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राजीव गांधी फाउंडेशन को चीन का चंदा, क्या है पूरा मामला जिस पर कांग्रेस को बार-बार घेर लेती है बीजेपी

गांधी परिवार से जुड़े राजीव गांधी फाउंडेशन और राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट का FCRA लाइसेंस रद्द क्यों किया गया? इस बारे में गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में बताया है. अमित शाह ने बताया कि जांच में राजीव गांधी फाउंडेशन को चीन से चंदा मिलने की बात सामने आई थी. शाह के मुताबिक, ये FCRA के नियमों का उल्लंघन था, इसलिए लाइसेंस रद्द किया गया.

राजीव गांधी फाउंडेशन की चेयरपर्सन सोनिया गांधी हैं और राहुल गांधी ट्रस्टी हैं. (फाइल फोटो) राजीव गांधी फाउंडेशन की चेयरपर्सन सोनिया गांधी हैं और राहुल गांधी ट्रस्टी हैं. (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 14 दिसंबर 2022,
  • अपडेटेड 12:48 PM IST

Rajiv Gandhi Foundation: गांधी परिवार से जुड़ा राजीव गांधी फाउंडेशन (RGF) एक बार फिर विवादों में है. मंगलवार को संसद में गृह मंत्री अमित शाह ने फाउंडेशन को चीन से चंदा मिलने का मुद्दा उठाया. अमित शाह ने आरोप लगाया कि राजीव गांधी फाउंडेशन को 2005-07 के बीच में चीन से चंदा मिला था.

केंद्र सरकार ने इस साल अक्टूबर में राजीव गांधी फाउंडेशन (RGF) और राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट (RGCT) का FCRA लाइसेंस रद्द कर दिया था. FCRA यानी फॉरेन कन्ट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट. ये लाइसेंस रद्द होने के बाद फाउंडेशन को किसी भी तरह की विदेशी फंडिंग नहीं मिल सकती.

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राजीव गांधी फाउंडेशन क्या है? और चीन से चंदा मिलने का पूरा मामला क्या है? फाउंडेशन का FCRA लाइसेंस रद्द क्यों किया गया? समझते हैं...

क्या है राजीव गांधी फाउंडेशन?

- 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदुर में राजीव गांधी की हत्या कर दी गई थी. उस दिन उनकी श्रीपेरंबुदुर में रैली थी. 

- उनकी हत्या के एक महीने बाद 21 जून 1991 को राजीव गांधी फाउंडेशन की स्थापना की गई. दिल्ली के जवाहर भवन में इसका ऑफिस है.

- फाउंडेशन की वेबसाइट के मुताबिक, इसने 1991 से 2009 तक स्वास्थ्य, शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, महिलाओं और बच्चों के विकास जैसे कई अहम क्षेत्रों में काम किए हैं. 2010 के बाद इसने शिक्षा पर खास जोर दिया. 

- राजीव गांधी फाउंडेशन की चेयरपर्सन सोनिया गांधी हैं. वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पी. चिदंबरम, मोंटेक सिंह आहलूवालिया, सुमन दुबे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अशोक गांगुली इसके ट्रस्टी हैं.

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- केंद्र सरकार ने राजीव गांधी फाउंडेशन के साथ-साथ राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट का भी FCRA लाइसेंस रद्द कर दिया है. इस ट्रस्ट की स्थापना साल 2002 में की गई थी. ट्रस्ट की चेयरपर्सन भी सोनिया गांधी हैं. राहुल गांधी भी इसके ट्रस्टी हैं.

अब बात चीनी चंदे की?

- साल 2020 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक कमेटी बनाई. इस कमेटी को राजीव गांधी फाउंडेशन और राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट की जांच का जिम्मा मिला.

- कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर इसी साल अक्टूबर में गृह मंत्रालय ने दोनों संस्थाओं का FCRA लाइसेंस रद्द कर दिया. 

- अमित शाह ने संसद में बताया कि 2005 से 2007 के बीच राजीव गांधी फाउंडेशन को चीनी दूतावास से 1.35 करोड़ रुपये का चंदा मिला था. ये नियमों का उल्लंघन था. इसी कारण FCRA रजिस्ट्रेशन कैंसिल किया गया. उन्होंने बताया कि ये पैसा भारत-चीन संबंधों के विकास पर रिसर्च करने के लिए मिला था.

- शाह ने ये भी कहा कि राजीव गांधी को जाकिर नाइक से भी 50 लाख रुपये मिले थे. जाकिर नाइक इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (IRF) का फाउंडर है. इस फाउंडेशन पर आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के कारण केंद्र सरकार ने बैन लगा रखा है. 

दोनों संस्थाओं को विदेश से कितना चंदा मिला?

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- राजीव गांधी फाउंडेशन और राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट, दोनों ही संस्थाओं की वेबसाइट पर विदेश से मिलने वाले चंदे का ब्यौरा दिया गया है.

- राजीव गांधी फाउंडेशन की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, अप्रैल 2015 से जून 2022 के बीच फाउंडेशन को विदेशी फंडिंग नहीं मिली है.

- वहीं, राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट को 2019-20 में 3.38 लाख रुपये का विदेशी चंदा मिला था. 2020-21 में ट्रस्ट को कोई विदेशी फंडिंग नहीं मिली.

विदेशी फंडिंग पर क्या हैं नियम?

- 1976 में जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं, तब उनकी सरकार में पहली बार फॉरेन कन्ट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट आया. 

- 2010 में मनमोहन सरकार में इस कानून को सख्त किया गया और राजनीति से जुड़ी संस्थाओं की विदेशी फंडिंग पर रोक लगा दी गई.

- मई 2014 में केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद इस कानून को और सख्त कर दिया गया. इसके मुताबिक, एनजीओ को जितनी विदेशी फंडिंग मिलेगी, उसका सिर्फ 20% ही प्रशासनिक कामकाज में इस्तेमाल किया जा सकता है. जबकि, पहले ये सीमा 50% तक की थी.

- इतना ही नहीं, एक एनजीओ विदेश से मिलने वाले चंदे को दूसरे एनजीओ के साथ साझा नहीं कर सकता. एनजीओ को जो भी विदेशी फंड मिलेगा, वो सिर्फ नई दिल्ली की एसबीआई ब्रांच में ही रिसीव किया जाएगा.

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