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पंजाब के गन कल्चर पर सरकारी फैसले में झोल क्या है?: दिन भर पॉडकास्ट

पंजाब के गन कल्चर पर सरकारी फैसले में झोल क्या है और बच्चों में जंक फूड की आदत के लिए कौन जिम्मेदार, सुनिए 'दिन भर' पॉडकास्ट

तीन चीज़ें जो पंजाब को कर रहीं खोखला तीन चीज़ें जो पंजाब को कर रहीं खोखला
कुलदीप मिश्र/शुभम तिवारी
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  • 14 नवंबर 2022,
  • अपडेटेड 9:19 PM IST

पंजाब में अब बंदूकबाज़ों की ख़ैर नहीं!

पंजाब की जो बहुत सारी छवियां बनी हैं, उसमें अनाज है, किसान है, रंग बिरंगे परिधान हैं, संगीत है. पर बाद के दिनों में इस छवि में एक चीज़ और जुड़ी है, वो है दोनाली. बंदूकें, नशा और शराब. ख़ास तौर से बंदूकें वहां के गीतों फिल्मों में जिस तरह पेश की गईं, उसे बहुत लोगों ने हिंसा का ग्लैमराइज़ेशन कहा. अमेरिका में जिसके लिए ‘गन कल्चर’ शब्द का इस्तेमाल होगा. मशहूर गायक सिद्धू मूसेवाला की दिनदहाड़े हत्या के बाद इन चिंताओं ने ज़ोर पकड़ा. इसी महीने 4 नवंबर को शिवसेना नेता सुधीर सूरी और 10 नवंबर को डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी प्रदीप सिंह की हत्या कर दी गई.  

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पंजाब में देश की महज दो फीसदी आबादी रहती है, लेकिन देश की 10 फीसदी बंदूकें पंजाब में हैं. पांच साल में साढ़े तीन हजार से ज्यादा हत्याएं हो चुकीं हैं. इन सब के केंद्र में रहा है बन्दूक का ऐक्सेस और उसके प्रदर्शन को लेकर लीनियंसी, छूट जैसा अघोषित कल्चर. भगवंत मान के नेतृत्व वाली  आम आदमी पार्टी सरकार अब इस पर सख़्त हुई है. उन्होंने बंदूकों के सार्वजनिक प्रदर्शन और गानों और सोशल मीडिया में भी बंदूकों के ग्लैमराइज़ेशन को बैन करने का फैसला किया है. 

इस आदेश के बाद कई तरह के सवाल हैं, सोशल मीडिया पर पहले से जो ऐसे वीडियोज, फोटोज हैं, क्या उसे भी हटाया जाएगा? सवाल ये भी कि क्या ये आदेश पर्याप्त है, गन कल्चर और उसके महिमामंडन पर काबू पाने के लिहाज़ से, असल समस्या क्या यही है जिस पर सख्ती की गयी है या बीमारी कुछ और है? 'दिन भर' को स्पॉटीफाई पर सुनने के लिए यहां क्लिक करें

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G-20 में क्या दांव पर? 

जब दुनिया में एक युद्ध हो रहा है, कई देश फूड और एनर्जी क्राइसिस का सामना कर रहे हैं और मंदी की आहट है, तब दुनिया के बीस बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्ष कल से आधिकारिक बातचीत करने वाले हैं, कल से इंडोनेशिया के बाली में जी-20 सम्मेलन शुरू हो रहा है, जो 17 तारीख़ तक चलेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बाली पहुंच चुके हैं. जी-20 देशों की ग्लोबल जीडीपी में हिस्सेदारी करीब 80 फ़ीसदी है और विश्व व्यापार में 75 फ़ीसदी. इन देशों में दुनिया की करीब दो तिहाई आबादी रहती है.

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस बैठक में नहीं आ रहे हैं, उनकी जगह रूसी विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोव शामिल होंगे. इस समिट का मुख्य एजेंडा क्या है, और अभी के ग्लोबल क्राइसिस में G20 की अहमियत क्या है?  इस समिट का आयोजन करा पाना कितना चुनौतीपूर्ण था, क्यूंकि रूस यूक्रेन वॉर के बीच वेस्टर्न देश रूस का बायकॉट करने और इस समिट से दूरी बनाने पर भी बात कर रहे थे? 'दिन भर' में सुनने के लिए यहां क्लिक करें.

 

MCD में महिलाएं पलटेंगी बाज़ी?

एमसीडी के सभी 250 पार्षद सीटों पर चार दिसंबर को वोट डाले जाने हैं. अभी MCD में बीजेपी की सत्ता है पर इस बार आम आदमी पार्टी मज़बूती से लड़ने का दावा कर रही है. आज नामांकन का आख़िरी दिन था. दिल्ली एमसीडी में बीजेपी की एक खास रणनीति पर बात हो रही है जो ये है कि इस बार उन्होने चार सीटों पर मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट दिया है... वहीं आम आदमी पार्टी ने आरक्षित सीटों से ज़्यादा महिलाओं को उम्मीदवार बनाया है, क्या इसे चुनाव के लिए एक बेहतर रणनीति कहा जा सकता है?  'दिन भर' में सुनने के लिए यहां क्लिक करें.

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जंक फूड की लत के लिए कौन ज़िम्मेदार

आज बच्चों का दिन है, चिल्ड्रंस डे. और आज बच्चों की सेहत पर बात करते हैं. और बात करते हैं जंक फूड पर जिस पर आज कल बच्चे जान छिड़कते हैं. एक कम्युनिटी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है, लोकल सर्कल्स. इसके एक सर्वे में मालूम हुआ कि लगभग 56 प्रतिशत भारतीय पेरेंट्स का मानना है कि विज्ञापन बच्चों में जंक फूड के डिजायर को बढ़ा रहे हैं और इस पर किसी तरह की लगाम की ज़रूरत है. सर्वे की और दूसरी बातें क्या हैं और भारत में ऐसे विज्ञापन को लेकर किस तरह के गाइडलाइंस हैं, एडवर्टिजमेंट तो एक फैक्टर है ही लेकिन पैकेज्ड फूड में ऐसा क्या होता है जो बच्चे उसके लिए पागल हो, जंक फूड और बच्चों को केंद्र में रखकर बनाए जाने वाले विज्ञापन को लेकर विदेशों में क्या अप्रोच हैं और ये रणनीति कितनी प्रभावी हो सकती है 'दिन भर' में सुनने के लिए यहां क्लिक करें.

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