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211 प्रोफसरों ने भर दिए 2000 पद... तमिलनाडु की अन्ना यूनिवर्सिटी में 'घोस्ट फैकल्टी' घोटाला!

अन्ना विश्वविद्यालय की वेबसाइट के अनुसार, वर्तमान में उसके साथ संबद्ध कॉलेजों में 52,500 फैकल्टी मेंबर्स रजिस्टर हैं. हालांकि, जांच में पता चला है कि फैकल्टी मेंबर्स की वास्तविक संख्या केवल 50,500 है, जिसमें 2000 पद फर्जी रजिस्ट्रेशन के माध्यम से भरे गए हैं.

चेन्नई के अन्ना विश्वविद्यालय में घोस्ट फैकल्टी घोटाला सामने आया है. (Photo: PTI) चेन्नई के अन्ना विश्वविद्यालय में घोस्ट फैकल्टी घोटाला सामने आया है. (Photo: PTI)
शिल्पा नायर
  • चेन्नई,
  • 27 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 7:40 AM IST

तमिलनाडु के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में शामिल अन्ना विश्वविद्यालय (चेन्नई) में 'घोस्ट फैकल्टी' घोटाला सामने आया है इस घोटाले में प्रोफेसरों का फर्जी रजिस्ट्रेशन शामिल है और केवल 211 फैकल्टी मेंबर 2000 पदों की आवश्यकता को पूरा कर रहे हैं. आश्चर्यजनक रूप से, इनमें से प्रत्येक को एक साथ कई कॉलेजों में फैकल्टी मेंबर के रूप में सूचीबद्ध किया गया है. 

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अन्ना विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ आर वेलराज के अनुसार, संबद्ध कॉलेजों में रजिस्टर 'घोस्ट फैकल्टी' की संख्या 2023 में 191 से बढ़कर इस वर्ष 211 हो गई है. यह मुद्दा पहली बार तब सामने आया जब अरप्पोर इयक्कम नाम के एक एनजीओ ने विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध फैकल्टी मेंबर्स के डेटा की जांच की.

एनजीओ अरप्पोर इयक्कम के संयोजक जयराम वेंकटेशन ने बताया कि कैसे तमिलनाडु के कई इंजीनियरिंग कॉलेज 2023-24 शैक्षणिक सत्र के लिए अन्ना विश्वविद्यालय के साथ अपनी संबद्धता प्रक्रिया (Affiliation Process) के दौरान कथित तौर पर इस घोटाले में शामिल थे. उन्होंने कहा, 'विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध डेटा के विश्लेषण से पता चला कि 352 पूर्णकालिक शिक्षकों को कई कॉलेजों के रोल पर सूचीबद्ध किया गया था, जिनमें से कुछ एक साथ 11 संस्थानों से जुड़े थे.'

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मान्यता के लिए पूरी करनी होती हैं शर्तें

इंजीनियरिंग कॉलेजों को अन्ना विश्वविद्यालय और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) से संबद्धता या मान्यता प्राप्त करने के लिए कुछ स्पेशल क्राइटेरिया को पूरा करना होता है, जैसे जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर, अच्छी लैब फैसिलिटी और पर्याप्त संख्या में योग्य फैकल्टी. एनजीओ ने दावा किया कि विभिन्न इंजीनियरिंग कॉलेज और प्रोफेसर, अन्ना विश्वविद्यालय और एआईसीटीई के साथ मिलकर, इन तय मानदंडों को पूरा करने के लिए गलत तरीके अपना रहे हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता हो रहा है.

एनजीओ ने सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (Directorate of Vigilance and Anti-Corruption) के पास एक शिकायत दर्ज की है, जिसमें इस कथित धोखाधड़ी को रोकने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है. इस खुलासे के बाद राज्य सरकार ने कथित घोस्ट फैकल्टी घोटाले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाने का निर्देश दिया है. अन्ना विश्वविद्यालय, तमिलनाडु सरकार और एआईसीटीई के सदस्यों वाली इस समिति को एक सप्ताह के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट सौंपनी होगी.

फर्जी रजिस्ट्रेशन से भरे गए 2000 पद

अन्ना विश्वविद्यालय के वीसी डॉ. वेलराज ने कहा कि यदि फैकल्टी मेंबर्स को जालसाजी और अन्य संबंधित अपराधों का दोषी पाया जाता है, तो उनके खिलाफ निलंबन और बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाएगी. अन्ना विश्वविद्यालय की वेबसाइट के अनुसार, वर्तमान में उसके साथ संबद्ध कॉलेजों में 52,500 फैकल्टी मेंबर्स रजिस्टर हैं. हालांकि, जांच में पता चला है कि फैकल्टी मेंबर्स की वास्तविक संख्या केवल 50,500 है, जिसमें 2000 पद फर्जी रजिस्ट्रेशन के माध्यम से भरे गए हैं. वीसी ने कहा कि ऑनलाइन डिटेल्स पब्लिश करने की अनिवार्यता के कारण ही इन अनियमितताओं का पता चल सका है.

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