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खुफिया एजेंसियों के रडार पर चीनी थिंक टैंक्स से संपर्क रखने वाले भारत स्थित ग्रुप

भारत में ऐसे कई समूह हैं जो चीनी थिंक टैंक के संपर्क में हैं, उन सभी पर इंटेलिजेंस एजेंसी निगाह रख रही है. वैसे समूह या लोग जो चीनी थिंक टैंक को सपोर्ट कर रहें हैं, उन्हें बिना सिक्योरिटी क्लियरेंस के वीजा नहीं दिया जाएगा.

स्पॉन्सर्ड व्यक्तियों के लिए सिक्योरिटी क्लीयरेंस लेना जरूरी स्पॉन्सर्ड व्यक्तियों के लिए सिक्योरिटी क्लीयरेंस लेना जरूरी
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 21 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 7:50 PM IST
  • प्रायोजित वीजा सिक्योरिटी क्लीयरेंस के बाद होगा जारी
  • संबंधित एजेंसियां देंगी सुरक्षा मंजूरी तब मिलेगा वीजा
  • भारत स्थित कुछ ग्रुप खुफिया एजेंसियों के रडार पर हैं

चीनी थिंक टैंक्स से संपर्क रखने वाले भारत स्थित कुछ ग्रुप खुफिया एजेंसियों के रडार पर हैं. उनकी ओर से प्रायोजित व्यक्तियों को तब तक वीजा नहीं दिया जाएगा जब तक कि उन्हें समुचित जांच के बाद सिक्योरिटी क्लीयरेंस नहीं मिल जाता.  

भारत ने खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर चीन के बढ़ते आउटरीच नेटवर्क से जुड़े व्यक्तियों को वीजा जारी करने के लिए सख्त चेकिंग के कदम उठाए हैं. इस नेटवर्क में थिंक टैंक्स, सांस्कृतिक और व्यापार संगठन, पब्लिक पॉलिसी ग्रुप्स और शिक्षाविद शामिल हैं.   

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विदेश मंत्रालय से विदेश में अपने सारे मिशनों को सूचित करने के लिए कहा गया है कि रडार के तहत कुछ संगठनों की ओर से प्रायोजित वीजा सिक्योरिटी क्लीयरेंस के बाद जारी किया जाएगा. 

नोट में कहा गया है, “भारत में गतिविधियों पर बारीकी से निगरानी रखने के लिए संबद्ध संस्थाओं की ओर से प्रायोजित वीजा के लिए पहले सुरक्षा मंजूरी लेना होगा. इसलिए, विदेश मंत्रालय, अग्रिम सुरक्षा मंजूरी की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विदेश में अपने मिशन उचित रूप से संवेदनशील बना सकता है.” 

अधिकारियों को बताया गया है कि सुरक्षा मंजूरी संबंधित एजेंसियों द्वारा जांच के बाद ही दी जाएगी. 

विदेश मंत्रालय को भेजे नोट में आगे कहा गया है कि चीन की सरकार ने एक आउटरीच सिस्टम तैयार किया है. इसमें दुनिया भर में थिंक टैंक्स को शामिल किया गया है, जिसका उद्देश्य रणनीतिक हित वाले देशों में वर्गों को प्रभावित किया जा सके. इस उद्देश्य से दुनिया भर के थिंक टैंक शामिल हैं.

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संबद्ध संगठनों में से कई भारत में स्थित हैं लेकिन, थिंक टैंक्स, राजनीतिक दलों, उभरते नेताओं, कॉरपोरेट्स, शिक्षाविदों और अनुसंधान संस्थाओं आदि के लिए चीन प्रायोजित वीजा से समर्थित हैं. सूत्रों का कहना है कि यह भी देखा गया है कि कुछ व्यक्ति जासूसी में संलिप्त हो सकते हैं. 

इस नोट को मई महीने की शुरुआत में लद्दाख में भारत-चीन सीमा विवाद के बीच जारी किया गया था. सैन्य टकराव के बीच ये घटनाक्रम चीनी मोबाइल ऐप्स पर बैन लगाने के बाद हुआ था. चीन से संबंध रखने वाले ऐसे संगठनों की सूची को भी खुफिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है. 

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इन थिंक-टैंकों में से कुछ चीन की सॉफ्ट पावर के अहम घटक हैं और खुद से सामाजिक कार्यकर्ता, विद्वान और जीवन के तमाम वर्गों से जुड़े लोग जुड़े होने का दावा करते हैं. उनका मंसूबा टारगेट देशों में नीतिगत निर्णयों को प्रभावित करना है. 

चीन से वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर गतिरोध मई से जारी है. सैन्य और राजनयिक स्तर पर बातचीत के कई दौर के बाद भी इस गतिरोध को तोड़ने में सफलता नही मिली है.

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(अभिषेक भल्ला की रिपोर्ट...)

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