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Halal Meat Row: वो आदेश जिसके बाद छिड़ गया हलाल और झटका पर संग्राम, आमने-सामने BJP-कांग्रेस

हलाल मीट (halal meat) पर कर्नाटक में बवाल हो रहा है. हिंदू संगठनों का कहना है कि हलाल मीट पर बैन लगना चाहिए. कर्नाटक सरकार के मंत्री भी इसके समर्थन में दिख रहे हैं.

हलाल मीट पर कर्नाटक में बवाल (सांकेतिक फोटो) हलाल मीट पर कर्नाटक में बवाल (सांकेतिक फोटो)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 04 अप्रैल 2022,
  • अपडेटेड 2:50 PM IST
  • कर्नाटक में हलाल मीट पर विवाद
  • हिंदू संगठन कर रहे हलाल मीट पर बैन की मांग

कर्नाटक में हिजाब विवाद के बाद अब हलाल मीट (halal meat) को लेकर लोग आमने-सामने हैं. यह विवाद गुड़ी पड़वा (Gudi Padwa) मतलब हिंदू नववर्ष के त्योहार से पहले शुरू हुआ और अबतक जारी है. इस मसले में आग में घी डालने का काम किया एक सरकारी आदेश ने जिसमें मीट की दुकानों को लेकर कुछ निर्देश दिए गए थे.

दरअसल, कर्नाटक पशुपालन विभाग ने बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (BBMP) को 1 अप्रैल 2022 को एक पत्र लिखा था. इसमें कहा गया था कि शहर में जितने भी बूचड़खाने और मुर्गे की दुकानें हैं उन सभी पर जानवरों को बिजली का करंट (electric shock ) देने की सुविधा होनी चाहिए. ऐसा हलाल मीट का प्रचलन कम करने के लिए किया गया था.

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पशुपालन विभाग ने अपने ऑर्डर में यह भी कहा था कि मीट शॉप को लाइसेंस देने से पहले देखना होगा कि वहां इलेक्ट्रिक शॉक की व्यवस्था है या नहीं. विभाग ने अपने ऑर्डर में कहा था कि उसके पास कुछ ऐसी शिकायतें आई हैं जिसमें जानवरों की जान सही से नहीं ली जा रही है. सरकारी आदेश के मुताबिक, जानवर को पहले बिजली का झटका दिया जाना चाहिए, उसके बाद जब जानवर बेहोश हो जाए तो उसके बाद जानवर की जान ली जानी चाहिए.

यह ऑर्डर ऐसे वक्त में आया था जब कर्नाटक की मंत्री शशिकला जोले ने कहा था हलाल मीट पर बैन की बात उठ रही है, जिसको लागू करने के बारे में सरकार सोच रही है. उनको कहा था कि हिंदू संगठन जो कर रहे हैं वह सही है और वह भी झटका मीट के समर्थन में हैं.

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हलाल मीट विवाद क्या है?

दरअसल, कर्नाटक में Ugadi (गुड़ी पड़वा) के वक्त Hosathodaku का जश्न मनाया जाता है. यह गुड़ी पड़वा त्योहार से एक दिन पहले कर्नाटक के मैसूर, रामनगर और मांड्या जिले में मनाया जाता है. इस दिन पर बहुत से हिंदू लोग भी मीट खाते हैं. हिंदू जन जागृति समिति ने कहा था कि हलाल मीट पवित्र नहीं होता, इसलिए इसका इस्तेमाल Hosathodaku में नहीं किया जाना चाहिए. हिंदू जन जागृति समिति का कहना था कि Hosathodaku पर जो मीट बनाया जाता है उसे पहले भगवान को चढ़ाया जाना होता है लेकिन हलाल मीट को पहले ही मुस्लिम विक्रेता अपने भगवान को चढ़ा चुके होते हैं, इसलिए पूजा में उसका इस्तेमाल ना किया जाए.

इन सब घटनाक्रमों के बीच ही कर्नाटक उबलने लगा. एक अप्रैल को एक सीसीटीवी सामने आया जिसमें 10-15 लोग एक होटल के स्टाफ को धमका रहे थे कि वे हलाल मीट ना बेचें. इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया था. दूसरी घटना में बजरंग दल के लोगों पर एक चिकन की दुकान वाले को पीटने का आरोप लगा था, जो कि हलाल मीट बेचने पर अड़ा था.

फिलहाल हलाल मीट विवाद पर बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस नेताओं, असदुद्दीन ओवैसी आदि की प्रतिक्रिया आ चुकी है. बीजेपी जहां झटका मीट के समर्थन में खड़ी दिख रही है वहीं कांग्रेस और बाकी दल प्रदर्शनों को गलत बता रहे हैं.

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