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तेजस की सप्लाई में HAL से हो रही देरी? वायुसेना प्रमुख ने उठाए थे सवाल, पढ़ें पूरी Timeline

लड़ाकू विमान तेजस बनाने वाली कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स (HAL) पर भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का गुस्सा भड़का है. उन्होंने लड़ाकू विमानों की डिलीवरी में देरी को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें एचएएल पर भरोसा नहीं है.

वायु सेना प्रमुख ने HAL को लेकर जताई चिंता. वायु सेना प्रमुख ने HAL को लेकर जताई चिंता.
शिवानी शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 12 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 12:18 PM IST

लड़ाकू विमान तेजस बनाने वाली कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स (HAL) पर भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का गुस्सा भड़का है. उन्होंने लड़ाकू विमानों की डिलीवरी में देरी को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें एचएएल पर भरोसा नहीं है. ऐसे में ये सवाल जरूरी है कि आखिर डिलीवरी में कितनी देरी हुई है, इसकी टाइमलाइन क्या है और इससे क्या नुकसान है...

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दरअसल, भारतीय वायुसेना हल्के लड़ाकू विमान (LCA) Mk-1A फाइटर जेट्स की आपूर्ति में देरी को लेकर इसलिए चिंतित है क्योंकि यदि इसमें और देरी होती है तो यह देश की हवाई युद्धक क्षमताओं पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है. 

क्या है असली समस्या

फरवरी 2021 में IAF ने HAL के साथ 83 LCA Mk-1A फाइटर जेट्स के लिए ₹48,000 करोड़ का सौदा किया था. समझौते के तहत पहले विमान की आपूर्ति 31 मार्च 2024 तक की जानी थी. हालांकि, यह समयसीमा कई कारणों से चूकी, जिनमें GE एयरोस्पेस द्वारा F404 इंजन की आपूर्ति में देरी और जरूरी सर्टिफिकेट में देरी शामिल है.

इन दिक्कतों के बावजूद, चार Mk-1A विमान हाल ही में एक एयरशो में उद्घाटन उड़ान में शामिल हुए, जहां उन्होंने अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया.

यह भी पढ़ें: तेजस फाइटर जेट की डिलीवरी में देरी पर भड़के एयर चीफ मार्शल, बोले- मुझे HAL पर भरोसा नहीं, सामने आया Video

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HAL की ओर से क्या कहा गया

HAL के चेयरमैन डॉ. डीके सुनील ने IAF की चिंताओं को स्वीकार करते हुए आश्वासन दिया कि एक बार इंजन की आपूर्ति स्थिर हो जाने पर उत्पादन पर कोई असर नहीं होगा. उन्होंने कहा कि मैं कहना चाहूंगा कि विमानों की डिलीवरी में देरी आलस या लापरवाही की वजह से नहीं है. इसमें कुछ तकनीकी समस्याएं थीं, जिन्हें दूर कर लिया गया है. एयर चीफ मार्शल की चिंता वाजिब है. उन्होंने कहा कि एचएएल में कई स्तरों पर बैठकें हुई हैं और जल्द ही विमानों की डिलीवरी की जाएगी.

यह भी पढ़ें: एयरो इंडिया 2025: वायुसेना और थल सेना प्रमुख ने LCA तेजस में पहली बार एक साथ भरी उड़ान

भविष्य की योजनाएं और अतिरिक्त आदेश

IAF 97 और Mk-1A फाइटर जेट्स का अतिरिक्त आदेश देने की योजना बना रही है, जिसका अनुमानित मूल्य ₹67,000 करोड़ है, जिससे कुल विमानों की संख्या 180 हो जाएगी. इसके साथ ही, एक अलग सौदा ₹1.3 लाख करोड़ का होने की उम्मीद है, जिसके तहत 156 हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर (LCHs) IAF और सेना के लिए अगले तीन से छह महीनों में साइन होने की उम्मीद है. वहीं, HAL ने अगले 3.5 वर्षों में पहले बैच की 83 Mk-1A विमानों की आपूर्ति पूरी करने और 2031 तक 97 अतिरिक्त विमानों का आदेश पूरा करने का वादा किया है.

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क्यों ये देरी वायुसेना के लिए चिंताजनक

LCA Mk-1A की आपूर्ति में देरी उस महत्वपूर्ण समय पर हो रही है, जब IAF अपनी घटती स्क्वाड्रन शक्ति से जूझ रहा है. MiG-21, MiG-27 और जगुआर जैसे पुराने लड़ाकू विमानों के चरणबद्ध रूप से हटाए जाने के कारण, IAF को अपनी ऑपरेशनल क्षमता बनाए रखने के लिए नए विमानों की तत्काल जरूरत है. LCA Mk-1A उत्पादन में और देरी होने से आवश्यकता और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ सकता है, जो भारत की युद्धक तैयारियों पर असर डाल सकता है.

हालांकि, HAL ने आश्वासन दिया है कि इंजन आपूर्ति की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है. आने वाले महीनों में यह तय होगा कि HAL अपने वादों को पूरा कर पाता है और IAF की आधुनिकीकरण योजनाओं में और देरी के बिना समर्थन कर पाता है या नहीं.

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