
हरियाणा के अधिकारियों ने 13 फरवरी को किसानों के दिल्ली तक प्रस्तावित मार्च को विफल करने के लिए अंबाला, जींद और फतेहाबाद जिलों में कई स्थानों पर पंजाब के साथ राज्य की सीमा को कंक्रीट ब्लॉकों, सड़क कील अवरोधकों और कंटीले तारों से सील कर दिया है. हरियाणा सरकार ने 15 जिलों में सीआरपीसी की धारा 144 भी लगा दी. इसके तहत पांच या अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में किसी भी तरह के प्रदर्शन या मार्च पर प्रतिबंध है. चंडीगढ़ प्रशासन ने भी प्रस्तावित मार्च के मद्देनजर शहर में 60 दिनों की अवधि के लिए धारा 144 लागू कर दी है.
'हरियाणा-पंजाब सीमा को दो देशों जैसा बना दिया'
हरियाणा सरकार की व्यापक व्यवस्था पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए मनोहर लाल खट्टर सरकार से कहा कि "भारत और पंजाब के बीच सीमा नहीं बनाएं.' मान ने यह भी कहा कि खट्टर सरकार ने पंजाब के साथ राज्य की सीमा पर उतनी ही कंटीली तारें लगा दी हैं जितनी पाकिस्तान के साथ देश की सीमा पर हैं. हालांकि, खट्टर ने राज्य की सीमाओं को सील करने और पंजाब के किसानों को राष्ट्रीय राजधानी की ओर मार्च करने से रोकने के लिए अपनी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को उचित ठहराया और कहा कि व्यवस्था का उद्देश्य कानून और व्यवस्था बनाए रखना है.
कंक्रीट ब्लॉक, रेत की बोरियां, कंटीले तारों से रोके रास्ते
संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा ने घोषणा की है कि फसलों के लिएन्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी के लिए कानून बनाने सहित कई मांगों को स्वीकार करने के लिए केंद्र पर दबाव बनाने के लिए 200 से अधिक कृषि संघ 13 फरवरी को दिल्ली तक मार्च करेंगे. अंबाला के पास शंभू सीमा पर, अधिकारियों ने सड़क पर कंक्रीट ब्लॉक, रेत की बोरियां, कंटीले तार और दंगा-रोधी वाहन तैनात कर दिए हैं.
घग्गर फ्लाईओवर पर लोहे की शीट लगाई
प्रदर्शनकारियों को पुलिस बैरिकेड्स को फेंकने से रोकने के लिए घग्गर फ्लाईओवर पर सड़क के दोनों किनारों पर लोहे की चादरें लगाई गई हैं. वाटर कैनन और वज्र वाहन तैनात किए गए हैं और वाहनों की आवाजाही को रोकने के लिए नीचे घग्गर नदी के तल को खोद दिया गया है. पैदल चलने वालों को उथली धारा को पैदल पार करते देखा गया.
ड्रोन के जरिए जायजा ले रही पुलिस
पुलिसकर्मी ड्रोन के जरिए हालात का जायजा लेते नजर आए. अंबाला पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अंबाला के सेक्टर 10 में राजीव गांधी खेल स्टेडियम को अस्थायी हिरासत केंद्र घोषित किया गया है. पुलिस ने जींद और फतेहाबाद जिलों में पंजाब से लगी राज्य की सीमाओं पर भी व्यापक इंतजाम किए हैं. फतेहाबाद में, जाखल क्षेत्र में एक सड़क पर कंक्रीट ब्लॉक और स्पाइक बैरियर लगाए गए हैं. जिले में टोहाना सीमा पर, अधिकारियों ने रेत से भरे कंटेनर और कंक्रीट बैरिकेड्स लगाए हैं और सड़क पर लोहे की कीलों की तीन परतें लगाई हैं.
अलर्ट पर है पुलिस
एक पुलिस अधिकारी ने रविवार को कहा कि जींद में, हरियाणा-पंजाब सीमा के पास दो सड़कों को वाहनों की आवाजाही के लिए बंद कर दिया गया है और दो और सड़कों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. कुरुक्षेत्र में पुलिस ने जिले से सटी पंजाब सीमा को सीमेंटेड ब्लॉक लगाकर सील कर दिया है. जिला मजिस्ट्रेट शांतनु शर्मा ने कहा कि 14 फरवरी तक धारा 144 लागू कर दी गई है. किसानों के "दिल्ली चलो" आह्वान के मद्देनजर पुलिस भी निगरानी रख रही है. कुरुक्षेत्र के पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र सिंह भोरिया ने कहा कि किसी भी स्थिति से निपटने के लिए इंतजाम किए गए हैं और पुलिसकर्मी अलर्ट पर हैं. उन्होंने कहा कि अब तक, कोई निवारक गिरफ्तारी नहीं की गई है क्योंकि जिले के किसी भी किसान संगठन ने मार्च के लिए समर्थन की घोषणा नहीं की है.
