Advertisement

'रेलवे की लापरवाही ने कई शेरों को मार डाला...' एशियाई शेरों की असामयिक मौत पर गुजरात HC की फटकार

गुजरात में एशियाई शेरों की मौत की खबरें अक्सर आती हैं. रेलवे ट्रैक पर रेलवे के संपर्क में आने से बीते दिनों भी कुछ मौतें दर्ज की गई. हाईकोर्ट ने अब रेलवे से पूछा कि आखिर वे इसे रोकने के लिए क्या कर रहे हैं. कोर्ट ने कहा कि शेर जंगल का राजा है, और वह राजा की तरह व्यवहार करता है, अचानक शेर का रेलवे लाइन पर आ जाने की बात बेबुनियाद है.

शेरों की मौत पर गुजरात हाईकोर्ट सख्त शेरों की मौत पर गुजरात हाईकोर्ट सख्त
ब्रिजेश दोशी
  • अहमदाबाद,
  • 26 मार्च 2024,
  • अपडेटेड 9:05 PM IST

गुजरात हाईकोर्ट ने एशियाई शेरों की सुरक्षा और रेलवे की लापरवाही पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं. कोर्ट ने रेलवे को कड़ी फटकार लगाई. हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने रेलवे विभाग से पूछा कि 'क्या आप दुर्घटनाओं से अनजान हैं? हम दुर्घटनाओं की संख्या में कमी नहीं बल्कि शून्य दुर्घटनाएं चाहते हैं.' 

हाई कोर्ट ने कहा कि अकेले जनवरी महीने में दो शेरों की मौत बेहद चिंताजनक है. शेरों से जुड़े मुद्दों पर सभी को संवेदनशील होने की जरूरत है. हाईकोर्ट ने कहा कि वन विभाग और रेलवे विभाग को बैठकर इस मामले पर चर्चा करनी चाहिए. चीफ जस्टिस ने कहा कि 'उचित समझौता करें या नहीं तो हम जंगली इलाकों में सभी ट्रेनें बंद कर देंगे.'

Advertisement

यह भी पढ़ें: 'अजान से प्रदूषण तो आरती का क्या...', गुजरात हाई कोर्ट ने खारिज की मस्जिद में लाउड स्पीकर के खिलाफ जनहित याचिका

रेलवे ने हाईकोर्ट से मांगा जवाब दाखिल करने का समय

गुजरात हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने आगे कहा, "विभाग की लापरवाही से हमने कई शेरों को मार डाला. हाईकोर्ट ने रेलवे विभाग के हलफनामे को स्वीकार करने से इनकार कर दिया. रेलवे विभाग ने कोर्ट की फटकार पर कहा, "हमें कुछ समय दीजिए और हम सर्वोत्तम एसओपी के साथ जवाब पेश करेंगे. मसलन, रेलवे विभाग ने अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है.

'ट्रेन की स्पीड कम लेकिन ड्राइवर का क्या?'

हाईकोर्ट ने इससे पहले की सुनवाई में भी रेलवे विभाग को जमकर फटकार लगाई थी. कोर्ट ने हाल के दिनों में रेलवे ट्रैक के नीचे आकर शेरों की मौत की घटनाओं पर सवाल उठाए थे. रेलवे का भी कहना है कि सेंचुरी क्षेत्र से गुजरते समय ट्रेन की स्पीड भी कम रखी जाती है. हालांकि, चीफ जस्टिस ने इस पर चिंता जाहिर की थी कि ट्रेन की स्पीड तो कम कर दी गई है लेकिन उन ड्राइवरों का क्या जो स्पीड चलाते हैं.

Advertisement

यह भी पढ़ें: गुजरात हाई कोर्ट ने गर्भ में पल रहे 27 हफ्ते के बच्चे के गर्भपात को दी मंजूरी

पिछली सुनवाई में चीफ जस्टिस ने कहा था, "आपके पास ऐसा कोई तंत्र नहीं है जहां स्पीड को ट्रैक पर किसी बाहरी सिस्टम द्वारा नियंत्रित किया जा सके. स्पीड पर नियंत्रण केवल ड्राइवर का होता है. आप इतने निश्चित रूप से कैसे कह सकते हैं? क्या आपके पास उन्हें (ड्राइवरों को) जवाबदेह बनाने के लिए कोई तंत्र है?"

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement