
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राहुल गांधी पर तीखा हमला किया है. राहुल गांधी द्वारा वीर सावरकर पर दिए गए बयान को लेकर पुरी ने उनकी जमकर आलोचना की और कहा,'मैंने अंग्रेजी में कुछ कहा (गधा लेकर उसकी घोड़े से रेस करा रहे हैं..) अब आप इसको समझ लीजिए, कहां सावरकर जी और कहां ये (राहुल गांधी).. छोड़ दीजिए इसको.' उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने देश की गलत छवि पेश की है जिसके लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए.
राहुल को आत्ममंथन की जरूरत
पुरी ने कहा, 'जब राहुल गांधी ब्रिटेन गए तो उन्होंने बहुत कुछ बोला. उन्होंने जो बयान दिया उनमें से एक यह था कि देश के बुनियादी लोकतांत्रिक ढांचे पर हमला हो रहा है. ऐसा बयान देकर वह भारतीय संघ की तुलना यूरोपीय संघ से करते हैं. सबको बोलने की आजादी है. हम सबसे बड़े और सबसे पुराने लोकतंत्र हैं... एक स्वतंत्र प्रेस, एक स्वतंत्र न्यायपालिका, कार्यपालिका और बुनियादी अंग प्रभावी ढंग से काम कर रहे हैं..उन्हें आत्ममंथन करने की जरूरत है.'
उनकी दादी ने लगाया आपातकाल
पुरी ने कहा कि राहुल गांधी भारत में अल्पसंख्यकों को लेकर सवाल खड़े कर रहे है, जबकि मैं खुद अल्पसंख्यक समुदाय से आता हूं. उन्होंने कहा, 'आप कैसे ऐसा कह सकते हैं.. हमने हाल ही में पूर्वोत्तर में ईसाई बहुमत वाली सीटें जीती हैं. क्या राहुल किसी एजेंडे पर चल रहे हैं ... आप कह रहे हैं कि लोकतंत्र से समझौता किया जा रहा है, लेकिन यह केवल एक बार हुआ, जब उनकी दादी ने 1975 में आपातकाल लगाया था.'
इंडिया टुडे के सवाल पर हरदीप सिंह पुरी: मैंने राहुल गांधी पर ममता बनर्जी की टिप्पणी भी देखी है. राहुल गांधी इस तरह के बयान देने से पहले बीजेपी से सलाह नहीं लेते हैं.. उस बात के लिए, उन्होंने ब्रिटेन जाने और उस बयान को देने से पहले हमसे बात नहीं की थी...अगर कोई कहता है कि राहुल गांधी हमारे उदीयमान नेता हैं, मैं इसे स्वीकार नहीं करता.
सावकर पर कांग्रेस का ट्वीट
दरअसल रविवार को जब दिल्ली पुलिस कांग्रेस नेता राहुल गांधी के घर पहुंची तो इसे लेकर काफी गहमागहमी रही. इसके बाद कांग्रेस के ट्विटर हैंडल से शाम 5 बजकर 19 मिनट पर पर एक फोटो शेयर किया गया. उसकी तुलना सावरकर से करते हुए लिखा गया 'सावरकर समझा क्या... नाम- राहुल गांधी है'. इस ट्वीट के बाद राजनीति गर्मा गई. कांग्रेस के ट्वीट पर बीजेपी के नेता और केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि कृपया महान आत्मा वीर सावरकर का अपमान न करें. हाथ जोड़कर विनती कर रहा हूं. मनुष्य के चरित्र की महानता वही माप सकता है जो त्याग के सार को समझता है.
भारत जोड़ो यात्रा के दौरान पर सावरकर पर हमला
राहुल गांधी ने अपनी 'भारत जोड़ो यात्रा' के दौरान भी वीर सावरकर पर जमकर निशाना साधा था. इस दौरान राहुल गांधी ने सावरकर की अंग्रेजों को लिखी हुई चिट्ठी भी पढ़कर सुनाई और कहा था कि सावरकर ने डर की वजह से अंग्रेजों से माफी मांगी, लेकिन गांधीजी, नेहरू और पटेल ने कभी ऐसा नहीं किया. सावरकर ने लिखा था, सर, मैं आपका नौकर रहना चाहता हूं.' राहुल ने तब कहा था इस देश में एक ओर सावरकर और दूसरी ओर गांधी के विचारों की लड़ाई है. मेरी राय है कि सावरकर ने डर की वजह से चिट्ठी पर साइन करना हिंदुस्तान के सभी नेताओं के साथ धोखा था.
अक्सर उठता है चिट्ठी पर सवाल
सावरकर द्वारा अंग्रेजों को लिखी गई 'माफी'वाली चिट्ठी को लेकर विपक्ष हमेशा से बीजेपी को घेरता रहा है. वहीं बीजेपी ने कहा था कि गांधी जी के कहने पर ही सावरकर ने अंग्रेजों को दया याचिका वाली चिट्ठी लिखीं थीं. संघ भी हमेशा उन्हें आजादी का नायक बताता रहा है लेकिन सावरकर हमेशा कांग्रेस की आंखों की किरकिरी बने रहे.
कौन थे सावरकर
विनायक दामोदर सावरकर का जन्म 28 मई 1883 में हुआ था.हमेशा विवादों में घिरे रहने वाले सावरकर हिंदू धर्म के कट्टर समर्थक थे पर वो जाति व्यवस्था के विरोधी थे. यहां तक कि गाय की पूजा को उन्होंने नकार दिया गौ पूजन को अंधविश्वास करार दिया था. वीर सावरकर की महानता के बारे में तमाम किताबें लिखी गई हैं, दक्षिणपंथी मीडिया में कई तरह की जानकारियां हैं. इसके अलावा मुख्यधारा की मीडिया में भी देश और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को लेकर काफी जानकारियां हैं.
इनके मुताबिक, वीर सावरकर भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के अग्रिम पंक्ति के सेनानी और प्रखर राष्ट्रवादी नेता थे. वे न केवल स्वाधीनता संग्राम के एक तेजस्वी सेनानी थे बल्कि क्रांतिकारी, चिंतक, लेखक, कवि, ओजस्वी वक्ता तथा दूरदर्शी राजनेता भी थे. उन्होंने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का सनसनीखेज व खोजपूर्ण इतिहास लिखकर ब्रिटिश शासन को हिला कर रख दिया था. 1909 में लिखी पुस्तक 'द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस-1857' में सावरकर ने इस लड़ाई को ब्रिटिश सरकार के खिलाफ आजादी की पहली लड़ाई घोषित किया.