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हाथों में हथकड़ी, पैरों में थी जंजीर... अमेरिका से दूसरी फ्लाइट में अमृतसर डिपोर्ट हुए अवैध प्रवासी ने सुनाई आपबीती

होशियारपुर में दलजीत सिंह ने यह भी कहा कि उन्हें डंकी रूट से अमेरिका ले जाया गया था, जो अमेरिका में दाखिल होने के लिए प्रवासियों की ओर से अपनाया जाने वाला अवैध और सबसे खतरनाक सफर है.

निर्वासितों को फिर से हथकड़ी लगाकर लाने का दावा निर्वासितों को फिर से हथकड़ी लगाकर लाने का दावा
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 16 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 2:42 PM IST

अमेरिका से निर्वासित हुए अवैध अप्रवासियों का दूसरी खेप शनिवार रात अमृतसर पहुंच चुकी है. अमेरिकी सैन्य विमान में सवार एक भारतीय निर्वासित व्यक्ति ने दावा किया कि पूरी यात्रा के दौरान उनके पैरों में जंजीर और हाथों में हथकड़ी लगाई गई थी. यह दावा उस घटना के ठीक एक सप्ताह बाद किया गया है, जब निर्वासित लोगों के पहली खेप ने भी ऐसी ही शिकायतें की थीं, जिसके बाद देश में काफी हंगामा मच गया था. यहां तक कि संसद में विदेश मंत्री एस जयशंकर को भी इस मामले में जवाब देना पड़ा था.

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पंजाब के सबसे ज्यादा 65 लोग

पंजाब के होशियारपुर जिले के निवासी दलजीत सिंह उन 120 अवैध भारतीय प्रवासियों में शामिल थे, जो सी-17 अमेरिकी सैन्य विमान में सवार थे. यह विमान 90 मिनट की देरी के बाद शनिवार रात करीब 11.35 बजे अमृतसर में लैंड हुआ. निर्वासित लोगों के दूसरे ग्रुप में पंजाब से 65, हरियाणा से 33, गुजरात से आठ के अलावा उत्तर प्रदेश, गोवा, महाराष्ट्र के निवासी शामिल हैं. पीटीआई के अनुसार इनमें से ज्यादातर की उम्र 18 से 30 साल के बीच है.

ये भी पढ़ें: पंजाब से अमेरिका का पूरा डंकी रूट, इन 10 देशों से होते हुए 'अमेरिकन' बनने का सपना बुन रहे भारतीय

होशियारपुर में पत्रकारों से बात करते हुए दलजीत सिंह ने यह भी कहा कि उन्हें डंकी रूट से अमेरिका ले जाया गया था, जो अमेरिका में दाखिल होने के लिए प्रवासियों की ओर से अपनाया जाने वाला एक अवैध और खतरनाक सफर है. इस बीच उनकी पत्नी ने दावा किया कि एक ट्रैवल एजेंसी ने उनके पति को धोखा दिया और उन्हें फ्लाइट से अमेरिका ले जाने का वादा किया था, उसके बजाय दलजीत को डंकी रूट से ले जाया गया.

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डंकी रूट से भेजा था अमेरिका

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गांव के ही एक व्यक्ति ने दलजीत को ट्रैवल एजेंट से मिलवाया था. अमृतसर उतरने के तुरंत बाद अमेरिका से निर्वासित लोगों की जांच की गई, इसके बाद ही रविवार की सुबह उनको अपने घर जाने की इजाजत दी गई. पंजाब और हरियाणा सरकारों ने दोनों राज्यों से आये निर्वासितों के लिए विशेष यात्रा का इंतजाम किया था. इस बीच, 157 निर्वासितों को लेकर एक तीसरा विमान रविवार को अमृतसर में उतरने की उम्मीद है. हालांकि, आगमन के समय के बारे में तत्काल कोई जानकारी नहीं दी गई है.

13 बच्चों सहित 104 निर्वासितों को लेकर पहला अमेरिकी विमान 5 फरवरी को अमृतसर में उतरा, जो पहली बार था कि भारतीय अवैध प्रवासियों को स्वदेश वापस भेजा गया था. यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से 20 जनवरी को अपने कार्यकाल के पहले दिन शुरू किए गए अवैध विदेशियों को बड़े पैमाने पर वापस भेजने के मिशन का हिस्सा था. हालांकि, निर्वासित लोगों ने दावा किया कि विमान के अमृतसर में उतरने के बाद ही उनके हाथ-पैर खोले गए थे.

हथकड़ी लगाने पर मचा था हंगामा

पहली उड़ान में सवार होकर आए गुरदासपुर के रहने वाले जसपाल सिंह ने पीटीआई को बताया, 'हमें लगा कि हमें दूसरे कैंप में ले जाया जा रहा है. फिर एक पुलिस अधिकारी ने हमें बताया कि हमें भारत ले जाया जा रहा है. हमें हथकड़ी लगाई गई थी और हमारे पैरों में जंजीरें बंधी थीं, इन्हें अमृतसर एयरपोर्ट पर खोला गया.' 6 फरवरी को अमेरिकी सीमा गश्ती दल (UBSP) के प्रमुख माइकल डब्ल्यू बैंक्स ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें अवैध भारतीय अप्रवासियों को हाथों में हथकड़ी और पैरों में बेड़ियां डालकर सी-17 विमान में एंट्री करते दिखाया गया था.

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निर्वासित लोगों के साथ किए गए इस बर्ताव से देश में आक्रोश फैल गया. खासतौर पर विपक्षी दलों ने संसद में इस मामले पर चर्चा की मांग करते हुए बजट सत्र की कार्यवाही को बाधित किया. जवाब में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि हथकड़ी का इस्तेमाल अमेरिका की एसओपी का हिस्सा था और उन्होंने विपक्ष को भरोसा भी दिया कि केंद्र यह सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी प्रशासन के साथ बातचीत कर रहा है कि वापस लौटने वाले निर्वासितों के साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार न किया जाए.

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