15 जिलों में धारा 144 लागू
हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने कहा कि लोगों को अब कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी. उन्होंने कहा, ''हम किसी भी कीमत पर अपने हरियाणा की रक्षा करेंगे.''हरियाणा पुलिस ने रविवार को कहा कि उसने राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीमा और अन्य संवेदनशील जिलों में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं. एक आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 15 जिलों में धारा 144 लागू कर दी गई है, जिसके तहत किसी भी तरह के प्रदर्शन या ट्रैक्टर-ट्रॉली में मार्च पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.
सोशल मीडिया पर भी नजर
प्रवक्ता ने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से गलत सूचना फैलाने वाले शरारती तत्वों पर सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल द्वारा नजर रखी जा रही है और आम जनता से भी अनुरोध है कि वे बिना सत्यापन के किसी भी प्रकार की सामग्री या वीडियो सोशल मीडिया पर साझा न करें. प्रवक्ता ने कहा कि कानून-व्यवस्था को बाधित करने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा. उन्होंने कहा कि कुंडली, बड़ी, बहादुरगढ़ और आसपास के विभिन्न औद्योगिक संगठनों ने भी प्रशासन से ऐसे विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया है क्योंकि पिछली बार इस तरह के आंदोलन के कारण उन्हें भारी वित्तीय नुकसान हुआ था.
लोगों से गैरजरूरी सफर से बचने की अपील
प्रवक्ता ने कहा कि इन इलाकों में यातायात प्रभावित होने के कारण कई लोगों को अपनी नौकरियां गंवानी पड़ीं. उन्होंने कहा कि राज्य के विभिन्न किसान संगठनों ने भी पुलिस प्रशासन को आश्वासन दिया है कि वे मार्च में भाग नहीं लेंगे. पंजाब जाने वाले यात्रियों से अपील है कि वे हरियाणा पुलिस द्वारा समय-समय पर जारी की जाने वाली यातायात सलाह का पालन करें और अनावश्यक यात्रा से बचें.
SKM ने हरियाणा सरकार की आलोचना की
पुलिस गांवों के सरपंचों और खाप पंचायतों के साथ भी बैठकें कर रही है और उन्हें मार्च में भाग न लेने के लिए कह रही है. एसकेएम (गैर-राजनीतिक) नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल ने किसानों को दिल्ली की ओर जाने से रोकने की व्यवस्था करने के लिए हरियाणा सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा, ''हम बातचीत के लिए तैयार हैं और बातचीत से कभी नहीं भागेंगे.'' दल्लेवाल ने कहा, एक तरफ केंद्र के साथ बातचीत चल रही है और दूसरी तरफ राज्य सरकार आतंक पैदा कर रही है. उन्होंने कहा, ''खट्टर सरकार जो कर रही है वह दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है.''
उन्होंने कहा कि सरकार ने 2020-21 में निरस्त कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनी गारंटी का "वादा" किया था. किसान नेता ने कहा कि सरकार ने किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का “वादा” किया था.
'केंद्र ने नहीं मानी मांगे इसलिए किसान मजबूर'
केंद्र द्वारा उनकी मांगें नहीं माने जाने के कारण किसान दिल्ली की ओर बढ़ने को मजबूर हैं. उन्होंने एक वीडियो मैसेज में कहा, "सरकार क्यों डर रही है? भारी बैरिकेडिंग की जा रही है. क्या यह लोकतंत्र है. अगर स्थिति खराब होती है, तो यह खट्टर सरकार की जिम्मेदारी होगी." किसान मजदूर संघर्ष समिति के महासचिव सरवन सिंह पंधेर ने कुछ अन्य किसानों के साथ 'दिल्ली चलो' मार्च की सफलता के लिए अमृतसर में अकाल तख्त पर प्रार्थना की. हरियाणा सरकार ने पहले ही 11 से 13 फरवरी तक सात जिलों - अंबाला, कुरूक्षेत्र, कैथल, जिंद, हिसार, फतेहाबाद और सिरसा में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं और बल्क एसएमएस को निलंबित कर दिया है.
न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कानूनी गारंटी के अलावा, किसान स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने, किसानों और खेत मजदूरों के लिए पेंशन, कृषि ऋण माफी, हिंसा के पुलिस मामलों को वापस लेने और लखीमपुर खीरी के पीड़ितों के लिए "न्याय" की भी मांग कर रहे हैं.