
गोवा में नौकरी घोटाले ने देशव्यापी हंगामा खड़ा कर दिया है, और आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि बीजेपी मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत भ्रष्ट भर्ती रैकेट की अध्यक्षता कर रहे हैं, जिसने पहले से ही देश के सबसे अधिक बेरोजगारी दर से जूझ रहे गोवा के युवाओं को धोखा दिया है. पार्टी का दावा है कि यह घोटाला मुख्यमंत्री के घर तक फैला हुआ है और इसमें उनकी पत्नी और अन्य बीजेपी नेताओं का भी हाथ है, जो नौकरियों के लिए रिश्वत लेने की योजना में शामिल हैं.
AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि वह संसद में इस मुद्दे को उठाएंगे और मामले में जांच की भी मांग की. उन्होंने आरोप लगाया कि गोवा, बीजेपी शासन से पीड़ित है. नौकरी हासिल करने के लिए बेताब युवा रोजगार अवसरों के लिए रिश्वत देने के लिए मजबूर हैं. यह भ्रष्टाचार मुख्यमंत्री की पत्नी और उनके बीजेपी के प्रमुख सदस्यों तक फैला हुआ है."
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प्रमोद सावंत पर जांच को दबाने की कोशिश का आरोप
संजय सिंह ने आगे कहा कि प्रमोद सावंत जांच को दबाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि वे अपने परिवार और पार्टी सहयोगियों को बचा सकें. यह घोटाला तब सामने आया जब सरकारी नौकरियों के बदले रिश्वत लेने के आरोप में कई गिरफ्तारियां हुईं.
इस साल की शुरुआत में, एक बीजेपी नेता ने नौकरी चाहने वालों को पैसे के बदले पद देने का वादा करके ठगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने इसे 'व्यापम 2.0' करार दिया है, जो मध्य प्रदेश को हिला देने वाले बड़े भर्ती घोटाले जैसा ही है.
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बीजेपी ने आरोपों को बताया निराधार
बीजेपी ने इन आरोपों को निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है, लेकिन इस घटना ने गोवा में सत्तारूढ़ पार्टी की छवि को बुरी तरह प्रभावित किया है. मुख्यमंत्री सावंत ने किसी भी संलिप्तता से इनकार किया है और नौकरी धोखाधड़ी के शिकार लोगों को शिकायत दर्ज कराने की अपील की है.