
सोशल मीडिया लंबे समय से एक युद्ध का मैदान रहा है, जहां चरमपंथी दूसरों की धार्मिक मान्यताओं का मजाक उड़ाते हैं. अक्सर नफरत का जवाब और भी नफरत से देते हैं. हालांकि, परिदृश्य बदल रहा है. प्रशासन और इंटरनेट नीतियों की गहरी समझ रखने वाले सुव्यवस्थित निगरानी समूह अब एक दूसरे के खिलाफ ऑनलाइन युद्ध छेड़ रहे हैं.
इस नए चलन को खास तौर पर चिंताजनक बनाने वाली बात यह है कि यह सिराफ हाई-प्रोफाइल लोगों को ही निशाना नहीं बनाया जा रहा, कुछ सौ फॉलोअर वाले आम सोशल मीडिया यूजर्स को भी सुनियोजित तरीके से उत्पीड़न का शिकार बनाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य विवादित टिप्पणियों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मंगवाना और उन्हें अपमानित करना है.
बड़े पैमाने पर करते हैं रिपोर्टिंग
इन निगरानी समूहों की मांगों का पालन न करने पर लगातार धमकियां, लगातार फोन कॉल और मैसेज, वायरल सोशल मीडिया हैशटैग और पुलिस शिकायतें शुरू हो जाती हैं. इन समूहों के समर्थक अक्सर टारगेट की बड़े पैमाने पर रिपोर्ट करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप संभावित अकाउंट या तो निलंबित हो जाता है या फिर पुलिस एक्शन भी हो सकता है.
चलाते हैं टारगेटेड उत्पीड़न अभियान
इस डिजिटल लड़ाई में शामिल सबसे प्रमुख समूहों में ‘टीम मुस्लिम’ और ‘टीम हिंदुत्व’ शामिल हैं, जो दोनों ही इंस्टाग्राम और एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अत्यधिक सक्रिय हैं. दोनों गुट एक खतरनाक रणनीति का पालन करते हैं. वे न केवल कथित घृणास्पद भाषण के लिए यूजर्स की रिपोर्ट करते हैं, बल्कि उनके खिलाफ टारगेटेड उत्पीड़न अभियान भी चलाते हैं. ग्रुप के सदस्य अक्सर अपने टारगेट की पहचान सार्वजनिक रूप से करते हैं. नाम, स्थान और संपर्क विवरण जैसी व्यक्तिगत जानकारी साझा करते हैं. समर्थकों को उन्हें संदेशों और कॉल से भरने का निर्देश देने से पहले, उन पर सार्वजनिक माफी वीडियो रिकॉर्ड करने का दबाव डालते हैं.