू और सुकर्णो ने ही गुटनिरपेक्षता के रूप में दुनिया को एक नया विकल्प दिया था. यह कदम भले ही किसी एक शक्ति के साथ न रहने की हो लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत और इंडोनेशिया के इस कदम ने दोनों देशों को एक मजबूत नेता के तौर पर पेश किया था. 

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समय के साथ, दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में भी इजाफा देखने को मिला है. खासकर 1990 के दशक में जब भारत ने अपनी विदेश नीति में आर्थिक सुधारों को लागू किया. इसके बाद भारत और इंडोनेशिया के बीच व्यापार, रक्षा, और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में काफी प्रगति हुई. 2005 में दोनों देशों के बीच एक व्यापक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे व्यापार और निवेश के अवसरों को बढ़ावा मिला.

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सामरिक और रणनीतिक संबंध

भारत और इंडोनेशिया के बीच सामरिक और रक्षा संबंध भी मजबूत हुए हैं. 21वीं सदी के शुरुआत में, दोनों देशों ने अपने रक्षा सहयोग को बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की हैं. दोनों देशों के बीच नियमित रक्षा वार्ता और सैन्य अभ्यास होते हैं. 2018 में भारत और इंडोनेशिया ने समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद, और अन्य वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. 

चीन को जवाब देने के लिए अहम है इंडोनेशिया

इंडोनेशिया, जो हिंद महासागर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सामरिक स्थान पर स्थित है, भारत के लिए एक महत्वपूर्ण साझीदार बन गया है. दोनों देशों ने सामूहिक रूप से चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए अपने सामरिक सहयोग को बढ़ाया है. भारतीय नौसेना और इंडोनेशियाई नौसेना के बीच सहयोग भी मजबूत हुआ है.

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बता दें कि भारत और इंडोनेशिया के बीच सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध भी गहरे हैं. इंडोनेशिया में भारतीय संस्कृति, विशेष रूप से हिंदू और बौद्ध धर्म का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है. वहां के मंदिरों, कला रूपों और साहित्य में भारतीय प्रभाव स्पष्ट है. बता दें कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध भी साल दर साल बढ़े हैं. 

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